लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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डॉ. प्रणव पंड्या से डॉ. मयंक चतुर्वेदी की बातचीत

भारत को आध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण करने के उद्देश्य को लेकर देश के सभी ६२६ जिलों में कार्य करने वाली संस्था गायत्री परिवार पिछले ८५ वर्षों से लोक जागृति के कार्य में जुटी हुई है। पंडित श्रीराम आचार्य एवं भगवती देवी शर्मा के संयुक्त प्रयासों से १९२६ से शुरू हुए इस गायत्री परिवार की शाखाएं आज देश के कौने-कौने में हैं । वहीं विश्व के ७० देशों में १० क�ोड़ से ज्यादा की संख्या में लोग गायत्री मिशन से जुड़े हुए हैं। इस समय गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या हैं। जिन्होंने ‘हन्दुस्थान समाचार’ मध्यप्रदेश के ब्यूरो प्रमुख डॉ. मयंक चतुर्वेदी से बातचीत के दौरान खुलकर अपने मिशन के उद्देश्यों और कार्यों पर प्रकाश डाला।

प्रश्र- गायत्री परिवार भारतीय धर्म, संस्कृति के प्रचार-प्रसार के अलावा समाज सेवा से जुड़े अन्य कौन से सेवा कार्यों का संचालन कर रहा है?

उत्तर- समाज सेवा से जुड़े अनेक सेवा कार्य यथा नशा उन्मूलन, आदर्श विवाह, वृक्षारोपण, स्मृति उपवनों का निर्माण, शिक्षा और विद्या का सार्थक समन्वय, आदर्श ग्रामों का निर्माण जैसे कार्य सारे भारत में संचालित किये जाते हैं।

 

प्रश्र- धर्म और विज्ञान का समन्वय, इस पर प्रारंभ से ही गायत्री परिवार का जोर रहा है, पिछले वर्षों में इसे लेकर हुए अनुसंधानों के बारे में बताएं ?

उत्तर- धर्म और विज्ञान को लेकर जो अनुसंधान हुए हैं, उनकी उपलब्धियाँ बड़ी आश्चर्यजनक हैं। संस्कार, जीवन मूल्यों में परिवर्तन, यज्ञ और साधना के जो प्रभाव जीवन पर पड़ते हैं, उस पर हमने समय-समय पर अखंड ज्योति पत्रिका में विस्तार से प्रकाशित किया है। रिसर्च जनरल भी प्रकाशित हुए हैं।

 

प्रश्र- देश के सामने आप कौन-कौन सी समस्याओं को प्रमुख चुनौतियों के रूप में देखते हैं और क्या इनका समाधान संभव है?

उत्तर- देश के सामने जो आज सबसे बड़ी चुनौती है, वह है नैतिक मूल्यों का ह्रास, विचारों का प्रदूषण और जीवन में कृत्रिमता का समावेश। इनका समाधान एक ही है कि हम लोगों के विचारों को बदलें। चाहे वह भ्रष्टाचार हो या मुनाफाखोरी, परिवर्तन विचार क्रान्ति द्वारा ही संभव है।

 

प्रश्र- क्या देश के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के अनुसार २०२० में भारत वैश्विक शक्ति बनकर उभरेगा ?

उत्तर- पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने जो घोषणा की है कि २०२० में भारत वैश्विक शक्ति बनकर उभरेगा वह पूर्णतरूप सही है। अभी से उसके प्रमाण दिखाई देने लगे हैं। भारत के पास ज्ञान का बल है। भ्रष्टाचार पर नियंत्रण हो गया तो नैतिकता के आधार पर भारत पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है।

 

प्रश्र- यह माना जाए कि अमेरिका की तरह भारत ताकतवर होगा, जो आज विकास के उच्च धरातल पर पहुँचते ही आर्थिक संकट का बार-बार सामना कर रहा है।

उत्तर- भारत वैश्विक शक्ति बनेगा लेकिन अमेरिका की तरह नहीं। यह जगतगुरु स्तर की स्थिति होगी। आर्थिक समता का युग होगा, एकता का जमाना होगा और शुचिता का समावेश होगा।

 

प्रश्र- सुनने में आया है कि अमेरिकन राष्ट्रपति ओबामा अपने देश की समृद्घि को बनाए रखने और खुशहाली के लिए वैदिक मंत्रों का सहारा लेंगे। वह व्हाइट हाऊस में आपके मार्गदर्शन में शीघ्र ही यज्ञ करवाने वाले हैं, कितनी सच है, यह बात ? यह यज्ञ कब और किस माह में संपन्न होगा?

