लेखक परिचय

आर. सिंह

आर. सिंह

बिहार के एक छोटे गांव में करीब सत्तर साल पहले एक साधारण परिवार में जन्मे आर. सिंह जी पढने में बहुत तेज थे अतः इतनी छात्रवृत्ति मिल गयी कि अभियन्ता बनने तक कोई कठिनाई नहीं हुई. नौकरी से अवकाश प्राप्ति के बाद आप दिल्ली के निवासी हैं.

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aapअब जब कि  बहुतों की राय में दिल्ली में किसी भी पार्टी का बहुमत नहीं आएगा, तब अटकलें  तेज हो गयी हैं  कि आगे क्या होगा. ऐसे मेरा व्यक्तिगत अनुमान है कि  दिल्ली  की  जनता ने अपनी परम्परा का निर्वाह करते हुए एक निर्णयात्मक मत दिया होगा,पर मान लिया जाए कि इस सन्दर्भ में जो अनुमान लगाया जा रहा है,वह सही निकलता है. उस अवस्था में क्या हो सकता है? ऐसी उम्मीद तो नहीं की जा सकती है कि  भाजपा और कांग्रेस मिली जुली सरकार में शामिल होंगे.ऐसे श्री नितिन  गडकरी के हवाले ट्वीटर पर आया  है कि देश हित में भाजपा कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना सकती है. पर मुझे नहीं लगता कि  यह आसान है.

अब बारी आती है, आम आदमी पार्टी का इनमे से किसी भी पार्टी के साथ मिलकर  सरकार बनाने की सम्भावना की.इसमे सबसे बड़ी अड़चन है  आम आदमी पार्टी की सम्पूर्ण वर्त्तमान व्यवस्था से लड़ाई और उसीके आधार पर तैयार दिल्ली  विधान सभा  चुनाव २०१३ के लिए उनका संकल्प पत्र

आम आदमी पार्टी का दिल्ली विधान सभा चुनाव २०१३ के लिए संकल्प पत्र मेरे सामने है. मुख्य आवरण  पृष्ठ पर ही लिखा हुआ है,

“न खोखले दावे, न झूठे वादे

सच की राजनीति ,स्वराज का संकल्प “..

मुख्य आवरण पृष्ठ का पिछला हिस्सा खाली है.

इसके बाद आता है तृतीय पृष्ठ ,जो विषय सूची है और  यह सूची चतुर्थ  पृष्ठ तक है.

अब हम आगे बढ़ते हैं,तो पहला विषय है,

आम आदमी पार्टी क्यों?

इसमे लिखा है कि  पहले से ही  बहुत  पार्टियां  हैं. दिल्ली में दो राष्ट्रीय  पार्टियों के अतिरिक्त  अन्य पार्टियां भी  हैं  पर आम आदमी पार्टी एक पार्टी नहीं है.रामलीला मैदान और जंतर मंतर के अभूत पूर्व  आंदोलन से पैदा हुई यह पार्टी देश की राजनीति बदलने का एक औजार है.आज लोकतंत्र में लोक दबा हुआ है और तंत्र हावी है.आज सारी  व्यवस्था अफसरों ,नेताओं और उनके दलालों के चंगुल में है.,सरकारे पलटती हैं. पार्टियां बदलती हैं. नए चेहरे  आ जाते हैं,पर यह  व्यवस्था जस की तस बनी रहती है.एक आम आदमी इस व्यवस्था का ज्यों का  त्यों शिकार बना रहता है.आम आदमी पार्टी का मानना है कि इस व्यवस्था के रहते  लोगों के जीवन में खुशहाली नहीं आ सकती. वे इस व्य़वस्था को बदलना चाहते है. जनता और सरकार का रिश्ता बदलना चाहते हैं. वे कहते हैं कि हम खोखले वादें और झूठे दावे नहीं करना चाहते.

अब हम इस संकल्प पत्र की समीक्षा करते हुए आगे  बढ़ते हैं ,तो पाते हैं कि  आम आदमी पार्टी का सम्पूर्ण नजरिया आम  आदमी का नजरिया है,जिसमे झुग्गियों और फूटपाथों से लेकर पक्के मकानों में  रहने वाले लोग शामिल हैं.,न केवल डाक्टर,इंजीनियर,व्यापारी,शिक्षक और विद्यार्थी,बल्कि  लाखों मजदूर, घरेलू कामगार ,रिक्शे वाले, टैक्सीवाले और रेहड़ी -पटरी वाले भी  शामिल हैं. दिल्ली में चाहे वे पुस्तैनी रूप में रह रहे हों या रोजगार के चक्कर में यहाँ आये हों.दिल्ली  उन सबकी है.

