लेखक परिचय

आलोक कुमार

आलोक कुमार

बिहार की राजधानी पटना के मूल निवासी। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक (राजनीति-शास्त्र), दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नाकोत्तर (लोक-प्रशासन)l लेखन व पत्रकारिता में बीस वर्षों से अधिक का अनुभव। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सायबर मीडिया का वृहत अनुभव। वर्तमान में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के परामर्शदात्री व संपादकीय मंडल से संलग्नl

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अजीब हताशा का माहौल कायम हो चुका है मोदी विरोधी राजनीतिक दलों में , किसी के पास कोई मुद्दा ही नहीं है सिवाय मोदी विरोध के l देश की वास्तविक समस्याओं का तो कोई जिक्र ही नहीं कर रहा है , महंगाई , भ्रष्टाचार , आतंकवाद एवं अन्य मूलभूत समस्याओं और जनता को गौण कर सिर्फ सत्ता हासिल करने की ‘चूहा -दौड़ ” में शामिल हैं सब l मुझे तो ये मोदी विरोध की अतिशयता काँग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति दिखाई देती है ,अपनी सरकार की नाकामियों और भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान हटाने के लिए l

जिस तरह से मोदी विरोध का “डबल -ट्रिपल डोज़” जनता को पिला कर भरमाने की कोशिश की जा रही है वो कहीं उल्टा ना पड़ जाए इसके प्रेणताओं पर l लोकतन्त्र का अजीबो-गरीब “दिवालिया -स्वरूप ” उभर कर आ रहा है , जहाँ राजनीति का एक बड़ा तबका लोकहित में बहस से खुद को अलग कर सिर्फ और सिर्फ देश की जनता की आँखों में धूल झोंकने का काम कर रहा है l

चलिए एक क्षण को अगर मान भी लिया जाए कि मोदी और उनकी पार्टी “सांप्रदायिक (आज की राजनीति का सबसे बिकाऊ लेकिन उबाऊ शब्द )” हैं और सबों को मोदी को रोकना है l लेकिन मोदी को रोकने से देश की जनता को क्या लेना-देना ? लेना-देना कुर्सी -कब्जा करने वालों का है l

क्या देश के अल्पसंख्यकों की बदहाली के ज़िम्मेवार मोदी ही हैं ? क्या आजादी के बाद इन ६७ सालों तक मोदी ही इस देश की कुर्सी पर काबिज थे ? क्या आज देश जिस बदहाल स्थिति में है उसके ज़िम्मेवार मोदी ही हैं ? क्या देश को धर्म व जाति की ना बुझने वाली आग में झोंकने का काम मोदी ने ही किया है ? क्या देश में अपनी गहरी जड़ें जमा चुके आतंकवाद व उग्रवाद का पोषण मोदी ने ही किया है ? विदेशी -बैंकों में जमा सारा काल-धन क्या मोदी का ही है ? क्या देश की अधिसंख्य आबादी की थाली से दो जून का भोजन मोदी ने ही छिना है ? क्या देश के हरेक कोने में किसानों को आत्म-हत्या करने को मोदी ही प्रेरित कर रहे हैं ? क्या चीन , पाकिस्तान , बांगलादेश , नेपाल , बर्मा जैसे देश मोदी की शह पर ही आँखें तरेर रहे हैं ? देश की अर्थ-व्यवस्था को विदेशी कंपनियों के भाग्य-भरोसे क्या मोदी ने ही रख छोड़ा है ? क्या देश में अब तक हुए या हो रहे सारे धार्मिक-उन्मादों की पटकथा मोदी ने ही लिखी थी या लिख रहे हैं ? क्या कश्मीर के संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति मोदी ही कर रहे हैं ? क्या अवैध बांगलादेशी शरणार्थियों को भारत आने का निमंत्रण मोदी ने ही दिया था ? क्या लाखों करोड़ के घोटालों के पीछे मोदी का ही दिमाग काम कर रहा था ? क्या देश की सीमा पर घुसपैठियों द्वारा सैनिकों की हत्या की जिम्मेवारी भी मोदी पर ही तय होती है ? क्या बुखारी , ओवैसी जैसे देश में रहकर देश के खिलाफ ही जहर उगलने वाले लोग भी मोदी की शह पर ही आका बने बैठे हैं ? क्या मुजफ्फरनगर दंगा -पीड़ितों के शिविरों में हुई बच्चों की मौत के ज़िम्मेवार मोदी ही हैं ? क्या डॉ.ए.पे.जी कलाम जैसे महान राष्ट्रभक्त को दूसरी बार देश की सर्वोच्च –कुर्सी पर आसीन होने से मोदी ने ही रोका था ? क्या शाह बानो प्रकरण में भी मोदी की कोई भूमिका थी ? क्या तुर्कमान-गेट पर बुलडोजर मोदी ने ही चलवाया था ? जबर्दस्ती – नसबंदी के काले अध्याय को क्या मोदी ने ही अंजाम दिया था ? क्या विवादित बाबरी मस्जिद के ढाहे जाने के समय देश में मोदी की ही सरकार थी ? क्या देश की राजनीति में लालू , मुलायम , मायावती (अनेकों नाम हैं ) जैसे राजनीति के कोढ़ मोदी की शह पर ही फले-फूले ? “पीस-मिशन” के नाम पर श्रीलंका में देश के हजारों सैनिकों को क्या मोदी ने ही मौत के मुंहा में धकेला ? राजीव गांधी की हत्या में शक के घेरे में आने वालों के साथ क्या मोदी ने ही सत्ता में साझेदारी की ? क्या मोदी ने किसी धार्मिक –स्थल पर टैंक घुसवाकर कोई दमनात्मक कार्रवाई की है ? क्या देश का विभाजन मोदी की ही प्रधानमंत्री बनाने की लालसा के कारण हुआ था ?

आलोक कुमार ,

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1 Comment on "अतिशय मोदी विरोध से उठते चंद प्रश्न ???"

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gagan juneja
Guest

Very 2 nice and true.

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