लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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स्वतंत्रता दिवस

स्वतंत्रता दिवस

15 अगस्त को भारत 70वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाने जा रहा है। इस साल, स्वतंत्रता दिवस समारोह अलग भी होगा और बहुत खास भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जुलाई को आयोजित अपनी पार्टी की संसदीय दल की बैठक में अपने पार्टी सहयोगियों से स्वतंत्रता दिवस समारोह को खास बनाने की इच्छा बताई। प्रत्येक वर्ष भारत में 15 अगस्त को स्वन्त्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है। भारत के लोगों के लिये ये दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। वर्षों की गुलामी के बाद ब्रिटिश शासन से इसी दिन भारत को आजादी मिली। 15 अग्स्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से देश की स्वतंत्रता को सम्मान देने के लिये पूरे भारत में राष्ट्रीय और राजपत्रित अवकाश के रुप में इस दिन को घोषित किया गया है।
15 अगस्‍त 1947, वह दिन था जब भारत को ब्रिटिश राज से आज़ादी मिली और इस प्रकार एक नए युग की शुरुआत हुई जब भारत के मुक्‍त राष्‍ट्र के रूप में उठा। स्‍वतंत्रता दिवस के दिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत के जन्‍म का आयोजन किया जाता है और भारतीय इतिहास में इस दिन का अत्‍यंत महत्‍व है।

भारतीय स्‍वतंत्रता के संघर्ष में अनेक अध्‍याय जुड़े हैं जो 1857 की क्रांति से लेकर जलियाँवाला बाग नरसंहार, असहयोग आंदोलन से लेकर नमक सत्‍याग्रह तक अनेक हैं। भारत ने एक लंबी यात्रा तय की है जिसमें अनेक राष्‍ट्रीय और क्षेत्रीय अभियान हुए और इसमें उपयोग किए गए दो प्रमुख अस्‍त्र थे सत्‍य और अहिंसा।अंग्रेजों से आजादी पाना भारत के लिये आसान नहीं था; लेकिन कई महान लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे सच कर दिखाया। अपने सुख, आराम और आजादी की चिंता किये बगैर उन्होंने अपने भावी पीढ़ी की आजादी के लिये अपना जीवन बलिदान कर दिया। पूर्ण स्वराज प्राप्त करने के लिये हिंसात्मक और अहिंसात्मक सहित इन्होंने कई सारे स्वतंत्रता आंदोलन को आयोजित किये तथा उस पर कार्य किया।

हमारी स्‍वतंत्रता के संघर्ष में भारत के राजनैतिक संगठनों के व्‍यापक रंग, उनकी दर्शन धारा और आंदोलन शामिल हैं जो एक महान कारण के लिए एक साथ मिलकर चले और ब्रिटिश उप-निवेश साम्राज्‍य का अंत हुआ और एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र का जन्‍म हुआ।

यह दिन हमारी आज़ादी का जश्‍न मनाने और उस सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर जिन्‍होंने इस महान कारण के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया। स्‍वतंत्रता दिवस पर प्रत्‍येक भारतीय के मन में राष्‍ट्रीयता, भाई-चारे और निष्ठा की भावना भर जाती है।

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अनेकानेक आयोजन—–

स्‍वतंत्रता दिवस को पूरी निष्ठा, गहरे समर्पण और अपार देश भक्ति के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। स्‍कूलों और कालेजों में यह दिन सांस्‍कृतिक गतिविधियों, कवायद और ध्‍वज आरोहण के साथ मनाया जाता है। दिल्‍ली में प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराते हैं और इसके बाद राष्‍ट्र गान गाया जाता है। वे राष्‍ट्र को संबोधित भी करते हैं और पिछले एक वर्ष के दौरान देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हैं तथा आगे आने वाले समय के लिए विकास का आह्वान करते हैं। इसके साथ वे आज़ादी के संघर्ष में शहीद हुए नेताओं को श्रद्धांजलि देते हैं और आज़ादी की लड़ाई में उनके योगदान पर अभिवादन करते हैं।

