लेखक परिचय

विकास कुमार गुप्ता

विकास कुमार गुप्ता

हिन्दी भाषा के सम्मान में गृह मंत्रालय से कार्रवाई करवाकर संस्कृति मंत्रालय के अनेको नौकरशाहों से लिखित खेद पत्र जारी करवाने वाले विकास कुमार गुप्ता जुझारू आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते है। इलहाबाद विश्वविद्यालय से PGDJMC, MJMC। वर्ष 2004 से स्वतंत्र पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। सम्प्रति pnews.in का सम्पादन।

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new media wingवैसे तो मीडिया के तारीफों को लेकर बहुत से सिद्धान्त है और मीडिया की वीरता के बहुत से बखान है। वाशिंगटन पोस्ट से लेकर जापानी मीडिया तक के। लेकिन न्यू मीडिया की कहानी भी कुछ कम नहीं। भारत जैसे विकासशील देश में लगभग 7 करोण 44 लाख उपयोगकर्ताओं में व्याप्त न्यू मीडिया न सिर्फ सरकारी अनदेखी से आहत है वरन पीआईबी सरीखे केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के नजरअंदाजी और कुनीतियों से भी आहत है। न्यू मीडिया को लेकर विज्ञापन और सहयोग से हमारे कार्पोरेट और सरकारी नजरअंदाजी सबके सामने है। जहां पचास कापी छपने वाले पत्रिका, अखबारों को न सिर्फ हजारों, लाखों का विज्ञापन नसीब हो रहा है बल्कि सरकारी और कार्पोरेट सहयोग और वाहवही भी नसीब हो रही है। लेकिन न्यू मीडिया असहाय, बेबस और लाचार है। मनु सिंघवी मामला, दिल्ली में हुये बलात्कार, नीरा राडिया सरीखें अनेकों मामले चिल्ला चिल्लाकर कह रहे है कि न्यू मीडिया अगर न होता तो ये मामले कबके काल के गाल में समा गये होते और इनके विक्टिम और आम जनता ब्रिटिश इंडिया सरीखी हाथ पर हाथ धरी रहती। अभी तक न्यू मीडिया के चर्चित साइट विस्फोट डाट काम को लेकर कोई प्रतिक्रिया किसी भी जगह नहीं आयी है। ऐसा होना न सिर्फ निराशाजनक है वरन यह साबित करता है जो न्यू मीडिया क्रान्ति व्रान्ति के प्रतीक स्वरूप मानी जाने लगी है उसी न्यू मीडिया में ऐसे संवेदनशील घटनाओं का कवर न किया जाना न सिर्फ बेमानी होगी बल्कि अनदेखी मानी जायेगी।

