लेखक परिचय

मनोहर पुरी

मनोहर पुरी

करीब चालीस वर्षों से पत्रकारिता में व्यस्त। विशेष संवाददाता, सह संपादक, संपादक के पद पर रह चुके हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। दो सौ से अधिक वार्ताओं, संसद समीक्षाओं और समसामयिक टिप्पणियों का प्रसारण। पांच सौ से अधिक कहानियाँ, कविताएँ, व्यंग्य एवं समसामयिक लेख देश विदेश की ख्याति लब्ध पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। समालोचनात्मक, सृजनात्मक, विवरणात्मक लेखन में रुचि।

Posted On by &filed under चुनाव, राजनीति, व्यंग्य.


-मनोहर पुरी- arvind kejrival slapped
‘‘कनछेदी ऐसा क्या हो गया कि आपके नेता जहां जा रहे हैं उनको थप्पड़ पड़ रहे हैं।’’ मैंने सड़क पर गिरे हुए कनछेदी का उठाते हुए कहा।
‘‘ राजनीति में आप हार डालने और थप्पड़ मारने को एक जैसा मान कर ही आगे बढ़ सकते हैं।’’ कनछेदी ने अपनी पेंट पर लगी धूल को झाड़ते हुए कहा।
‘‘ कनछेदी क्या यह कोई साजिश है अथवा जनता का आक्रोश जो उमड़ा पड़ रहा है। कोई आपके नेताओं के मुंह पर स्याही फेंक रहा है और कोई घूंसें मार रहा है। इस पर भी आप कह रहे हैं कि आपकी लोकप्रियता निरन्तर बढ़ रही है। यह आम आदमी वाली कैसी राजनीति है।’’ मैंने व्याकुल हो कर पूछा।
‘‘यही तो राजनीति है। राजनीति के इस रंग कोे आप अभी समझ नहीं पा रहे।’’ कनछेदी ने बिना किसी झिझक के उत्तर दिया।
‘‘ इतने वर्ष हो गये मुझे संसदीय चुनाव देखते हुए मैंने तो ऐसा रंग कभी देखा नहीं।’’
‘‘लगता है कि आपने विश्वविद्यालय में कभी चुनाव नहीं लड़े। वहां पर भी हम चुनाव जीतने के लिए अपने ही लोगों द्वारा स्वयं अपने आप पर हमले करवाया करते थे। यदि ऐसा नहीं हो पाता था तो हमारे प्रत्याशी स्वयं ही सिर पर पट्टी बांध कर अथवा टांग पर पलस्तर चढ़वा कर चुनाव प्रचार में निकल जाया करते थे। जानते हैं कि छात्र-छात्रायें बहुत भावुक होते हैं। विश्वास मानें भाई साहब ऐसे हथकंडों से हमें लड़कियों के वोट बड़ी संख्या में मिल जाया करते थे।’’कनछेदी ने कहा।
‘‘परन्तु यह किसी कॉलेज अथवा विश्वविद्यालय के चुनाव नहीं हैं। ये चुनाव लोक सभा के लिए हो रहे हैं। इन चुनावों में ऐसे ओछे हथकंडे कम से कम मेरी समझ के तो बाहर हैं।’’ मैंने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा।
‘‘हां, आज आप हम पर यह आरोप लगा सकते हैं कि हमारी राजनीति ओछी अथवा अपरिवक्व है। परन्तु यह आजमाई हुई है। इसके परिणाम हमेशा अच्छे ही होते हैं।’’
‘‘यदि आपके यह हमले प्रायोजित हैं तो इसे परिवक्व राजनीति नहीं कहा जा सकता। इसके लिए तुम्हें शर्म आनी चाहिए।’’ मैंने कनछेदी की भर्त्सना करते हुए कहा।
