लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

Posted On by &filed under राजनीति.


akhileshमृत्युंजय दीक्षित

एक ओर जहां समाजवादी पार्टी सहित सभी पार्टियों ने मिशन- २०१७ को लेकर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं वहीं दूसरी अरे प्रदेश में कई सवाल एक बार फिर नये सिरे से उठ रहे हैं कि आखिर क्या कारण है कि उप्र में कानून व्यवस्थासुधरने का नाम नहीं ले रही हैं और खासकर पश्चिमी उप्र में एक बार फिर साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न हो रहा हैं। वहीं दूसरी ओर प्रदेश की समाजवादी सरकार एक ओर दावा करती है कि समाजवादी सरकार में किसी से भेदभाव नहीं सबका सम्मान लेकिन परिस्थितियां व घटनाएं बता रही हे कि समाजवादी सरकार का नेतृत्व और अफसरशाही का रवैया अभी नहीं सुधर रहा है।

आज हालात यह हो रहैं कि प्रदेश मेंकिसी भी जिले में महिलायें सुरक्षित नहीं रह गयी हैं । हर जिले में एक से बढ़करएक दर्दनाक ढंग से युवतियोंके साथ दुराचार व हत्या आदि की घटनाएं घटित हो रही हैं लेकिन इन घटनाओं राजफाश तो दूर बहुत सी घटनाओं की प्राथमिकी तक नहीं दर्ज हो पा रही है। कई जगह बड़े अधिकरियों की फटकार के बाद ही प्राथमिकी तक दर्ज हो रही हैं। विगत दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं को नसीहतें भी दी है कि समाजवादी नेता भूमि पर कब्जा करने व थाने की राजनीति करना छोड़ दें तो कानून व्यवस्था में काफी हद तक सुधार हो जाये। मिशन- २०१७ फतह करने की रणनीति बना रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सपा कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि वे जमीन पर कब्जे व थाने तहसील की राजनीति छोड़ दें और सरकार के कामकाज के प्रचार में लग जाये तो फिर २०१७ में हमारी सरकार वापस आने में कोई नहीं रोकसकता। लेकिन समाजवादी पार्टी के कार्यकताओं की अपराधिक गतिविधियों व नेताओं के बेलगाम बयानबाजी सपा के लिए परेशानी का सबब बन रही है।वही अभी हाल ही मे समाजवादी संसदीय बोर्ड की एक बैठक में समाजवादी सरकार के कामकाज की तारीफ़ तो की गयी लेकिन छवि को लेकर भी गहरी चिंता की लकीरें साफ दिखलायी पड़ रहीं थी। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि आज सरकार व उसके अधिकारियों का रवैया एक बार फिर उसी तरह से हो गया है जैसाकि लोकसभा चुनावों के पूर्व था। यानि की एकपक्षीय शासन मुस्लिम तुष्टीकरण का दौर चल रहा है। पश्चिमी उप्र सहित प्रदेश के कई जिलों में कइ्र्र ऐसी घटनाएं घटी हैं कि जिनको ठीकढंगसे निस्तारित न कर पाने के कारण साम्प्रदायिक तनाव का कारण बन रही हैं। विशेषकर पश्चिमी उप्र तो बारूद के ढेर पर बैठा है वहां रोज किसी न किसी मामूली बात को लेकर तनाव हो रहा है। इसी बढ़ते तनाव के बीच खुफिया ब्यूरो आई्र बी ने केंद्र सरकार को कासगंज व सहारनपुर की सांप्रदायिक झड़पों की रिपोर्ट के आधार पर आगाह भी किया है। विगत २६ व २७ जून को हुई सांप्रदायिक झड़पों का विस्तृत विवरण इस रिपोर्ट में दिया गया है। ज्ञातव्य है कि २०१३ में भी आइ्रबी ने प्रदेश में बढ़ते तनाव पर सरकार को आगाह किया था जिसकी परिणति मुजफ्फरनगर दंगे के रूप में हूई थी। लेकिन अब एक बार फिर पानी सिर के ऊपर से चढ़ने लग गया है। प्रतिदिन किसी न किसी जिले या कस्बे से छुटपुट घटनाओं के साम्प्रदायिक रंग लेने का समाचार प्राप्त हो रहा है। इन सब घटनाओं को लेकर प्रदेश के नवनियुक्त डीजीपी जगमोहन यादव सहित प्रदेश के सभी राजनतिक दलों के बीच आरोपों प्रत्यारोपें का दौर प्रारम्भ हो गया है । सबसे बड़ी घटना तो फैजाबाद में ही घटित हो गयी तथा तनाव फैल गया जिसमें कुछ लोगो ने व्हाटसएप पर आपत्तिजनक अपशब्दों का प्रयोग करके तनाव फैलाने का प्रयास किया गया फिर ऐसा ही एक प्रयास बाराबंकी जिले में किया गया। आजकल सोशल मीडिया काप्रयोग अपनी भड़ास निकालने व उन्माद फैलाने के लिए भी किया जाने लगा है।