उत्तर- जो आपने सुना है वह सही है। यह प्रस्ताव आया है कि व्हाइट हाऊस में एक गायत्री यज्ञ हो। माह नवम्बर के अंत में यह संभव हो सकता है। इससे पूरे अमेरिका में वैदिक ज्ञान-विज्ञान का प्रचार होगा। हमें आशा करना चाहिए कि यह प्रस्ताव क्रियान्वित हो।

 

प्रश्र- अभी भारत सहित दुनिया में गायत्री परिवार के सदस्य कितने हैं, तथा कितने देशों में आपके द्वारा भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रभाव बढ़ाने के साथ सेवा कार्य किये जा रहे हैं?

उत्तर- अभी भारत सहित दुनिया भर में गायत्री परिवार से जुड़े एवं इसके प्रति शुभेच्छा रखने वाले परिजनों की संख्या १० करोड़ है। लगभग ७० देशों में भारतीय संस्कृति का प्रभाव बढ़ाने के साथ सेवा कार्य किये जा रहे हैं। लगभग तीस लाख से ज्यादा प्रवासी भारतीय एवं विदेशी गायत्री परिवार से, इसकी विचारधारा से प्रभावित हैं।

 

प्रश्र- चीन की दादागिरी, बांग्लादेश की चार करोड़ से ज्यादा संख्या में भारतीय घुसपैठ, पाकिस्तान की हिन्दुस्तान को कमजोर करने की कूटनीति, नेपाल में भारत के प्रति कम होती श्रद्घा, श्रीलंका के तटों पर तैनात चीन, भूटान, वर्मा में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप तथा अफगानिस्तान में भारत विरोध, अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे को आप किस रूप में देखते हैं और आखिर क्या कूटनीति, विदेशनीति एवं योजना � ��नाई जानी चाहिए, जिससे कि भारत को अपने पड़ोसी देशों का सहयोग और समर्थन मिले।

उत्तर- पड़ौसी देशों की भारत के प्रति विषम दृष्टि को देखते हुए हमारी सैन्य नीति ऐसी होना चाहिए जिससे कि हम अपने भू-भाग की पूरी तरह रक्षा करते हुए उनके दावों को निरस्त कर सकें और उनको यह सोचने पर मजबूर कर दें कि बिना भारत के समर्थन के उनका अस्तित्व संभव नहीं है।

 

प्रश्र- अन्ना हजारे, के बाद भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे को क्या कभी गायत्री परिवार आपके नेतृत्व में खुलकर समर्थन देगा?

उत्तर- अन्ना हजारे के बाद गायत्री परिवार हमारे नेतृत्व में भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि कई मुद्दों पर समर्थन देने को तैयार है। अभी साधनात्मक पृष्ठभूमि तैयार हो रही है। अगले दिनों हम लोग इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य करेंगे।

 

प्रश्र- आज भारत की जो भी समस्याएँ हैं, उनका समाधान आखिर क्या है?

उत्तर- भारत की मुख्य समस्या एक ही है कि हमने अपनी सांस्कृतिक विरासत को भुला दिया है और मूल्यों की उपेक्षा करते हुए वैश्वीकरण को स्वीकार कर लिया है। समाधान एक ही है भारतीय संस्कृति का विश्वव्यापी विस्तार हो और उसे जन-जन में प्रचारित किया जाये।

 

प्रश्र- शक्तिशाली भारत निर्माण में गायत्री परिवार की भूमिका व संभावनाओं पर प्रकाश डालें।

उत्तर- शक्तिशाली भारत निर्माण में वर्तमान और भविष्य में गायत्री परिवार की भूमिका बड़ी विशेष होने जा रही है। हमारे पास वे सभी सूत्र हैं जिनके द्वारा हम नव निर्माण की योजनाओं को गति दे सकते हैं। हमारी गुरुसत्ता ने लगभग सभी समस्याओं के समाधान हर परिप्रेक्ष्य में दिये हैं। संभावनायें अनेक हैं और विभिन्न समूहों में हमारे कार्यकर्ता आने वाले दिनों में सक्रिय होंगे। और २०२० तक सत युग की वापसी का एक स्वरूप प्रस्तुत करेंगेे।

 

प्रश्र- बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विश्वविद्यालयों तथा तकनीक को आप इस देश में किस रूप में स्वीकार करेंगे, क्या भारत जैसे विकासशील देश में इन से हो रही प्रतिस्पर्धा इस देश के हित में है?

उत्तर- बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विश्वविद्यालयों तथा तकनीक को हमें उतना ही स्वीकार करना चाहिए जितना कि उनका विधेयात्मक प्रभाव है, जिनका रचनात्मक उपयोग कर सारे देशों के साथ हम कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो सकते हैं। भारत कई मामलों में इनसे प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता, पर वह हमारे लिए सही भी नहीं है। हमें बेस्ट ऑफ ईस्ट और बेस्ट ऑफ वेस्ट का समन्वय करना होगा। भारत विकासशील देश है और तकन� ��क में भी हम बहुत आगे हैं किन्तु बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसके लिए खतरा हैं। हमारे देश का विकास ग्राम स्वराज के आधार पर ही चलना चाहिए, जो गांधी जी का सपना था।

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