विस्फोट डाट काम के कर्ताधर्ता संजय तिवारी 29 अगस्त 2013 को अपने फेसबुक वाल पर कुछ इस प्रकार पोस्ट करते है -”एक बार फिर सर्वर कंपनी ने विस्फोट बंद कर दिया है. डेडीकेटेड सर्वर लेने की डिमांड कर रहा है. न्यूनतम खर्च 10 हजार मासिक बता रहा है. यह तो मेरे बूते से बाहर है. कोशिश कर रहा हूं. कुछ कर पाया तो करुंगा, नहीं तो मुझे माफ कर देना मित्रों, इस अकाल मौत के लिए.“। फिर इसपर अनेकों कमेन्ट्स आते है। और अनेकों बुद्धीजीवी अपने प्रवचन, राय से लेकर अनेकों प्रकार की प्रतिपुष्टी देते है। फिर 30 अगस्त को मोबाईल से ही संजय तिवारी अपने वाल पर पोस्ट करते है – ”जिन्होंने सहानुभूति दिखाई उनका शुक्रिया. जो सिर्फ सहानुभूति ही दिखाते रहे हैं उनका भी शुक्रिया. वैसे भी मैं कोई पेशेवर पत्रकार नहीं था. लिखने लगा तो लोगों ने पत्रकार बना दिया. कुछ और लोग लिखने लगे तो पोर्टल बन गया. यह तो पेशेवर लोगों का काम है. वही करें. मुझे नहीं लगता अब इस दुनिया में मेरे लिए कोई जगह बची है. आचमन करनेवालों को एक दिन तर्पण भी करना होता है.”। विस्फोट डाॅट की वर्तमान एलेक्सा वल्र्ड रैंकिंग 138235 है और इंडिया में इसकी रैंकिंग 14858 है जोकि काफी अच्छी मानी जा सकती है। हाइपस्टेट डाट काम के अनुसार इस समय 3337 यूनिक विजिटर, 10011 (3.0 प्रति विजिटर) डेली विजिटर जोकि अनुमानित 11.11 डाॅलर अपने पाॅपुलेरिटी के अनुसार अर्जन करने की क्षमता देते है। और इस वेबसाइट की अनुमानित कीमत हाइपस्टेट डाट काम के अनुसार लगभग 4326 डाॅलर है। जिसको अगर रुपये में 65 के हिसाब से भी कन्वर्ट किया जाये तो दो लाख इक्यासी हजार एक सौ नब्बे रुपये होता है। और इससे यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में न्यू मीडिया की क्या कीमत रह गयी है। जिस विस्फोट को संजय तिवारी 10 हजार का हवाला देकर बंद कर रखे है उससे न्यू मीडिया की स्थिति का न सिर्फ औकात पता चलती है वरन इससे न्यू मीडिया की स्थिति का भी अनुमान लगता है। एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी को करोणों रुपये दान में मिल रहे है। एक तरफ जहां सरकारी विज्ञापन पर हजारों करोण के वारे-न्यारे हो रहे है। वहीं न्यू मीडिया के चचिर्त वेबसाइट विस्फोट का हालिया भविष्य अंधकारमय है जैसा कि संजय तिवारी के वाल पोस्ट बयां कर रहे है। न्यू मीडिया के उपयोगकर्ता न सिर्फ खामोश है वरन सिर्फ माउथ बम ही छोड़ पा रहे है। ऐसा नहीं है कि यह विस्फोट के साथ पहली बार हो रहा है एक बार पहले भी विस्फोट के साथ इसके हाॅस्टिंग और विजिटर्स को लेकर प्राॅबलम आयी थी लेकिन उस समय संजय तिवारी ने इसे सुलझा दिया था। संजय तिवारी का विस्फोट डाट काम बन्द करने के पीछे क्या सिर्फ आर्थिक कारण है अथवा अन्य कारण भी है यह तो वही बता सकते है लेकिन इसके बन्द होने से न्यू मीडिया के राही निश्चय ही आहत है। अभी कुछ समय पहले एक्सचेंज फाॅर मीडिया द्वारा कराये गये मीडिया दिग्गजों के प्रतिभागी के रूप में संजय तिवारी का भी नाम आया था। 25 अगस्त को संजय तिवारी ने अपने वाल पर पोस्ट किया ”सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे लोगों को शर्म से डूब मरना चाहिए। चंद अखबारी और मीडिया घराने आज भी अपने सीमित संसाधनों से पूरी दुनिया के सूचना संचार पर राज कर रहे हैं। और इतनी बड़ी जमात होकर भी सोशल मीडिया सिर्फ उपभोक्ता की उपभोक्ता बनी हुई है।