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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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-प्रभाष झा

कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने में मात्र 15 दिन बचे हैं लेकिन इससे जुड़ी कोई भी अच्छी खबर नहीं मिल रही है। तैयारियां अभी भी पूरी नहीं हुई हैं और डर बना हुआ है कि पूरी हो भी पाएंगी या नहीं। साथ ही गेम्स के लिए आवंटित फंड्स के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के कारण भारत की खराब हो रही छवि से भी लोग चिंतित दिख रहे हैं। खिलाड़ियों को लेकर भी हाल अच्छे नहीं हैं। कई घरेलू खिलाड़ी डोपिंग में पकड़े गए हैं, तो कुछ ने खेलने से ही इनकार कर दिया। इसके अलावा दिल्ली के लोगों को लग रहा है कि गेम्स ने उनके दिनचर्या को भी अस्त-व्यस्त कर दिया है।

इन सब वजहों से निराश और हताश लोगों ने कॉमनवेल्थ गेम्स को अझेल मानते हुए काली पट्टी बांध कर इसके सांकेतिक विरोध की तैयारी शुरू कर दी है। ये लोग सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर जमा हो गए हैं। इसके लिए फेसबुक पर कॉमनवेल्थ झेल नाम से कम्यूनिटी बनाई गई है और इसकी टैगलाइन है द काली पट्टी कैंपेन। इस अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि वे कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जाहिर करेंगे। इस कम्यूनिटी से अब तक 2000 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं, जिनमें कई बड़े लेखक, पत्रकार, उद्योगपति और राजनेता भी शामिल हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री मणि शंकर अय्यर तो कहते ही रहे हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स फिजूलखर्ची के सिवा कुछ नहीं, अब और लोग भी कॉमनवेल्थ झेल से जुड़कर इसकी पुष्टि कर रहे हैं। इन लोगों में लेखक चेतन भगत, पूर्व सीबीआई चीफ जोगिंदर सिंह, बीजेपी के प्रवक्ता तरुण विजय, नवजोत सिंह सिद्धू और जाने-माने उद्योगपति राजीव चंद्रशेखर शामिल हैं। इसके अलावा कई जाने माने पत्रकार और प्राइवेट कंपनियों में बड़े ओहदों पर काम कर रहे लोगों के जुड़ने से इस अभियान को बल मिला है।

चेतन भगत ने गेम्स को भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी और मुखर मुहिम करार दिया है। अपने लेख में उन्होंने लिखा है, ‘ना सिर्फ आयोजकों ने जनता का पैसा चुराया है बल्कि हाथ में लिए काम का कूड़ा-कबाड़ा कर डाला है। पूरी दिल्ली को खोद डाला गया है और मुझे तो लगता है कि कॉमनवेल्थ खेलों का आधिकारिक संगीत ड्रिलिंग मशीन की कभी न खत्म होने वाली आवाज को बनाया जाए।’

सांसद और उद्योगपति राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि एक ऐसे देश में जहां क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों के खिलाड़ियों पर शायद ही खर्च किया जाता है, वहां कॉमनवेल्थ गेम्स हमारे युवा खिलाड़ियों के लिए एक अच्छा मौका होना चाहिए था। लेकिन यह हमारे देश में भ्रष्टाचार, कुशासन और अक्षमता का उदाहरण बन गया।

इस कम्यूनिटी के साथ दो हजार लोग जुड़ चुके हैं। इनमें ब्रिटेन और अमेरिका के नागरिक भी शामिल हैं। भारत के कुछ राजनेता और पूर्व नौकरशाहों ने भी इस कैंपेन का समर्थन किया है। पूर्वी सीबीआई प्रमुख जोगिंदर सिंह कहते हैं, ‘अगर कॉमनवेल्थ खेलों के लिए पैसा बर्बाद हो रहे धन से लिया जाता तो बहुत अच्छा रहता। लेकिन इन पर वो पैसा खर्च किया जा रहा है, जिसे दलितों के विकास के लिए, शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए रखा गया। एक ऐसा गरीब देश, जहां 42 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीते हैं, इस तरह की बर्बादी को आप क्या कहेंगे?’ कॉमनवेल्थ के विरोध में इस तरह की आवाजें कई जगहों से उठी हैं। हाल ही में भारतीय मीडिया में कराए गए सर्वे ने बड़े युवा तबके ने इसे फिजूलखर्ची बताया था।

इस फेसबुक कम्यूनिटी से जुड़े लोग बताते हैं कि इस सांकेतिक अभियान के जरिए वह सरकार को बताना चाहते हैं कि जनता की आंखों पर पट्टी नहीं बंधी है। इनका कहना है कि हम लोग गेम्स के नहीं, बल्कि इसके नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार और घोटालों के विरोधी हैं। एक निजी संस्थान में आईटी हेड के पद पर कार्यरत और इस कम्युनिटी में सक्रिय भूमिका निभा रहे के. बडथ्वाल कहते हैं, ‘पहली बार एक ऐसा अभियान चलाया जा रहा है जिसके साथ जुड़ना आम आदमी के लिए बेहद सरल है और हर जागरुक नागरिक को इससे जुड़ना चाहिए। जबर्दस्ती हम पर थोपे गए इन खेलों को हम झेलना नहीं चाहते।’

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1 Comment on "दिल्लीवालों के लिए अझेल हुआ कॉमनवेल्थ"

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श्रीराम तिवारी
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कल मध्यप्रदेश में कामनवेल्थ क्वींस बेटन को सभी ने हिकारत से देखा और दिल्ली की जो सूचनाएँ आप लोग दे रहें है इससे स्थानीय प्रेस -नयी दुनिया .देनिक भास्कर .फ्री प्रेस ,इंदौर समाचार तथा अन्य दर्जनों अखवारों में दिल्ली के दो रूप दिखाए जा रहे हैं एक वो जो इस आलेख में है दूसरा वो जो -अन्दर की बात है ?

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