दूसरी तरफ इलाहाबाद से भी एक ऐसा समाचार प्राप्त हुआ जिससे प्रशासनिक अक्षमता का ही नजारा पेश हो रहा है। हालांकि यह विवाद समाप्त तो जरूर हो गया है लेकिन इलाहाबाद पुलिस ने जो कुछ किया उससे बहुसंख्यक हिंदू समाज की भावनाओं व आस्था को गहरी ठेस तो पहुंची ही है। इलाहाबाद पुलिस ने दंगा नियंत्रण प्रशिक्षण शुरू किया जिसमें अभ्यास के दौरान एक दंगाई ने भगवा झंडा पकड़ रखा था। जब विश्व हिंदू परिषद को जानकारी हुई तो राजनैतिक बवालवाजी होना लाजिमी था। वैसे भी आज प्रदेश में जिस प्रकार की सरकार चल रही है उसमें बहुसंख्यक समाज के हित में तो लगभग कुछ भी नहीं हो रहा है हर जगह मामूली से मामूली घटना को एकपक्षीय अंदाज से हल किया जा रहा है।सहारनपुर में छेड़छाड़ को लेकर बवाल हुआ जिसमें एक एसओ को गोली गली तथा गोरखपुर में इसी प्रकार की घटना को अंजाम देकर तनाव फैलाने का प्रयास किया गया। बुलंदशहर के खुर्जा में भी छेड़छाड़ व विरोध करने पर मारपीट की घटना को लेकर सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया।गाजियाबाद के फरीदनगर में एक धर्मस्थल में भजन कीर्तन को लेकर दो संप्रदायों के बीच तनाव पैदा हो गया। इसी प्रकार कन्नौज,मेरठ मुरादाबाद और कुशीनगर से भी समाचार प्राप्त हो रहे हैं।

एक ओर जहां प्रदेश की पुलिस कानून- व्यवस्था सुधारने में विफल हो रही है वहीं दूसरी ओर वह रामपुर में भैंस, बकरी और मुर्गीसहित इलाहाबद में चुड़ैल खोजने में अपनी ताकत लगा रही है। इस बीच प्रदेश में नवनियुक्त डीजीपी जगमोहन यादव ने एक ऐसा बयान दिया है कि जिसके बाद राजनैतिक बयानबाजी की बाढ़ आ गयी है। कानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान डीजीपी जगमोहन यादव ने कहाकि,”आगामी पंचायत चुनाव व विधानसभा चुनावों के मददेनजर माहोल खराब करने की साजिश रची जा रही है। यही कारण है कि छोटी से छोटी घटनाओं को तूल दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंनें अधिकारियो को बिना किसी राजनतिक दबाव के काम करने की नसीहत भी दी है। “डीजीपी केबयान के बाद यह प्रश्न फिर सेखड़ा हो गया हैकि वे कौन से तत्व हैं जो प्रदेश का वातावरण खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि उनको किसी पर शक हो रहा है तो उन पर त्वरित कार्यवाही क्यों नहीं हो रही वह भी पूरी तरह से निष्पक्ष ढंग से। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और बसपाकेवल बहुसंख्यक हिंदू समाज और भाजपा को निशानाबनाते हैं। दूसरी तरफ प्रशासन पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टीकरण पर उतारू है। आखिकार लखनऊ चिडि़याघर का नाम नवाब वाजिद अलीशाह के नाम पर क्यों किया गया? केवल और केवल २२००० नवाबों का वोट प्राप्त करने के लिए। वहीं जिन मेधावी छात्रों को लेपटाप वितरण किया जायेगा उसमें २० फीसदी वितरण मुस्लिम छात्रों को क्या अन्य अल्पसंख्यक धर्मावलंबी मेधावी नहीं। अभी समाजवादी पार्टी अपनी इन्हीं नीतियों के कारण लोकसभा चुनावों में अपनी दुर्गति देख चुकी है।लेकिन हालात फिर वैसे ही बने दिखलायी पड़ रहे हैं आखिर हो भी क्योंन क्योकिं जब कानपुर में सपा नेता के संरक्षण में सेक्स रैकेट चल रहा हो तो।मुख्यमंत्री व सपा मुखिया की नसीहतों का कोई असर सपा में नहीं दिखलायी पड़ रहा है। यही कारण है कि विकास पीछे छूट सकता है और बिगड़ैल छवि आगे आकर सपा का खेल फिर बिगाड़ सकती है।

Leave a Reply

1 Comment on "उत्तर प्रदेश में बिगड़ती कानून वयवस्था के लिए कौन जिम्मेदार ?"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
mahendra gupta
Guest

इसके लिए मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी ही जिम्मेदार है , समाजवादी पार्टी ने जिस तरह लूट मचा राखी है उसका अंजाम इस रूप में होना तय ही था। जब तक मुलायम अपनी पार्टी के नेताओं पर लगाम नहीं कसेंगे इसमें सुधर गुंजाईश नहीं है। यह होना नहीं है क्योंकि वे तो खुद अपने अधिकारीयों को धमका रहे हैं और शिकायत पर खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं इस से ऐसा लगता है कि वे खुद माफिया सरदार बन गए हैं

wpDiscuz