लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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घड़ी पहनने की आदत छूट गई,

पहले पैन साथ लेके चलते थे

वो आदत भी छूट गई अब तो

क्योंकि मोबाइल है……,,

कैमरे की भी ज़रूरत नहीं है अब,

पहले वीडियो बनाना मुश्किल था,

अब स्टिंग इतने होते हैं

क्योंकि मोबाइल है………….

पहले कैसेट सी डी से गाने सुनतेथे

साथ बैठकर रेडियो भी सुनते थे

अब हर बंद कान में गाने बजते है,

क्योंकि मोबाइल है………..

चिठ्ठी पत्री लिखना तो बंद है कबसे,

अब तो लैंडलाइन की भी न कद्र है कोई

कौन डायरी में जाकर नम्बर ढूँढ़े

क्योंकि मोबाइल है……..

ई मेल भी मोबाइल पर,

फेसबुक भी मोबाइल पर

टैबलेट भी भारी लगने लगा

क्योकि मोबाइल है……….

मां ने दुकान पर कपड़े देखे

तीन फोटो खींचे व्हट्सअप पर भेजे

बेटी ने एक पसन्द किया

क्योंकि मोबाइल है…………

और न जाने क्या क्या है

इस मोबाइल में

आदमी ज़िन्दा है शायद आज

क्योकि मोबाइल है…….

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