लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

प्रवक्‍ता ब्यूरो

Posted On by &filed under सिनेमा.


भारतीय फ़िल्म जगत की लाजवाब और दिल को झकजोर कर रख देने वाली फिल्मों से शुरू हुई थी। 1913 में सिनेमा की नींव रखने वाले अर्थात् सिनेमा के जनक दादा साहब फाल्के ने अपने संजीदा अनुभव और निर्देशन से इसे एक नई पहचान दी थी। उनके द्वारा ही आज हमारी भारतीय सिनेता की पूरे विश्व में तूती बोलती है, लेकिन आज के संदर्भ में देखें तो हमारा सिनेमा कहीं न कहीं अपना अस्तित्व खोने पर अमादा है। इसका मुख्य कारण और कुछ नहीं, बल्कि कमाई बढ़ाने का जरिया है। आज जिस तरह से सिनेमा में अश्लील और फूहड़ फिल्मों की भरमार हो रही, उससे तो यही लगता है कि हम अपनी कीमत को स्वयं गंवा रहे हैं। हाल ही में रिलीज हुई दो फिल्में इसका ताजा उदाहरण है। जी हां, क्या कूल हैं हम और मस्तीजादे। पहले भी जिस्म और मर्डर जैसी फिल्में अपनी अश्लीलता के कारण चर्चाओ में रही हैं।
उन्नीसवीं सदी के प्रारंभ से ही लगभग मानो एक नई श्रेणी जोड़ दी गई थी और वह थी अश्लील दृश्य दिखाना । फिल्मों में ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में तथा अच्छी टी आर पी के चक्कर में फिल्म मेकरों ने फिल्मों में अश्लील दृश्य दिखाने शुरू कर दिए थे हालांकि उस समय इतने ज्यादा ऐसे दृश्य नहीं दिखाई जाते थे विशेष रुप से फिल्म के विलैन दुष्कर्म करते हैं दिखाए जाते थे । इस कारण परिवार के साथ बैठकर इन फिल्मों को देखना थोड़ा कठिन सा हो जाता है पूरी फिल्म चाहे कितनी अच्छी हो लेकिन ऐसे दृश्यों से परहेज रखने वाले लोग दुखी हो जाते हैं । 2009 – 10 से इस में काफी विस्तार हो गया है जो आज वर्तमान स्थिति में ऐसे अश्लील दृश्य काफी ज्यादा दिखाए जा रहे हैं जो कि हमारे सभ्यता एवं संस्कृति को खंडित कर सकते हैं , इसका दुष्प्रभाव आज हमारे युवा पीढ़ी पर काफी पढ़ रहा है जो कि काफी गलत साबित भी हो रहा है । पुराने फिल्मी गानों में जहां अधिकतर शुद्ध हिंदी भाषा का प्रयोग किया गया था जिसमें कोई गलत शब्द नहीं बोले जाते थे, वहीं आज न जानें इसका भी शौक बढ़ चढ़ गया है अर्थात गंदे एवं आपत्तिजनक शब्दों को फिल्मों के गाने ले रहे हैं.  इस कारण गलत शब्दों के प्रयोग के कारण इनको थोड़ी बहुत सजा भी भुगतनी पड़ती है
अब तक कई अश्लील दृश्यों वाली फिल्में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है तथा फिर टेलीविजन पर भी प्रदर्शित कर देते हैं वह भी बिना रोक – टोक के । वैसे ऐसी कई फिल्में है जिसमें अश्लीलता अर्थात एडल्ट दृश्य दिखाएं गए हैं लेकिन ”ग्रांड मस्ती” फिल्म से ही शुरूआत करते हैं क्योंकि शायद यही पहली फिल्म थी जिसमें ज्यादा अश्लीलता दिखाई गई थी । साल 2015 में ऐसी कई फिल्में रिलीज हुई है जिसमें हम ”हेट स्टोरी 3” को भी देख सकते हैं फिल्म की कहानी बहुत अच्छी है लेकिन अश्लीलता के कारण पारिवारिक जनों के लिए प्रश्नचिन्ह लगा देगी ।

नव वर्ष 2016 के उपलक्ष में कई पूर्ण कॉमेडी फिल्मों के बारे में सुना है साल के पहले ही महीने में दो ऐसी फिल्में रिलीज हो चुकी है जिसमें पहली ”क्या कूल है हम 3” और दूसरी ”मस्तीजादे” । क्या कूल है हम सीक्वेल की यह तीसरी फिल्म है । कुछ समाचार पत्रों की माने तो यह भारतीय सिनेमा जगत की पहली ऐसी फिल्म है जिसमें सबसे ज्यादा अश्लील दृश्य दिखाए गये है . अत: इस फिल्म में पोर्न कलाकार सन्नी लियोन भी है . इस कारण इनके चहेतों की भीड़ जमी रह रही है इतना होने के बावजूद भी सरकार का कोई जवाब नहीं है.  फिल्म निमार्ता फिल्म निर्देशक एवं अभिनेता अभिनेत्रियों का तो यह एक पेशा है और ज्यादा कमाने के चक्कर में अपनी टी आर पी को बढ़ाने के चक्कर में है ज्यादा गंदी फिल्में दिखाते क्योंकि युवा पीढ़ी की यही पसन्द बन गई है । आगामी दिनों में एक और एडल्ट फिल्म रिलीज होगी जिसका नाम ”ग्रेट ग्रांड मस्ती” है । अगर इसी तरह यह कार्य चलता रहा तो हमारी संस्कृति हमारी सभ्यता पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते है.  दिन ब दिन हो रहे दुष्कर्म इसी का एक पहलू मान सकते है क्योंकि आज हर दिन दुष्कर्म के मामले वाली घटनाएं सुनने को मिलती है , इसका कारण यही हो सकता है क्योंकि इन पर ऐसी फ़िल्मों का प्रभाव पड़ता है फिर गलत नियत से गंदे कार्य करते है ।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz