लेखक परिचय

फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ान युवा पत्रकार, शायरा और कहानीकार हैं. आपने दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हरिभूमि में कई वर्षों तक सेवाएं दीं हैं. अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों का सम्पादन भी किया है. ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन केन्द्र से समय-समय पर कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहता है. आपने ऑल इंडिया रेडियो और न्यूज़ चैनल के लिए एंकरिंग भी की है. देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं के लिए लेखन भी जारी है. आपकी 'गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' नामक एक किताब प्रकाशित हो चुकी है, जिसे काफ़ी सराहा गया है. इसके अलावा डिस्कवरी चैनल सहित अन्य टेलीविज़न चैनलों के लिए स्क्रिप्ट लेखन भी कर रही हैं. उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल संपादन और लेखन के लिए आपको कई पुरस्कारों ने नवाज़ा जा चुका है. इसके अलावा कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी शिरकत करती रही हैं. कई बरसों तक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली है. आप कई भाषों में लिखती हैं. उर्दू, पंजाबी, अंग्रेज़ी और रशियन अदब (साहित्य) में ख़ास दिलचस्पी रखती हैं. फ़िलहाल एक न्यूज़ और फ़ीचर्स एजेंसी में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं.

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मेरे महबूब !

उम्र की

तपती दोपहरी में

घने दरख्त की

छांव हो तुम

सुलगती हुई

शब की तन्हाई में

दूधिया चांदनी की

ठंडक हो तुम

ज़िन्दगी के

बंजर सहरा में

आबे-ज़मज़म का

बहता दरिया हो तुम

मैं

सदियों की

प्यासी धरती हूं

बरसता-भीगता

सावन हो तुम

मुझ जोगन के

मन-मंदिर में बसी

मूरत हो तुम

मेरे महबूब

मेरे ताबिन्दा ख्यालों में

कभी देखो

सरापा अपना

मैंने

दुनिया से छुपकर

बरसों

तुम्हारी परस्तिश की है…

-फ़िरदौस ख़ान

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2 Comments on "नज़्म/ मेरे महबूब"

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anoop aakash verma
Guest

wah!!subhan allah!!…….aakhir mai to sirf mai hi hu….par tum to mere sbkuchh ho…..

amal
Guest

आप की कविता दिल को छु गए वास्तव में इसमें दिल से लिखे शब्द
झलकते है….

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