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भारत में स्वतंत्रता दिवस का महत्व और प्रतीक—-
स्वतंत्रता दिवस प्रतीक है भारत में पतंग उड़ाने के खेल का। अनगिनत विभिन्न आकार, प्रकार और स्टाईल के पतंगों से भारतीय आकाश पट जाता है। इनमें से कुछ तिरंगे के तीन रंगो में भी होता है जो राष्ट्रीय ध्वज को प्रदर्शित करता है। स्वतंत्रता दिवस का दूसरा प्रतीक नई दिल्ली का लाल किला है जहाँ 15 अगस्त 1947 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगा फहराया था।
1947 में ब्रिटीश शासन से भारत की आजदी को याद करने के लिये हम स्वतंत्रता दिवस को मनाते है। 15 अगस्त भारत के पुनर्जन्म जैसा है। ये वो दिन है जब अंग्रेजों ने भारत को छोड़ दिया और इसकी बागडोर हिन्दूस्तानी नेताओं के हाथ में आयी। ये भारतियों के लिये बेहद महत्वपूर्ण दिन है और भारत के लोग इसे हर साल पूरे उत्साह के साथ मनाते है।

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भारत की आज़ादी से जुड़ी दस दिलचस्प बातें—-

1. महात्मा गांधी आज़ादी के दिन दिल्ली से हज़ारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखली में थे, जहां वे हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन पर थे.

2. जब तय हो गया कि भारत 15 अगस्त को आज़ाद होगा तो जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महात्मा गांधी को ख़त भेजा. इस ख़त में लिखा था, “15 अगस्त हमारा पहला स्वाधीनता दिवस होगा. आप राष्ट्रपिता हैं. इसमें शामिल हो अपना आशीर्वाद दें.”

3. गांधी ने इस ख़त का जवाब भिजवाया, “जब कलकत्ते में हिंदु-मुस्लिम एक दूसरे की जान ले रहे हैं, ऐसे में मैं जश्न मनाने के लिए कैसे आ सकता हूं. मैं दंगा रोकने के लिए अपनी जान दे दूंगा.”

4. जवाहर लाल नेहरू ने ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी’ 14 अगस्त की मध्यरात्रि को वायसराय लॉज (मौजूदा राष्ट्रपति भवन) से दिया था. तब नेहरू प्रधानमंत्री नहीं बने थे. इस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना, लेकिन गांधी उस दिन नौ बजे सोने चले गए थे.

5. 15 अगस्त, 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने अपने दफ़्तर में काम किया. दोपहर में नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल की सूची सौंपी और बाद में इंडिया गेट के पास प्रिसेंज गार्डेन में एक सभा को संबोधित किया.

6. हर स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं. लेकिन 15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था. लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था.

7. भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन के प्रेस सचिव कैंपबेल जॉनसन के मुताबिक़ मित्र देश की सेना के सामने जापान के समर्पण की दूसरी वर्षगांठ 15 अगस्त को पड़ रही थी, इसी दिन भारत को आज़ाद करने का फ़ैसला हुआ.

8. 15 अगस्त तक भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण नहीं हुआ था. इसका फ़ैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ.

9. भारत 15 अगस्त को आज़ाद जरूर हो गया, लेकिन उसका अपना कोई राष्ट्र गान नहीं था. रवींद्रनाथ टैगोर जन-गण-मन 1911 में ही लिख चुके थे, लेकिन यह राष्ट्रगान 1950 में ही बन पाया.

10. 15 अगस्त भारत के अलावा तीन अन्य देशों का भी स्वतंत्रता दिवस है. दक्षिण कोरिया जापान से 15 अगस्त, 1945 को आज़ाद हुआ. ब्रिटेन से बहरीन 15 अगस्त, 1971 को और फ्रांस से कांगो 15 अगस्त, 1960 को आज़ाद हुआ.

