लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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    aap  भोजपुरी में एक कहावत है – ना खेलब आ ना खेले देब, खेलवे बिगाड़ देब। इसका अर्थ है – न खेलूंगा, न खेलने दूंगा; खेल ही बिगाड़ दूंगा। दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी ‘आप’ ने चुनाव के बाद गैर जिम्मेदराना वक्तव्य और काम की सारी सीमायें लांघ दी है। दिल्ली में पिछले १० वर्षों से कांग्रेस सत्ता में थी। वहां की दुर्व्यवस्था, भ्रष्टाचार और निकम्मेपन के लिये कांग्रेस और सिर्फ कांग्रेस ही जिम्मेदार है। इस चुनाव में दिल्ली की जनता ने कांग्रेस के खिलाफ़ मतदान किया जिसकी परिणति आप के उदय और भाजपा का सबसे बड़े दल के रूप में उभरना रही। इस समय आप के नेताओं के बयान कांग्रेस के विरोध में न होकर पूरी तरह भाजपा के अन्ध विरोध में आ रहे हैं। भाजपा की बस इतनी गलती है कि उसने अल्पसंख्यक सरकार बनाने से इन्कार कर दिया है। बस, यही बहाना है ‘आप’ के पास असंसदीय शब्दों में गाली-गलौज करने का। श्री हर्षवर्धन और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के धैर्य और संयम की प्रशंसा करनी चाहिये कि उन्होंने अबतक शालीनता का परिचय देते हुए गाली-गलौज से अपने को दूर रखा है।

