लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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लावण्य रूप मोहती,
उत्कृषठ बुद्धि धारती,
अपार शक्ति व्यापती,
नारी शक्ति भारती।
स्त्री विमर्श त्यागती,
स्वयं को पहचानती,
आरक्षण नहीं मांगती,
संरक्षण नहीं चाहती।
स्नेह आदर स्वीकारती,
दासता धिक्कारती,
कर्तव्य सब निर्वाहती,
स्नेह से दुलारती।

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3 Comments on "नारी शक्ति भारती"

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कुमार विमल
Guest
प्रभु की अनुपम कृति , अनुपम रचना,वह है नारी, सो जब रचा था प्रभु ने इस कृति को, सोचा सब अर्पण कर दूँ , इसकी खाली आँचल को खुशियों से भर दूँ । सो दिया उन्होंने रूप रंग,सोंदेर्ये , वह सामर्थ औ सहनशीलता वह अतुलनीय नारी शक्ति । प्रभु को गर्व हुआ अपनी इस कृति पर सोचा क्यों न इसे ओर ऊँचा उठाऊँ , क्यों न इसे जगत जननी बनाऊँ, क्यों न इसी से इस दुनिया पर राज कराऊँ । पर वह कृति वह नारी अब बोल पड़ी ” मै माता , मै जननी पावन बन जाऊँगी धरा धाम पर… Read more »
B N Goyal
Guest

बहुत सुन्दर .

डॉ. मधुसूदन
Guest

सहमति।
गोयल जी की टिप्पणी नें ध्यान आकर्षित किया। दोनों कविताएं अपने आप में सुन्दर हैं।
धन्यवाद।

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