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भारत के स्वतंत्रता दिवस का इतिहास—
17वीँ शताब्दी के दौरान कुछ यूरोपियन व्यापारियों द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप के सीमा चौकी पर प्रवेश किया गया। अपने विशाल सैनिक शक्ति की वजह से ब्रिटीश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत को गुलाम बना लिया गया। 18 शताब्दी के दौरान पूरे भारत में अंग्रेजों ने अपना स्थानीय साम्राज्य और असरदार ताकत स्थापित कर लिया था। 1857 में ब्रिटीश शासन के खिलाफ भारत के लोगों द्वारा एक बहुत बड़े स्वतंत्रता क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी। उस गदर को महान गदर कहा जाता है, 1857 का विद्रोह, भारतीय बगावत, 1857 का पठान और सिपाहीयों का विद्रोह। 10 मई 1857 में बंगाल प्रांत में ब्रिटीश ईस्ट इंडिया कंपनी आर्मी के खिलाफ इसकी शुरुआत हो गई। उस विद्रोह के द्वारा (1858 का अधिनियम भारत सरकार), भारत को नियंत्रण मुक्त करने का एहसास ब्रिटीश राज को भारतीय स्वतंत्रता सेनानीयों ने दिलाया।
1857 की बगावत एक असरदार विद्रोह था जिसके बाद पूरे भारत से कई सारे नगरीय समाज उभरे। उनमें से एक भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी थी जिसका निर्माण वर्ष 1885 हुआ। पूरे राष्ट्र में असंतोष और उदासी के काल ने अहिंसात्मक आंदोलनों (असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन) को बढ़ावा दिया जिसका नेतृत्व गाँधी जी ने किया।
लाहौर में 1929 में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस अधिवेशन में, भारत ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की। इसके पहले, 1930 से 1947 के बीच भारतीय स्वतंत्रता दिवस के रुप में 26 जनवरी को घोषित किया गया। सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिये भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस द्वारा भारतीय नागरिकों से निवेदन किया गया था साथ ही साथ भारत के पूर्ण स्वतंत्रता तक आदेशों का पालन समय से करने के लिये भी कहा गया।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1947 में ब्रिटिश सरकार आश्वस्त हो चुकी थी कि वो लंबे समय तक भारत को अपनी शक्ति नहीं दिखा सकती। भारतीय स्वतंत्रता सेनानी लगातार लड़ रहे थे और तब अंग्रेजों ने भारत को मुक्त करने का फैसला किया हालाँकि भारत की आजादी (15 अगस्त 1947) के बाद हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए जिसने भारत और पाकिस्तान को अलग कर दिया। मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल बने जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरु आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री। दिल्ली, देश की राजधानी में एक आधिकारिक समारोह रखा गया जहाँ सभी बड़े नेता और स्वतंत्रता सेनानियों (अबुल कलाम आजद, बी.आर.अंबेडकर, मास्टर तारा सिंह, आदि) ने इसमें भाग लेकर आजादी का पर्व मनाया।
बँटवारे की हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में दोनों तरफ से लोग मरे जबकि दूसरे क्षेत्र के लोगों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया था। संवैधानिक हॉल, नई दिल्ली में राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में 14 अगस्त को 11 बजे रात को संवैधानिक सभा की 5वीं मीटींग रखी गई थी जहाँ जवाहर लाल नेहरु ने अपना भाषण दिया था।
15 अगस्त 1947 की मध्यरात्री, जवाहर लाल नेहरु ने भारत को स्वतंत्र देश घोषित किया जहाँ उन्होंने “ट्रीस्ट ओवर डेस्टिनी” भाषण दिया था। उन्होंने अपने भाषण के दौरान कहा कि “बहुत साल पहले हमने भाग्यवधु से प्रतिज्ञा की थी और अब समय आ गया है जब हम अपने वादे को पूरा करेंगे, ना ही पूर्णतया या पूरी मात्रा में बल्कि बहुत मजबूती से। मध्यरात्री घंटे के स्पर्श पर जब दुनिया सोती है, भारत जीवन और आजादी के लिये जागेगा। एक पल आयेगा, जो आयेगा, लेकिन इतिहास में कभी कभार, जब हम पुराने से नए की ओर बढ़ते है, जब उम्र खत्म हो जाती है और राष्ट्र की आत्मा जो लंबे समय से दवायी गयी थी उसको अभिव्यक्ति मिल गयी है। आज हमने अपने दुर्भाग्य को समाप्त कर दिया और और भारत ने खुद को फिर से खोजा”।
