लेखक परिचय

डॉ. सौरभ मालवीय

डॉ. सौरभ मालवीय

उत्तरप्रदेश के देवरिया जनपद के पटनेजी गाँव में जन्मे डाॅ.सौरभ मालवीय बचपन से ही सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के चलते सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए है। जगतगुरु शंकराचार्य एवं डाॅ. हेडगेवार की सांस्कृतिक चेतना और आचार्य चाणक्य की राजनीतिक दृष्टि से प्रभावित डाॅ. मालवीय का सुस्पष्ट वैचारिक धरातल है। ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया’ विषय पर आपने शोध किया है। आप का देश भर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल पर समसामयिक मुद्दों पर निरंतर लेखन जारी है। उत्कृष्ट कार्याें के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है, जिनमें मोतीबीए नया मीडिया सम्मान, विष्णु प्रभाकर पत्रकारिता सम्मान और प्रवक्ता डाॅट काॅम सम्मान आदि सम्मिलित हैं। संप्रति- माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। मोबाइल-09907890614 ई-मेल- malviya.sourabh@gmail.com वेबसाइट-www.sourabhmalviya.com

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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल का आयोजन

पटना। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,भोपाल की ओर से ‘भारत की ज्ञान परंपरा’ विषय पर 5-6 दिसम्बर को दो दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श का आयोजन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष के तारतम्य में आयोजित इस संविमर्श में विभिन्न विषयों पर चिंतन-मंथन के लिए फ्रांस और नेपाल सहित देशभर से विद्वान आ रहे हैं। संविमर्श का उद्घाटन सोमवार को सुबह 10:30 बजे ए. एन. सिन्हा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल स्ट्डीज, पटना के सभागार में होगा। उद्घाटन के मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता दत्तात्रेय होसबोले और अध्यक्ष कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला होंगे।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सौरभ मालवीय ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर महत्वपूर्ण शोध एवं प्रकाशन निरंतर किया जा रहा है। इस श्रृंखला में ‘संचार : अवधारणा व प्रक्रिया’ के अंतर्गत भरतमुनि, महर्षि पाणिनि, महर्षि पतंजलि, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द और महात्मा गाँधी पर महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हुयी हैं। इसके पूर्व में विश्वविद्यालय की ओर से भारतीय ज्ञान परम्परा को ध्यान में रखकर महत्वपूर्ण संगोष्ठी, संविमर्श और व्याख्यान आयोजित किये जाते रहे हैं। इस वर्ष विश्वविद्यालय अपने 25 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय देश के प्रमुख स्थानों पर बौद्धिक आयोजन कर रहा है। इसी श्रृंखला में पटना में ‘भारत की ज्ञान परंपरा’ विषय पर राष्ट्रीय संविमर्श हो रहा है।

इन विषयों पर होगा मंथन : प्राचीन भारत में संवाद परंपरा, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र की भारतीय परंपरा, प्राचीन भारत में ज्ञान का आध्यात्मिक आधार, वैदिक गणित, प्राचीन भारत में जीव विज्ञान एवं आयुर्वेद, भारतीय मेगालिथ रचनाओं की वैज्ञानिकता, अनुसन्धान की भारतीय दृष्टि एवं शिक्षा पद्धति तथा भारत में विज्ञान परंपरा विषयों पर व्याख्यान एवं विमर्श होना है।

यह विद्वान होंगे शामिल : भारतीय शिक्षण मंडल के सह संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर, फ्रांस के मनोविज्ञानी डॉ. सर्जे ली गुरियक, नेपाल के संचार विशेषज्ञ डॉ. निर्मल मणि अधिकारी, बीकानेर के स्वामी सुबोधगिरि, भोपाल से शिक्षाविद डॉ. कुसुमलता केडिया, वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रामेश्वर पंकज मिश्र, वैद्य चंद्रशेखर, वैदिक गणित के विद्वान रोहतक से राकेश भाटिया, नागपुर से विज्ञान विशेषज्ञ पीपी होले, डॉ. श्रीरामजी ज्योतिषी और डॉ. सीएस वर्नेकर और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान सहित अन्य प्रमुख विद्वानों के व्याख्यान होंगे।

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