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राष्ट्रीय राजधानी स्थित रविंद्र भवन में मंगलवार को विभिन्न भाषाओं के 23 साहित्यकारों को साहित्य अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। हिन्दी भाषा में यह पुरस्कार गोविंद मिश्र को प्रदान किया गया।

सम्मानित किए जाने वालों में जयंत परमार (उर्दू), चिटि प्रलु कृष्णमूर्ति (तेलुगू), मेलंमई पोन्नु सामी (तमिल), शिरो शेवकाणी (सिंधी), बादल हेंब्रम (संथाली), ओम प्रकाश पांडे (संस्कृत), दिनेश पांचाल (राजस्थानी), मित्रसैन मीत (पंजाबी), प्रमोद कुमार मोहंती(उड़िया), हैमन दास राई (पाली), श्याम मनोहर (मराठी), अरामबम ओंबी मेमचौबी (मणिपुरी), स्व.के.पी.अप्पन (मलयालम), मंत्रेश्वर झा (मैथिली), अशोक एस.कामत (कोंकणी), गु.नबी आतश (कश्मीरी), श्रीनिवास बी.वैद्य (कन्नण), सुमन शाह (गुजराती), चंपा शर्मा (डोंगरी), विद्या सागर नाजारी (बोडो), शरद कुमार मुखोपाध्याय (बांडला) जैसे साहित्यकारों के नाम शामिल हैं। असमिया भाषा की साहित्यकार रीता चौधरी को उनके उपन्यास देओ लाड्खुइ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया, जिसे उन्होंने अपने लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं की जानकार चौधरी अपना अगला उपन्यास चीनी भाषा में लिख रही हैं। उनका पहला उपन्यास अविरत यात्रा वर्ष 1981 में प्रकाशित हुआ था।

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3 Comments on "23 साहित्यकार साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित"

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bishnu
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मातृभाषामा शिक्षा माताको दूध शिशुलाई शिक्षा मातृभाषामा, प्रभाव पर्छ सृस्‍टिलाई प्रकाशको गतिमा।. यी माथिका हरफ मेघालय शिलोंगका नेपालीभाषी पुस्तक ब्यबसायी श्री बिष्णु गौतमले बिगत ५ वर्ष देखि जोड तोडका साथ प्रचार प्रसार गर्दै आएका छन् । उनले प्रकाशन गरेका पुस्तक, बिजक, लेटर प्याड, पुस्तक सुची जताततै यी हरफ देख्न पाइन्छ । नेपाली, अंग्रेजी, खासी र बंगाली भाषामा लेखिएका यी हरफले मातृभाषाको शक्तिले सृष्टिको रक्षा र यस सुन्दर बहुरंगी विश्व-बाटिकालाइ द्रुत गतिमा सुमुन्नत बनाउन टेवा मिल्ने संदेश दिन्छ ।. जन्मेपछि सम्बाद गर्न सिकेको पहिलो भाषा नै मानिसको मातृभाषा हो । संसारमा ज्ञान, सोच र कल्पनाको बहुरंगी विविधता कायम राख्न पनि मातृभाषालाइ… Read more »
Bishnu Prasad Gautam
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सर्व शिक्षा मात्री भाषामा नहुनु सुक्ष्म गतिमा दास हुनु हो

Bishnu Prasad Gautam
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१.सर्व शिक्षा मात्री भाषामा नहुनु सुक्ष्म गतिमा दास हुनु हो .
२ . माताको दुध शिशुलाई शिक्षा मात्री भाषामा प्रभाव पर्छ श्रीष्टिलाई प्रकाशको गतिमा .
३. शोर्धार्थिले शोध पत्र मात्री भाषामा बुझाउनु जन्म सिद्ध अधिकार र कर्तव्य हो .

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