लेखक परिचय

इफ्तेख़ार अहमद

मो. इफ्तेख़ार अहमद

लेखक इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के अनुभवी पत्रकार है। वर्तमान में पत्रिका रायपुर एडिशन में वरिष्ठ सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं और निरंतर लेखन कर रहे हैं। कई राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों में इनके लेख प्रकाशित हो चुके हैं। पत्र पत्रिकाओं के लिए लेख मंगवाने हेतु 09806103561 पर या फिर iftekhar.ahmed.no1@gmail.com पर संपर्क करें.

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लेख का असर

नई दिल्ली. प्रवक्ता न सिर्फ विचार व्यक्त करने और नए लेखकों को अपनी पहचान बनाने का मौका प्रदान कर रहा है। बुिल्क, ये देश की दशा और दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। यहीं वजह है कि लगातार प्रवक्ता की लोकप्रियता और लेखकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पाठकों की लोकप्रियता और लेखकों की बढ़ती संख्या प्रवक्ता की ताकत बनती जा रही है। प्रवक्ता पर लिखे जा रहे लेखों पर शासन-प्रशासन की नजर भी रहती है। और लेखकों द्वारा व्यक्त किए गए विचार सरकार और प्रशासन को अपनी नितियों को बदलने पर मजबूर कर रही है। गौर किजिए हमारे लेखक मोहम्मद इफ्तेखार अहमद द्वारा वर्ष 201१ में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर लिखे गए लेख ‘क्या हमें स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन मनाने का हक हैÓ पर। इस लेख में लेखक ने युवाओं की कई समस्याओं का जिक्र किया है। खास तौर से नौकरी और स्कूल-कॉलेज में प्रवेश के लिए अंकसूचियों व चरित्र प्रमाण.पत्र की फोटोकॉपी राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित कराने के लिए फालतू चक्कर काटने जैसी देशभर के नौजवानों और छात्रों की समस्या को उठाते हुए कुछ सुझाव दिए थे, जिसे द्वितीय प्रशासनिक आयोग ने उचित मानते हुए शब्दश: लागू करने की सिफारिश की है। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्ट में सिटीजन सेंट्रिक एडमिनिस्ट्रेशन.हार्ट ऑफ गर्वेनेंस में स्वप्रमाणित की व्यवस्था को अमल में लाने की संस्तुति की गई है और कहा गया है कि सेल्फ सर्टीफिकेशन की व्यवस्था सिटीजन फ्रैंडली है।

रिपोर्ट में संस्था प्रमुखों से कहा गया है कि वे विभिन्न प्रकार के आवेदन पत्रों के साथ शपथ-पत्र लगाने व दस्तावेजों को राजपत्रित अधिकारियों से प्रमाणित कराने की वर्तमान व्यवस्था की आवश्यकता की समीक्षा करने के बाद सक्षम अधिकारी से अनुमोदन लेकर स्वप्रमाणित व्यवस्था लागू करें। प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव संजय कोठारी के पत्र में कहा गया है कि राजपत्रित अधिकारियों या फिर नोटरी से सर्टीफिकेट की प्रतियां प्रमाणित कराने की व्यवस्था न केवल अफसरों के मूल्यवान समय की बर्बादी है, बल्कि शपथ.पत्र बनवाना व दस्तावेजों को राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित कराना पैसे की भी बर्बादी है।
पूरा लेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें http://www.pravakta.com/we-have-the-right-to-celebrate-youth-day

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4 Comments on "प्रवक्ता के एक लेख ने बदल दी छह दशक पुरानी व्यवस्था"

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हिमवंत
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जो मौलिकता और लिखने वाले लेखक की धधकती आग प्रवक्ता पर देखने को मिलती है और कहां. निश्चित रूप से ऐसे लेखन से व्यक्ति बदलेगा, समाज बदलेगा और शाशन को बदलना पडेगा. लेखक, मो. इफ्तेख़ार अहमद जी, को बहुत बहुत बधाई

इफ्तेख़ार अहमद
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शुक्रिया

डॉ. मधुसूदन
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यह प्रवक्ता के लिए भी और प्रवक्ता के पाठकों के लिए भी उत्साहजनक समाचार है।
प्रवक्ता उत्तरोत्तर ऐसे यश के शिखर प्राप्त करता रहे।
लेखक, मो. इफ्तेख़ार अहमद जी, बधाई और धन्यवाद।

इफ्तेख़ार अहमद
Guest

डॉ.मधुसूदन जी प्रशंसा और उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया .

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