‘‘अन्य पार्टियों के नेताओं की भांति यहीं तो मात खा गये आप भी। भैया आप ने यह भुला दिया कि आज हमारे अधिंकांश मतदाता युवा हैं। वे अभी विश्वविद्यालीय राजनीति से बाहर नहीं निकले हैं। उन्हें प्रभावित करने के लिए हमारा यह हथकंड़ा आज भी कारगार सिद्ध हो चुका है। देश की राजनीति समझने में उन्हें कुछ समय लगेगा। तब तक हमारी राजनीति चमक जायेगी। क्या किसी और पार्टी को इतना अधिक प्रचार मिलता है जितना हमें मिलता है। जो गुर पुरानी पार्टियां इतने सालों में नहीं सीख सकीं वह हमने एक साल में ही सीख ही नहीं लिये उनका सफल प्रयोग करके भी दिखा दिया। हम बहुत जल्दी में हैं। विश्वास मानें कि यह नाटक एक बार फिर सफल होगा। युवा वर्ग क्योंकि उत्साह में रहता है इसलिए उसे अराजकता की सीमा तक ले जाना हमारा लक्ष्य रहता है। इसीलिए हमें स्वयं को अराजक कहलवाने में भी कतई एतराज नहीं है। यदि दो चार थप्पड़ खाने से चुनावों में सफलता मिलती हो तो सौदा बुरा नहीं है।’’ कनछेदी ने मुझे आराम से समझाने का असफल प्रयास किया।
‘‘सो तो ठीक है परन्तु क्या आप ईमानदारी की राजनीति का दम भरने के बाद इसे नैतिक मानते हैं।’’ मैंने प्रश्न उछाला।
‘‘हमने तो कभी अपनी नैतिकता का दावा किया ही नहीं। दूसरों पर ही आरोप लगाये हैं और आरोप लगाते ही वहां से निकल लिये हैं। और आपतो जानते हैं कि प्रेम और जंग में सब चलता है। आज चुनावों से बड़ा कोई और जंग तो होता नहीं। हम तो ऐसे मुद्दे उठाते हैं जो लोगों के दिलों को प्रभावित करें, भले ही उनके सिर के ऊपर से निकल जायें। इसलिए हमने बहुत से ऐसे प्रश्न उठाये हैं जिनका हल हमारे पास भी नहीं है परन्तु उसका क्षणिक प्रभाव तो लोगों पर पड़ता ही है। हमें कौन सा समस्यायों का समाधान करना है। हमें तो आम जनता में असंतोष का बीज बोना है। इसीसे हमारा लक्ष्य तो पूरा हो ही जाता है।’’
‘‘ऐसा कौन सा लक्ष्य प्राप्त हो गया आपको।’’ मैंने पूछा।
‘‘ क्या एक ही चुनाव में हम लोग आम से खास नहीं हो गये। क्या दूसरे दलों की अपेक्षा हमारे पास अधिक धन एकत्र नहीं हो रहा। हमने कितने ही लोगों को भूतपूर्व मंत्री और विधायक बना कर उनको उज्ज्वल भविष्य दिया है। अच्छा आप बतायें यदि हमने ऐसे झूठे सच्चे वायदे करके चुनाव जीत लिया तो क्या बुरा किया। कितने ही लोगों को पूर्व मंत्री बना डाला। कितने ही विधायकों की जीवन भर के लिए पेंशन लगावा दी। उन्हें समाज में एक सम्मानजनक पद पर बिठा दिया। भले ही हमारा नेता कुछ दिन का मुख्यमंत्री रहा परन्तु जीवनभर के लिए पूर्व मुख्यमंत्री तो बन ही गया। कांग्रेस और भाजपा में कितने ही ऐसे नेता हैं जो वर्षों से ऐसे पद के लिए एड़ियां रगड़ रहे हैं, परन्तु आज तक इस परम पद को प्राप्त नहीं कर पाये।’’ कनछेदी ने मुझ समझाया।
‘‘मैं तो यह समझ रहा था कि लोग आप पर अपने आप हमले कर रहे हैं।’’ मेरा स्वर विस्मय से भरा था।
‘‘ किसमें इतना साहस है जो आम आदमी पर हमला करे। हमला तो हमेशा खास आदमी पर ही होता है। फिर वे भला ऐसा क्यों करेंगे। हमारा तो ऐसा कोई इतिहास है नहीं जिससे लोग हमसे नाराज हों।’’ कनछेदी बोला।
‘‘मेरी धारणा थी कि लोग आपके सामने अपनी योग्यता का प्रदर्शन करनेे के लिए ही आप पर थप्पड़ और घूंसे बरसा रहे हैं।’’ मैंने अपनी शंका व्यक्त की।