सबसे बड़ी बात जो आम आदमी पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में दुहराई है,वह है स्वराज नीति. उनका मानना है कि  दिल्ली में बसने वाले  सम्पूर्ण निवासियों के सपने को साकार करना  सिर्फ किसी सरकार ,पार्टी या मंत्री का काम नहीं है. लोक तंत्र का मतलब है स्वराज.एक ऐसा राज  जहाँ लोग अपने सपने साकार कर सकें. अन्य सभी पार्टियां जनता से कहती  हैं कि सत्ता मुझे दो,बदले में हम तुम्हारा भला करेंगे.संकल्प पत्र के अनुसार आम आदमी पार्टी चुनाव  इसलिए लड़ रही है कि सत्ता वापस जनता के हाथों में सौंपी जा सके.

इसके बारे  में उन्होंने आगे लिखा है कि स्वराज की नीति पर अमल करवाना और राज काज की  पूरी व्यवस्था का परिवर्तन आम आदमी  पार्टी का संकल्प है.इस संकल्प के साथ आम आदमी पार्टी की सरकार  स्थानीय  मुद्दों का निर्णय लेने की ताकत मोहल्ला सभा को सौंप देगी सरकारी बजट का एक हिस्सा सीधे  इन सभाओं को दिया जाएगा  ताकि लोग स्वयं तय कर सके कि उन्हें अपने इलाके में  क्या काम करवाना है.जहां स्थानीय मुद्दों पर निर्णय मोहल्ला सभाएं लेंगी, वहीँ अन्य बड़े  मुद्दों पर राज्य सरकार को निर्णय लेने होंगे. राज्य सरकार जो  निर्णय लेगी उसे भी पारदर्शी बनाया जाएगा और जहां तक हो सकेगा जनता की राय ली जायेगी.

जन लोकायुक्त  पास करवाना एक मुख्य वादा है.

यह संकल्प पत्र अड़सठ  पृष्ठों  का है और अंत में वही वादा दुहराते हुए समाप्त होता है.:

न   खोखले दावे  न झूठे  वादे.

सच की राजनीति ,स्वराज का संकल्प.

संकल्प पत्र में दिल्ली की हर समस्या का समाधान मौजूद है. वह समस्या चाहे  महंगाई की हो, चाहे बिजली पानी की .चाहे  झुग्गी झोपड़ियों की हो,चाहे अनाधिकृत कालोनी की  .यमुना नदी के गंदगी  और पर्यावरण  सुरक्षा के मुद्दे भी सामने लाए गये हैं. इन सब मुद्दों और अन्य  मुद्दों को विभिन्न  शीर्षक  के अंतर्गत   रखा गया है और  हर मुद्दे   पर  एक एक करके  विस्तृत  चर्चा भी की  गयी है.फिर इनका समाधान भी ढूँढा गया है.ये सब मुद्दे बार बार दुहराए गये हैं.

मैं नहीं समझता कि दिल्ली के सन्दर्भ में ऐसी कोई समस्या है ,जिसको यहाँ नहीं प्रस्तुत किया गया हो और उसका समाधान नहीं ढूढ़ा गया हो.

क्या यह सम्भव है कि  कोई अन्य पार्टी इस संकल्प पात्र पर  लिखित रूप में सहमति जताए और आम आदमी पार्टी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस संकल्प को पूरा करे? इसके अतिरिक्त क्या अन्य पार्टियों के चुने हुए प्रतिनिधि उसी रहन सहन को अपनाएंगे,  जिसके लिए आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने पहले ही शपथ पात्र पर हस्ताक्षर किये हैं? अगर ऐसा सम्भव है तो शायद आम आदमी पार्टी किसी भी अन्य दल के साथ मिलकर सरकार बना सकती है,पर अगर वैसा नहीं सम्भव है तो किसी भी अन्य हालत में  अगर आम आदमी पार्टी किसी अन्य पार्टीं के साथ मिलकर साझा सरकार बनाती  है,या किसी साझा सरकार में शामिल होती है,तो वह अपना कब्र स्वयं खोद लेगी . चुनाव प्रचार के दौरान  यह प्रश्न  अनेको बार उठा था और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने इसके लिए साफ़ साफ़ इंकार कर दिया था.

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