लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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foeticideप्रतिमा शुक्ला

बन रहा हैं एक जीवन

आने को तैयार है एक जीवन

सोच रहीं है उस पल को

जब लेगी मां हाथों में

जाग्रत होगा उसका मातृत्व

बन जायेगी वह ममता की मूरत

अचानक हुई कुछ हलचल

शायद थी मशीनों की ध्वनि

सहम गयी वह

टूट गया उसका सपना

पूछ रही है वह मां से

नहीं लाओगी दुनिया में ?

क्या दोष है मेरा

जो आने से पहले ही

मार दिया अपना अंश ?

क्या मिली है मुझे

लड़की होने की सजा ?

ढूंढ रही ह%A

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