इसके बाद, असेंबली सदस्यों ने पूरी निष्ठा से देश को अपनी सेवाएँ देने के लिये कसम खायी। भारतीय महिलाओं के समूह द्वारा असेंबली को आधिकारिक रुप से राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तुत किया था। अतत: भारत आधिकारिक रुप से स्वतंत्र देश हो गया, और नेहरु तथा वाइसराय लार्ड माउंटबेटन, क्रमश: प्रधानमंत्री और गवर्नर जनरल बने। महात्मा गाँधी इस उत्सव में शामिल नहीं थे। वो कलकत्ता में रुके थे और हिन्दु तथा मुस्लिम के बीच शांति को बढ़ावा देने केलिये 24 घंटे का व्रत रखा था।
स्वतंत्रता दिवस उत्सव—
भारत के राष्ट्रीय अवकाश के रुप में पूरे भारत में स्वतंत्रता दिवस को मनाया जाता है। इसे हर साल प्रत्येक राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में पूरे उत्सुकता से देखा जाता है। स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले की शाम को “राष्ट्र के नाम संबोधन” में हर साल भारत के राष्ट्रपति भाषण देते है। 15 अगस्त को देश की राजधानी में पूरे जुनून के साथ इसे मनाया जाता है जहाँ दिल्ली के लाल किले पर भारत के प्रधानमंत्री झंडा फहराते है। ध्वजारोहण के बाद, राष्ट्रगान होता है, 21 तोपों की सलामी दी जाती है तथा तिरंगे और महान पर्व को सम्मान दिया जाता है।
स्वतंत्रता सेनानियों और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओँ जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी थी को श्रद्धांजलि देने के बाद, स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण के दौरान भारत के प्रधानमंत्री पिछले साल की उपलब्धियों, महत्पूर्ण सामाजिक मुद्दे और उनके हल, देश के आगे का विकास, शिक्षा आदि को रेखांकित करते है। पैरामिलीट्री फोर्सेस और भारतीय सैनिकों द्वारा भव्य मार्च पास्ट किया जाता है। विभिन्न सांस्कृतिक परंपरा के अलग-अलग राज्य में स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाया जाता है जहाँ हर राज्य का मुख्यमंत्री राष्ट्रीय झंडे को फहराता है जोकि प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक क्रिया-कलापों द्वारा लहराया जाता है।
ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, परेड समारोह, दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित लगभग सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थान, शिक्षण संस्थान, कुछ निजी संस्थान आदि पूरे देश में होता है। स्कूल तथा कॉलेजों में प्रधानाचार्य द्वारा झंडा फहराया जाता है और फिर वहाँ के विद्यार्थियों द्वारा परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाता है। इस दिन पर, सरकारी कार्यालय, बिल्डिंग आदि को रोशनी, फूलों और दूसरे सजावटी समानों से सजाया जाता है। अलग अलग लंबाई के झंडे के द्वारा लोग देश के प्रति अपने समर्पण और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते है।
स्वतंत्रता दिवस को मनाने के दौरान आतंकवादी हमलों का बड़ा खतरा रहता है खासतौर से दिल्ली, मुम्बई तथा जम्मु-कश्मीर जैसे बड़े शहरों में। इसी वजह से इस अवसर पर हवाई हमलों से बचने के लिये लाल किले के आस-पास के क्षेत्र को “नो फ्लाई जोन” घोषित कर दिया जाता है। सुरक्षा कारणों से पूरे शहर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाती है। पूरे देश के लोगों के लिये इस कार्यक्रम का टेलीविजन पर सजीव प्रसारण किया जाता है।
इस अवसर को लोग अपने दोस्त, परिवार, और पङोसियों के साथ फिल्म देखकर, पिकनिक मनाकर, समाजिक कार्यक्रमों में भाग लेकर मनाते है। इस दिन पर बच्चे अपने हाथ में तिरंगा लेकर ‘जय जवान जय जय किसान’ और दूसरे प्रसिद्ध नारे लगाते है।