‘‘आपको ऐसा क्यों लगा।’’ उसने पूछा।
‘‘आपने स्वयं यह माना है कि आपके दल का नैतिकता से कुछ लेना देना नहीं हैं। आपका एक ही ध्येय है किसी भी तरह अपना लक्ष्य प्राप्त करना। अन्य लोग भी इससे प्रभावित हो कर आपके दल की ओर आकर्षित हो सकते हैं और अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए आप पर घूंसे थप्पड़ बरसा सकते हैं। वे जानते हैं कि आपने एक ऐसे पत्रकार को लोकसभा का प्रत्याशी बना दिया जिसने पत्रकारिता की नैतिकता का त्याग करके कांग्रेस के मंत्री चिदम्बरम पर जूता फेंका था। यदि उसे मंत्री के प्रति किसी बात पर आक्रोश था, तो उसे किसी अन्य स्थान पर यह कार्य करना चाहिए था पत्रकार वार्ता में नहीं। उसे आक्रोश अपने साथ हुए किसी व्यक्तिगत अन्याय पर था न कि पत्रकारिता के विरूद्ध उठाये गये किसी कदम पर। परन्तु आप के नेताओं ने जूता फेंकने को उसकी योग्यता का पैमाना मान लिया। इसी से सबक लेते हुए बहुत से लोग आपके सम्मुख अपनी क्षमता का परिचय देने के लिए आने लगे हैं। ताकि आप स्वयं अपनी आंखों से उनकी योग्यता को परख लें और आने वाले चुनावों में टिकट देने का मन बना लें। जिस व्यक्ति की योग्यता आपके नेता स्वयं देख लेंगे उनको इसका लाभ तो भविष्य में मिलेगा ही।’’ मैंने अपनी बात को विस्तर से बताया।
‘‘यह ठीक है कि लोग इस प्रकार से भी हमारे नेताओं की नजरों में चढ़ना चाहते हैं और हम इसका डेटाबेस तैयारी भी कर रहे हैं। आप जानते ही हैं कि हम डाटा बैस बनाने और चुराने में बहुत माहिर हैं। भविष्य में ऐसे थप्पड़ और घूंसे मारने तथा मुंह पर कालिख मलने वाले योग्य व्यक्तियों को टिकट देने में वरीयता देने में हमारे नेता यदि पहल करेंगे तो मुझे कोई अश्चर्य नहीं होगा। आखिर आप जानते ही हैं कि देश की भावी राजनीति कुछ इसी दिशा में प्रगति कर रही है। हमारे नेता यदि भावी राजनीति की नब्ज पर अभी से हाथ रख रहें हैं तो आपको जलन क्यों हो रही है।’’ कनछेदी ने मेरा मुंह बंद करते हुए कहा और अपने नेता के रोड़ शो में सम्मिलित होने के लिए आगे बढ़ गया।
मैं अनायास ही जेब से रुमाल निकालकर अपने चेहरे पर भविष्य में लगने स्याही साफ करने लगा।

Leave a Reply

1 Comment on "थप्पड़ है योग्यता का प्रदर्शन"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
Dr. Ashok Kumar tiwari
Guest
Dr. Ashok Kumar tiwari
सब आधुनिक मेघनाद-कुम्भकर्ण- रावण ( मोदी + अम्बानी + कांग्रेस ) का कमाल है ! इन सबने मिलकर पूरे देश को बड़ी चालाकी से अपने वश में कर लिया है !! और जो भी इनकी सच्चाई कहेगा ये उसे बटबाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे !!! केजरीवाल जैसे ईमानदार और आई.ए.एस. कैडर का आदमी इन्हीं की घटिया मानसिकता का शिकार हो रहे हैं । ऐसा मैं इसलिए कह सकता हूँ क्योंकि १४ सालों से गुजरात में रहकर मैं अपनी आँखों से सब देख ही नहीं रहा हूँ बल्कि भोग भी रहा हूँ । पाकिस्तानी बॉर्डर पर रिलायंस टाउनशिप जामनगर… Read more »
wpDiscuz