लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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शादाब जफर ‘‘शादाब’’

अखिलेश की सपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में सौ दिन पूरे किये और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव जी ने अखिलेश के शासन को सौ में से सौ नंबर दे दिये। सरकार के सौ दिन पूरे हुए और उसे सौ में से सौ नंबर भी मिल गये पर इन सौ दिनो में सपा सरकार ने एक दिन भी कुछ ऐसा नहीं किया जिससे लगे कि ये सरकार पिछली सरकार से कुछ अलग और इन सौ नम्बर की हकदार हो। उत्तर प्रदेश की जिस जनता ने मायावती सरकार को जिन कारणों से सत्ता से बेदखल किया था। वो सारी की सारी आज भी उसी प्रकार प्रदेश में जमी है। सफल सरकार का आकलन करने के लिये ये देखा जाता है कि किसी भी सरकार के कार्यकाल में लोग खुद को कितना सुरक्षित महसूस करते है उत्तर प्रदेश के चुनाव से पूर्व जिस सपा ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर शोर मचा रखा था उसी सपा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से अखिलेश यादव से इन सौ दिनों में बिगडी हुई कानून व्यवस्था पटरी पर नहीं लाई गई। सपा सरकार के राज में हर रोज चोरिया, डकैतिया, राहजनी इतनी बढी की रात की बात तो छोडिये दिन में ही पूरे प्रदेश में कई हफ्तों तक रोज तीन चार जगह लगातार डकैतिया, चोरिया, राहजनी, लूट, हत्याए हुई। कहा जा सकता है कि प्रदेश सरकर इन सौ दिनों में कानून व्यवस्था के मोर्च पर पूरी तरह विफल रही।

वही दूसरी ओर इस प्रचंड़ गर्मी में बिजली की बेतहाशा कटौती ने लोगों के होश उड़ा दिये। ये सही है कि प्रदेश की बिजली की आपूर्ति और खपत में बहुत ज्यादा अंतर है। इस लिये कटौती जरूरी है लेकिन कटौती का कोई फिक्स शेड्यूल न होने की वजह से बिजली की अंधाधुध कटौती से इस भयानक गर्मी में कोहराम मच गया और मजबूरन सरकार को एक आदेश पारित करना पड़ा जिस में दुकानो और मॉल बंदी की समय सीमा निर्धारित की गई पर अगले ही दिन अचानक सरकार अपने आदेश से पलट गई जिस का प्रदेश की जनता पर बहुत बुरा असर पड़ा लोगो को लगा सरकार को व्यापारियों ने खरीद लिया है। इस सब के बावजूद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव जी ने भले ही पुत्र मोह में अपने बेटे की सरकार को सौ में से सौ नम्बर दे दिये हो पर यदि इन सौ दिनो को जनता की कसौटी पर रखा जाये तो अखिलेश और उन की सरकार को शायद सौ में से तैतीस नम्बर बड़ी मुश्किल से मिले।

15 मार्च को शपथ लेने के बाद जिस प्रकार से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणाएं की वो इन सौ दिनों में कही से कही तक नजर नहीं आई। वही पिछली सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में सैकड़ों करोड़ के भ्रष्टापचार उजागर होने के बावजूद नई सरकार इन के आरोपियों पर कोई ठोस कार्यवाही आज तक नहीं कर पाई। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली उन तमाम कारणो में से एक है जिस की वजह से मतदाताओं ने बसपा को सबक सिखाया। ये नई सरकार के लिये भी सबक था पर नई सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) 5000 करोड़ के घोटाले से कोई सबक लिया। आज प्रदेश के सरकार अस्पताल खुद किस कदर बीमार है शायद सरकार को ये बताने की जरूरत नही। आज प्रदेश की गरीब जनता के लिये इन अस्पतालो में दवाई और इलाज के नाम पर सिर्फ खाना पूरी कर के डाक्टर अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेते है। मरीज घंटों तड़पने के बाद दम तोड देता है। और सरकारी डाक्टर प्राईवेट नर्सिग होमो में मोटी कमाई में लगे रहते है या फिर अपने अपने घरो में एसी कमरो में पडे रहते है आज प्रदेष के अनेको सरकारी अस्पाल वार्ड बॉय, नर्स, एएनएम, और जूनियर डाक्टरो के भरोसे चल रहे है क्या सरकार को ये नही पता है पर सरकार क्यो खामोश है क्या अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले डाक्टरो पर कार्यवाही करने में सरकार को दो तीन वर्श का समय चाहिये। आज प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो का बुरा हाल है न दवाए, सर्जन, विशेषज्ञ डाक्टर, बिस्तर पलंग, आपरेशन थिएटर, एक्स-रे मशीने, पैथोलॉजी लैब, एम्बुलेंस, बाल रोग विशेशज्ञ और महिला विशेषज्ञ डाक्टरो की भरी कमी है या इसे यू भी कहा जा सकता है कि ये सेवाए ग्रामीण और कस्बाई सरकारी अस्पतालों में आज न कि बराबर है। क्या सरकार को इस ओर ध्यान नहीं देना चाहिये।

जिस पोन्टी चड्डा के साथ मिलकर मायावती सरकार ने प्रदेश की सैकडों करोड़ की लगभग दो दर्ज से अधिक सरकारी चीनी मिलों को निजी क्षेत्रों को कौड़ियों के दाम में बेचा और सपा ने चुनाव से पूर्व इस मुद्दे पर खूब हो हल्ला मचाया, प्रर्दशन किये। जिस सपा ने चुनाव से पहले प्रदेश की जनता से वादे किये कि वक्त और समाजवादी की सरकार आने पर दोशियो को बक्शा नही जायेगा समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही भ्रष्टााचारियों और तमाम घोटालेबाजों की पीठ पर कानून का डण्डा चल पडेगा। प्रदेश की जनता की खून पसीने की गाढ़ी कमाई की लूट खसोट करने वाले जेल के भीतर होगे। पूर्ण बहुमत के साथ सपा सत्ता में आई मगर जब इस संबंध में गम्भीरता से जांच और दोशियो को सबक सिखाने का समय आया तो समाजवादी की अखिलेश सरकार ने ऐसे लोगो पर कोई ठोस कार्यवाही करने से साफ इंकार कर दिया।

इस में कोई शक नही की प्रदेश के मुख्यमंत्री बेहद युवा अनुभवहीन है इस सब के बावजूद वो प्रदेश को प्रगति की ओर ले जाने के लिये प्रयासरत दिखाई दे रहे है पर वास्तविकता के धरातल पर अभी ऐसा कुछ दिखाई नही दे रहा कि सरकार को सौ में से सौ नम्बर दिये जाये। अखिलेश सरकार को सौ नम्बर देने से पहले माननीय मुलायम सिॅह जी को सौ बार ये जरूर सोचना चाहिये था कि जिस जनता ने उन्हे प्रदेश की सत्ता सौपी आज वो किस हाल में है। उसे आज किन किन समस्याओ से जूझना पड़ रहा है। हालांकि सौ दिन का समय काफी कम है पर यदि सरकार सत्ता परिवर्तन के पहले ही दिन से अपनी जिम्मेदारियो को महसूस करती तो शायद ये सौ दिन उत्तर प्रदेश की काया पलटने के लिये काफी थे।

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