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स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में इंडिया गेट के पास राजपथ पर पहली बार 12 अगस्त से छह दिन चलने वाला ‘भारत पर्व’ मनाया जाए।

भारत पर्व के अलावा, देशभर में 15-22 अगस्त तक ‘तिरंगा यात्राएं’ निकाली जाएंगी। इन दोनों ही कार्यक्रमों का उद्देश्य अन्य राज्यों को भी इस समारोह में शामिल करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह त्योहार लोगों का है। इस प्रोग्राम के जरिए उनमें राष्ट्रभक्ति और देश के प्रति गर्व की भावना का संचार हो सके।

भारत पर्व, 12-17 अगस्त, का उद्घाटन 12 अगस्त को शाम पांच बजे प्रधान मंत्री करेंगे। सशस्त्र सेनाओं की ओर से इस दौरान संगीतमय कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। इस दौरान ऐतिहासिक इंडिया गेट तिरंगे की रौशनी से जगमगाएगा।

छह दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन मंत्रालय कर रहा है। इसमें कपड़ा, संस्कृति और रक्षा मंत्रालय की भी सहभागिता रहेगी। इस समारोह को व्यापक सफल बनाने के लिए सभी लोगों से आग्रह किया गया है।

दो से ढाई महीने पहले, एनडीए सरकार ने इसी जगह पर सत्ता में दो साल पूरे होने का जश्न मनाया था। इस बार, हालांकि, राज्यों की ओर से क्षेत्रीय पकवानों के साथ ही लोक कलाएं, हस्तशिल्प और संस्कृति की नुमाइश रहेगी।

पूरे भारत से 100 फूड स्टॉल्स लगाई जाएंगी। एक ही जगह पर पूरे भारत के चटखारे उपलब्ध कराने की कोशिश की जारही है। भारत पर्व को प्रमुख पर्यटन आकर्षण के तौर पर प्रचारित किया जाएगा।

समझा जाता है कि तमिल नाडु, गुजरात, पंजाब, असम, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश, नगालैंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेश अपनी लोक कलाओं, संस्कृति और हस्तशिल्प की नुमाइश के लिए इस समारोह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।

रक्षा बलों ने ने भी अपनी सैन्य उपलब्धियों के साथ-साथ ब्रास बैंड्स की रेंज प्रस्तुत करने का फैसला किया है।

15-22 अगस्त के बीच देशभर में तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी। देश के सभी नागरिकों में राष्ट्रभक्ति और गर्व की अनुभूति कराई जाएगी।

प्रधानमंत्री की इस बात के लिए तारीफ करनी होगी कि वे हर मौके को भव्य समारोह में तब्दील कर देते हैं। भारत और विदेशों में उस कार्यक्रम पर पूरा ध्यान खींचते हैं।

मोदी ने अपने हर विदेश दौरे पर इस ‘शोमैनशिप’ को प्रस्तुत किया है। यह दौरे अब उनकी पहचान बन चुके हैं। उन्होंने बार-बार यह दिखाया है कि कैसे एक मौके को भव्य समारोह में तब्दील करते हुए उसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाया जा सकता है।

जब से लाल किले की प्राचीर से पहला भाषण दिया है, तब से पीएम मोदी ने इस इवेंट को खास बना दिया है। इस बार उन्होंने लोगों को सिर्फ समारोह में उन्हें देखने के बजाय सीधे-सीधे जोड़ने पर ध्यान दिया है।

भारत पर्व को प्रमुख घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन आकर्षण के तौर पर विकसित किया जा सकता है। धीरे-धीरे गैर-पर्यटक मौसम में यह इवेंट बड़ा आकर्षण भी बन सकती है। यदि सफल रही तो इससे पर्यटन को बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकारें भी इसी की तलाश में तो हैं।

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15 अगस्त का महत्व—-

1947 में 15 अगस्त की आधी रात को भारत ने ब्रिटिश शासन से मुक्ति पाई थी। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसी दिन ऑल इंडिया रेडियो पर अपनी प्रसिद्ध ‘ट्रिस्ट विथ डेस्टिनी’ वाला भाषण दिया था।

वह जादुई रात कई वर्षों तक आंखों में पानी लाने वाली। खासकर उन लोगों की आंखों में जो उस काल में जन्में या जिए। आज भी, दिनभर प्रसारित होने वाले राष्ट्रभक्ति गीतों में कुछ आंखों से आंसू निकालने की ताकत होती है। यह राष्ट्रभक्ति की गहरी भावना जगाने और सभी भारतीयों को गर्व की अनुभूति देने में महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा लाल किले पर प्रधानमंत्री राष्ट्र ध्वज फहराते हैं। राज्यपाल अपने-अपने राज्यों में इसी काम को अंजाम देते हैं। इस दौरान देश की आजादी के लिए लड़े हमारे नेताओं और लोगों के बलिदान को याद किया जाता है।

