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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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copy-of-1111-300x20005 अक्टूबर जालंधर। पश्चिमीकरण के पीछे भागता आज का भारतीय अपनी परंपरा व संस्कृति से दूर होता जा रहा है। गोपालन भारतीय संस्कृति व परंपरा का आधार है, लेकिन जिस तरह से गोहत्या की घटनाएं बढ रही हैं उसे देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय परंपरा व संस्कृति खत्म होने के कगार पर है। यह कहना है संत स्वांमी सूर्य प्रताप का। श्री प्रताप ने विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के जालंधर में हुए पडाव में गो भक्तों को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं।

संत प्रताप ने गो ग्राम यात्रा को 80 करोड भारतीय की आवाज बताते हुए कहा कि गाय को बचाना कुदरत को बचाने के समान है। गाय हमारी सुख समृद्धि की दाता है। गोसेवा सनातन धर्म का अभिन्न अंग है। गोदुग्ध के सेवन से ही भारतीयों ऋषियों में श्रेष्ठ आचरण और मेधा का विकास हुआ। संत प्रताप ने गो भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीव कल्याण करना अनेक तीर्थ स्थानों के भ्रमण करने समान है।

नामधारी सम्प्रदाय के संत श्री हरपाल सिंह ने कहा कि गोपालन सिक्खों के लिए भी अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। गोवंश की रक्षा हेतु संत रामसिंह के नेतृत्व में कूका विद्रोह हुआ था जिसमें अनेक नामधारी वीरों ने बलिदान देकर गोभक्ति का अनूठा उदाहरण पेश किया था। उन्होंने कहा कि गो सेवा राष्ट्र सेवा के समान है और हम सभी भारतीयों को गोसेवा के लिये संकल्पबद्व होने की आवश्यकता है।

गो ग्राम यात्रा को जालंधर में प्रवेश करने पर गोभक्तों ने भव्य स्वागत किया और गोवंश की रक्षा के लिए संकल्प भी लिया। गो ग्राम यात्रा को देखने के लिये भारी संख्या में गोभक्त जगह जगह पर एकत्रित थे। स्थानीय प्रशासन की तरफ से यात्रा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

इससे पहले फगवाडा के हरगोबिंद नगर मे यात्रा के स्वागत के लिएं आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए स्वामी अखिलेश्वरानंद ने कहा कि बौद्धिक सम्पदा के वर्तमान दौर में गाय का आर्थिक महत्व बढ गया है। गोसंरक्षण का मुद्दा अब केवल सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दा नहीं रहा गया है, अब यह अर्थव्यवस्था का प्रश्न बन गया है। उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण और गोसंवर्द्धन करने से आगामी 20 वर्षों में भारतीय रुपया डॉलर और पौंड से भी महंगा हो जाएगा। 05 अक्टूबर की सुबह गो ग्राम यात्रा लुधियाना शहर मे पहुंची जहां पर गो भक्तों नें गो ग्राम यात्रा का फूल मालाओं सें स्वागत किया। लुधियाना के हम्बडा रोड स्थित श्री गोविंद गौधाम में यात्रा के स्वागत में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां यात्रा में शामिल संतों ने गोभक्तों को संबोधित किया। श्री गोविंद गौधाम ट्रस्ट द्वारा श्री कृष्ण मंदिर के साथ ही बनाई गई गोशाला में लगभग 2000 गायों को पाला जाता है। इस मंदिर में श्री कृष्ण की गोपियों के साथ महारासलीला का अद्भुत चित्रण किया गया है।

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