      आज मुझे यह कहने में न तो कोई झिझक हो रही है और न कोई संकोच कि अरविन्द केजरीवाल विदेशी शक्तियों के हाथ का खिलौना हैं। वे दो एन.जी.ओ. – ‘परिवर्तन’ तथा ‘कबीर’ और एक क्षेत्रीय पार्टी ‘आप’ के सर्वेसर्वा हैं। उनकी संस्थायें विदेशी पैसों से चलती हैं। उन्होंने अपनी संस्थाओं के लिये फ़ोर्ड फ़ाउन्डेशन, अमेरिका से वर्ष २००५ में १७२००० डालर तथा वर्ष २००६ में १९७००० डालर प्राप्त किये जिसके खर्चे का हिसाब-किताब वे आज तक नहीं दे पाये हैं, जबकि उक्त धनराशि प्राप्त करने की बात उन्होंने स्वीकार की है। फ़ोर्ड एक मंजे हुए उद्यमी हैं। बिना लाभ की प्रत्याशा के वे एक फूटी कौड़ी भी नहीं दे सकते। केजरीवाल की संस्थाओं के संबन्ध विश्व के तीसरे देशों की सरकारों को अस्थिर कर अमेरिकी हित के अनुसार सत्ता परिवर्त्तन कराने के लिये बेहिसाब धन खर्च करनेवाली कुख्यात संस्था ‘आवाज़’ से है। ‘आवाज़’ एक अमेरिकी एन.जी.ओ. है जिसका संचालन सरकार के इशारे पर वहां के कुछ बड़े उद्योगपति करते हैं। इस संस्था का बजट भारत के आम बजट के आस-पास है। यह संस्था अमेरिका के इशारे पर अमेरिका या पश्चिम विरोधी सरकार के खिलाफ Paid Agitation चलवाती है, वहां व्यवस्था और संविधान को नष्ट-भ्रष्ट कर देती है और अन्त में अपनी कठपुतली सरकार बनवाकर सारे सूत्र अपने हाथ में ले लेती है। जैसमिन रिवोल्यूशन के नाम पर इस संस्था ने लीबिया में सत्ता-परिवर्त्तन किया, तहरीर चौक पर आन्दोलन करवाया, मिस्र को अव्यवस्था और अराजकता की स्थिति में ढकेल दिया तथा सीरिया में गृह-युद्ध कराकर लाखों निर्दोष नागरिकों को भेड़-बकरी की तरह मरवा दिया। वही पश्चिमी शक्तियां ‘आवाज़’ और फ़ोर्ड के माध्यम से केजरीवाल में पूंजी-निवेश कर रही हैं। यही कारण है कि कांग्रेस द्वारा बिना शर्त समर्थन देने के बाद भी अरविन्द केजरीवाल दिल्ली में सरकार बनाने से बार-बार इन्कार कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की जनता से जो झूठे और कभी पूरा न होनेवाले हवाई वादे किये हैं, वे भी जानते हैं कि उन्हें पूरा करना कठिन ही नहीं असंभव है। दिल्ली की जनता ने उन्हें ७०/७० सीटें भी दी होती, तो क्या वे बिजली के बिल में ५०% की कटौती कर पाते, निःशुल्क पानी दे पाते या बेघर लोगों को पक्का मकान दे पाते? मुझे पुरानी हिन्दी फिल्म श्री ४२० की कहानी आंखों के सामने आ जाती है – नायक ने बड़ी चालाकी से बंबई के फुटपाथ पर सोनेवालों में इस बात का प्रचार किया कि गरीबों की भलाई के लिये एक ऐसी कंपनी आई है जो सिर्फ सौ रुपये में उन्हें पक्का मकान मुहैया करायेगी। गरीब लोगों ने पेट काटकर रुपये बचाये और कंपनी को दिये। लाखों लोगों द्वारा दिये गये करोड़ों रुपये पाकर कंपनी अपना कार्यालय बन्द कर भागने की फ़िराक में लग गई। फुटपाथ पर सोने वालों का अपना घर  पाने का सपना, सपना ही रह गया। राज कपूर ने आज की सच्चाई की भविष्यवाणी सन १९५४ में ही कर दी थी। आज भी तमाम चिट-फंड कंपनियां सपने बेचकर करोड़ों कमाती हैं और फिर चंपत हो जाती हैं। अरविन्द केजरीवाल भी सपनों के सौदागर हैं। इस खेल में फिलवक्त उन्होंने कम से कम दिल्ली में इन्दिरा गांधी और सोनिया गांधी को मात दे दी है। वे राजनीति की प्रथम चिट-फंड पार्टी के जनक है। तभी तो कांग्रेस द्वारा समर्थन दिये जाने के बाद भी, २८+८=३६ का जादुई आंकड़ा छूने के पश्चात भी राज्यपाल से मिलने का साहस नहीं कर पा रहे हैं। दिल्ली की अधिकारविहीन सरकार के पास गिरवी रखने के लिये  है भी क्या? कोई ताजमहल भी तो नहीं है। वे चन्द्रशेखर की तरह भारत के प्रधान मंत्री भी नहीं होंगे जो देश के संचित सोने को गिरवी रखकर कम से कम चार महीने अपनी सरकार चला ले।

जिस अन्ना हजारे के कंधे पर खड़े होकर उन्होंने प्रसिद्धि पाई, उसी का साथ छोड़ा। अन्ना ने पिछले साल ६ दिसंबर को संवाददाता सम्मेलन में केजरीवाल को स्वार्थी और घोर लालची कहा था। अन्ना कभी झूठ नहीं बोलते। केजरीवाल का उद्देश कभी भी व्यवस्था परिवर्त्तन नहीं रहा है। सिर्फ हंगामा खड़ा करना और अव्यवस्था फैलाना ही उनका मकसद है। भारत को सीरिया और मिस्र बनाना ही उनका लक्ष्य है। साथ देने के लिये सपना देखने वाले गरीब, हत्या को मज़हब मानने वाले नक्सलवादी और पैन इस्लाम का नारा देनेवाले आतंकवादी तो हैं ही। लेकिन पानी के बुलबुले का अस्तित्व लंबे समय तक नहीं रहता। जनता सब देख रही है। जिस जनता ने राहुल की उम्मीदों पर झाड़ू फेर दिया है, अपनी उम्मीदों और सपनों के टूटने पर सपनों के सौदागर केजरीवाल के मुंह पर भी झाड़ू फेर दे, तो कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं होगा। शुभम भवेत। इति।

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22 Comments on "सपनों का सौदागर – अरविन्द केजरीवाल"

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डॉ. मधुसूदन
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=====>Ford foundation: managing dissent in India — Sandhya Jain <========
लेखिका संध्या जैन का, उपरोक्त आलेख कुछ अधिक स्पष्टता कर पाएगा।यदि इ मैल पता भेजे, तो मैं आपको आलेख ( सुविधानुसार) भेज सकता हूँ।

डॉ. मधुसूदन
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भविष्य के भारत को शक्तिशाली बनने से रोकने का उद्देश्य है, सब से बडी महा सत्ता का। कैसे? पढें। चाहे तो, मेरा तर्क खण्डन कीजिए। संक्षेप में बिंदुवार पढें। (१)भारत शक्तिशाली बनकर उभरे, ऐसी इच्छा महासत्ताओं की नहीं है। संसार की अग्रणी सत्ताएँ, चीन, अमरिका, और अब भारत भी(३रे क्रमपर), माना जा रहा है।हम उनके प्रतिस्पर्धी हैं। (२) भारत कुछ धनी भी माना जा रहा है; जो हमें पारदर्शी रूपसे दिखता नहीं है, कारण हमारा अंतिम पंक्तिका ग्रामीण, गरीब और कृषक, इत्यादियों की उपेक्षा हमने की है।धन का संचार, भ्रष्टाचार ने रोक रखा है। (३)महासत्ताएँ वर्चस्ववादी ही हैं। वे विश्वबंधुत्व… Read more »
आर. सिंह
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स्थापित राजनैतिक पार्टियों के कमीनेपन से आम आदमी पार्टी टक्कर लेने में अभी असमर्थ है,पर उसके संचालकों और कार्यकर्ताओं का लग्न और कटिबद्धता इस कमीनेपन पर भारी पड़ रहा है. जो लोग फोर्ड फाउंडेशन या उसके द्वारा दिए गए अनुदान की बधिया उधेड़ कर आम आदमी पार्टी को बदनाम कर रहे हैं,वे भूल रहे हैं कि आम आदमी पार्टी के बीस करोड़ के चंदे में एक पैसा भी फोर्ड या ऐसे ही किसी दूसरे फाउंडेशन का नहीं है.अगर ऐसा होता ,तो सुब्रमण्यम स्वामी जैसे लोग आम आदमी पार्टी को खा गए होते. आम आदमी पार्टी के चंदे के एक एक… Read more »
शिवेंद्र मोहन सिंह
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शिवेंद्र मोहन सिंह
बहुत खूब सिन्हा जी….. कुमार विश्वास जी का एक विडियो क्लिप आया है, जिसमे वो बोलते हैं कि, ” हमें ये पता नहीं कि हम दिल्ली में जीतेंगे या नहीं लेकिन हमें ये पता है कि हम रायता फ़ैलाने आए हैं और रायता पूरा फैला के जायेंगे”. इसी वक्तव्य से “आप” कि मानसिकता का पता चल जाता है कि “आप” की मंसा क्या है? खैर दिल्ली वालों ने सर माथे पे बैठाया है, शेष वही जाने. अभी १८ मांगे आई हैं फिर ११८ आ जाएंगी. दोनों पार्टियां समर्थन कर रही हैं फिर राज करने में क्या हानि है? काम जो… Read more »
Bipin Kishore Sinha
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my mail id is bipin.kish@gmail.com
Thanks for your comments.

डॉ. मधुसूदन
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(१)आज एक समाचार(इ मैल से) आया है, कि, कैसे अमरिका की “सी. आय. ए.” परदेशों की राजनीति को अमरिका के हितों के लिए, प्रभावित करने के लिए, फ़ोर्ड फाउण्डेशन का उपयोग करती है। बहुत, बहुत चौंकानेवाला समाचार है। (२)इस स्रोत (फोर्ड फाउण्डेशन )के नाम से किसी को संदेह होनेकी कम ही संभावना मानता हूँ। (३)अभी बहुत व्यस्तता चल रही है, नहीं तो, पूरा आलेख बना डालता। फिर भी इ मैल पता देने पर मैं अंग्रेज़ी की सामग्री जो मेरे पास आयी है, उसे भेज सकता हूँ। (४) आप पाठकों ने ध्यान में लिया होगा ही, कि, जब मोदी के नेतृत्व… Read more »
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