स्कूलों में ध्वजरोहण गतिविधियां होती हैं। इसके बाद राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत गीतों और भाषणों का कार्यक्रम होता है। मिठाइयां बंटती हैं। इसी तरह के समारोह अब देशभर में रिहायशी कॉलोनियों और सोसाइटियों में होते हैं।

किसी भी देश के लिए, उसके भविष्य के सफर पर इतिहास का असर साफ झलकता है। इस वजह से यह जरूरी है कि मौजूदा पीढ़ी को पूर्वजों के बलिदान की जानकारी हो। उसके प्रति आदर हो। ऐसे में इस दिन से बेहतर क्या हो सकता है, जब उन्हें बताया जाए कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने किन-किन परेशानियों का सामना किया और देश को आजाद कराया।

मौजूदा पीढ़ी के लिए यह दिन काफी महत्वपूर्ण है। ताकि वह इतिहास से मिले सबकों पर चर्चा कर सके। ताकि एक देश के तौर पर हम पुरानी गलतियों को न दोहराएं।

15 अगस्त का महत्व हमारे जीवन में और भी बढ़ गया है। देश को सीमाओं के भीतर और बाहर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

देश में सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक स्थिरता को लगातार खतरे पैदा हो रहे हैं। एक धर्मनिरपेक्ष, समग्र और लोकतांत्रिक भारत के मूल्यों के लिए लड़े गए स्वतंत्रता संग्राम से जो हमें मिला था, उस पर खतरे पैदा किए जा रहे हैं।

भारत पर्व और तिरंगा यात्रा सिर्फ आयोजन है। जब तक युवा हमारी आजादी के मूल्य को नहीं समझेंगे तब तक उसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

यह अब आज के युवाओं की जिम्मेदारी हैं कि वे 1947 की उस जादुई रात की भावना को महसूस करें और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बताए रास्ते पर चलकर आगे बढ़े। यह सभी भारतीयों के एकजुट होने का दिन है!

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के मशहूर और प्रेरक वक्तव्य, नारे

वंदे मातरमः बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय

जय जवान, जय किसानः लाल बहादुर शास्त्री

जय हिंदः नेताजी सुभाष चंद्र बोस

स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगाः काका बाप्टिस्टा और बाल गंगाधर तिलक ने इसका इस्तेमाल किया

सत्यमेव जयतेः पंडित मदन मोहन मालवीय ने इसे लोकप्रिय बनाया

इंकलाब जिंदाबादः मुस्लिम नेता हसरत मोहानी ने यह नारा दिया था, जो बाद में भगत सिंह के नाम का पर्याय बन गया

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं: बिस्मिल आजिमाबादी की राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कविता, जिसे रामप्रसाद बिस्मिल ने नारे के तौर पर इस्तेमाल किया

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15 अगस्त 2016 के समारोह का कार्यक्रम—-

1- भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, 14 अगस्त 2016 को शाम 7 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे

2- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लाल किले पर सुबह 7 बजे राष्ट्रध्वज फहराएंगे

3- इस अवसर पर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का गायन होगा

4- लाल किले पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए तोपों-बंदूकों से सलामी दी जाएगी

5- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 7.10 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे

6- उनके भाषण के बाद मार्चिंग सेरेमनी, परेड सेरेमनी और क्लोजिंग सेरेमनी

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1 Comment on "70 वां स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) 2016"

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jyotirmay pradesh saptahik samachar patra bhopa
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jyotirmay pradesh saptahik samachar patra bhopa

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएँ
जय हिन्द , जय जवान ,जय किसान
तिरंगा हवाओं से नही लहराता,
यह लहराता है उस हर वीर सैनिक की आखरी साँस सै,
जिसने उसकी हिफाजत मैं अपनी जान की बाजी लगादी—!!
#स्वतंत्रता_दिवस_की_अनंत_शुभकामनाएं
9981218513

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