“ से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रिन्ट मीडिया का कितना वर्चस्व है। खैर इस संवेदनशील मुद्दे पर ज्यादा खोज खबर करना अच्छा नहीं होगा। फिर भी इसके परिप्रेक्ष्य में संजय तिवारी के हालिया 23 अगस्त के पोस्ट को देखा जा सकता है जो इस प्रकार है ”जिन्दगी के सवाल बहुत सरल होते हैं जो शायद चुटकियों में सुलझाये जा सकते हैं. यह तो हमारा पुरुषार्थ है कि हम समस्याओं के तिल का ताड़ बना देते हैं और ताड़ का पहाड़.“। सुनने में आया था कि विस्फोट डाट काम प्रिन्ट मीडिया में भी उतरा था खैर यहा चर्चा न्यू मीडिया की हो रही है तो प्रिन्ट मीडिया और अन्य पर्सनल मामलों को इसमें लपेटना उचित नहीं।
फिलहाल अभी तक तो विस्फोट डाट काम नहीं खुल रहा लेकिन आगे यह जारी रहेगा अथवा बंद होगा कहा नहीं जा सकता। लेकिन संजय तिवारी के वाल पोस्ट से इतना तो स्पष्ट है कि यह धनाभाव के कारण ही बन्द हो रहा है। अगर ऐसा हो रहा है तो निश्चय ही न्यू मीडिया पर उपलब्ध दर्शकों और कर्ताधर्ताओं को माउथ बम से इतर कुछ यथार्थ और सामयिक बम भी फोड़ने होंगे जोकि विस्फोट को न सिर्फ नवजीवन दे वरन इसे चलायमान करे। न्यू मीडियाजन हमेशा चाहते है कि भड़ास और विस्फोट जैसे साइट न सिर्फ जिन्दा रहे वरन अनवरत ऐसे ही चलते रहे।
प्रेस इंफारमेशन ब्यूरों केन्द्र सरकार वह कार्यालय है जो केन्द्रिय स्तर पर सभी माध्यमों के पत्रकारों, छायाकारों, सम्पादकों को मान्यता देता है। और केन्द्र सरकार की नीतियों को भी समय-समय पर प्रकाशित करता है। पीआईबी ने न्यू मीडिया के लिए दिशा निर्देश अभी भी पूरे नहीं किये है और कब पूरा करेंगे यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। अभी उनके द्वारा इसके दिशा निर्देश सालों से तैयार ही किये जा रहे है। हालांकी न्यू मीडिया और प्रिन्ट मीडिया के प्रत्यायन के दिशा निर्देश लगभग एक समान ही है लेकिन पीआईबी के दिशा निर्देश के निर्माणकर्ताओं ने कुछ ऐसी दोरंगी नीति बनायी है कि न्यू मीडिया वाले इसके योग्यता से दूर ही रहे। इन दिशा निर्देशों में प्रमुख है ”साइट के पास इसके केवल समाचार भाग से या तो 20 लाख रु. अथवा सम्पूर्ण वेबसाइट से 2.5 करोण रुपये, जिनमें समाचार भाग भी शामिल है, का कम से कम वार्षिक राजस्व उपलब्ध हो।“। अब 20 लाख और 2.5 करोण का वार्षिक राजस्व कौन कर सकता है यह सभी पत्रकार बन्धु सहित न्यू मीडिया विचरणकर्ता समझ सकते है। हालांकि अन्य नियम इसके लचिले है जैसे साईट के 10000 पेज व्यूव होने चाहिये और 6 बार प्रतिदिन साइट अपडेट होने चाहिए। वर्तमान में पीआईबी ने 1973 लोगों को मान्यतायें दे रखी है जिसमें न्यू मीडिया के लोग समुद्र में नमक के ढेले बराबर है। एक बार मैं उत्तर प्रदेश सूचना कार्यालय गया था वहां उच्चाधिकारी कहने लगे ”विकास जी हम लोग क्या कर सकते है न्यू मीडिया जन अगर इकट्ठे होकर आये और सरकार को अपने लिये प्रत्यायन और अन्य नीति बनाने पर दबाव बनाये तो हम तैयार है”।
अब समय आ गया है कि न्यू मीडिया को लेकर एक संगठन होना चाहिए और मुझे लगता है कि इसके लिये अगर सबसे उपयुक्त कोई है तो वह हैं यशवन्त सिंह। एक वहीं हैं जो इस संगठन के हित करने सक्षम और समर्पित भी है।

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