लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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NETAमिलन सिन्हा

कसमें वादे  निभायेंगे  न हम

मिलकर खायेंगे जनम जनम

 

जनता ने चुनकर भेजा है

चुन- चुनकर खायेंगे

पांच साल बाद खाने का कारण

विस्तार से उन्हें बतायेंगे

 

कसमें वादे  निभायेंगे  न हम

मिलकर खायेंगे जनम जनम

 

हीरा-मोती, सोना-चांदी तो है ही

बस थोड़ा  और रुक जाइये

जंगल,जमीन के साथ साथ

कोयला भी सब खा जायेंगे

 

कसमें वादे  निभायेंगे  न हम

मिलकर खायेंगे जनम जनम

 

छोड़ दिया जब लज्जा व शर्म

तब काहे का कोई  गम

जारी रहेगा यूँ ही खाने का खेल

फूटे करम तभी जाना पड़ेगा जेल

 

कसमें वादे  निभायेंगे  न हम

मिलकर खायेंगे जनम जनम

 

खाने का अब चल पड़ा एक सिलसिला  है

सचमुच,खाना विज्ञानं नहीं एक कला है

खाते- खाते लोग कहाँ – कहाँ पहुँच जाते हैं

क्या ऐसे पराक्रमी लोग कभी पछताते हैं ?

 

कसमें वादे  निभायेंगे न हम

मिलकर खायेंगे जनम जनम !

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