लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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mini-tajmahal
डा. राधेश्याम द्विवेदी
प्यार की अमर निशानी ताजमहल का निर्माण शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल के लिए 1631 में आगरा में करवाया था। इसके ठीक 381 साल बाद बुलंदशहर के एक रिटायर्ड पोस्टमास्टर पति फैजुल हसन कादरी (78 वर्ष) ने 2012 में अपनी स्वर्गीय पत्नी तज्जमुली बेगम की याद में एक और मिनी ताजमहल का निर्माण करवाया है । इस ताजमहल का निर्माण करवाने वाला कोई राजा महाराजा नहीं बल्कि एक रिटायर्ड पोस्टमास्टर है और जगह आगरा नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर है।इस ताजमहल की आकृति हूबहू आगरा के ताजमहल जैसी है लेकिन यह देखने में एकदम साधारण है, क्योकि यह मात्र 15 लाख रूपए की लागत से तैयार हुआ है। फैजलु हसन कादरी और तज्जमुली बेगम के कोई संतान नहीं थी। इसलिए तज्जमुली बेगम ने अपने पति से कहा था, “हमे कोई ऎसी इमारत बनवानी चाहिए जिससे की मरने के बाद भी लोग हमे याद करे।“ तब फैजुल ने अपनी बीबी से वादा किया कि वो हूबहू ताजमहल जैसी एक छोटी इमारत बनवाया। दिसंबर 2011 में बेगम तज्जमुली का निधन हो गया और फैजुल ने फरवरी 2012 में अपने वादे के अनुरूप अपनी घर की खाली जगह में, 50 X 50 के प्लाट पर मिनी ताज महल का काम शुरू करवा दिया। इसके लिए वो पहले कारीगरों को ताजमहल घुमा कर लाये ताकि वो डिजाइन को अच्छी तरह समझ सके। फैजुल हसन कादरी के पास कुछ रूपए तो बचत और प्रोविडेंट फंड के थे, बाकी रकम का इंतजाम उन्होंने जमीन और अपनी मरहूम बीबी के गहने बेच कर किया। कुल मिलाकर 13 लाख रूपए जमा हुए, जिनसे 18 महीनो में एक ढाचा खडा हो गया। पैसे खत्म होने के कारण उन्हें काम बंद करना पडा। लोगो ने उन्हें मदद की पेशकश की मगर उन्होंने यह कह कर ठुकरा दी की इसका सम्पूर्ण निर्माण अपने पैसो से करवाऊंगा। अब जैसे-जैसे उनके पास अपनी पेंशन के रूपए जमा होते है वो इसका काम करवाते रहते है।
ताजमहल में ही दफन है उनकी बेगम : फैजल हसन कादरी ने 17 वीं शताब्दी में निर्मित ताज की प्रतिकृति के निर्माण का काम 2011 में शुरू किया, उसकी पत्नी का गले के कैंसर के कारण निधन हो गया था। सेवानिवृत्त क्लर्क ने अपनी पत्नी की याद में कासर कलां गांव में स्मारक के निर्माण में अपनी सारी बचत खर्च कर दी।फैजुल हसन कादरी ने अपनी बेगम की कब्र ताजमहल में बनवा दी है । फैजुल का कहना है की कई लोगों ने मुझसे कहा कि मैं अपना पैसा खराब कर रहा हूं। इसके बदले मैं किसी निर्धन जोडे की शादी करा सकता था। पर मैंने ताज महल ही बनवाने का फैसला किया। हम दोनों की शादी काफी पहले कम उम्र में ही हो गई थी। हमारे बीच कभी झगडा नहीं हुआ। फैजुल हसन कादरी के मिनी ताजमहल बनाने के कारण उनका गाँव विश्व स्तर पर चर्चित हो चुका है। विश्व के अधिकतर मीडिया जगत इस पर स्टोरी बना चुके है और इसी कारण अब तो लोग इसे देखने भी आने लगे है।
यूपी सरकार ने वित्तीय मदद: की :- 81 वर्षीय एक सेवानिवृत्त क्लर्क जिसने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में ‘मिनी’ ताजमहल बनाने पर अपनी सारी बचत खर्च कर दी, उसे मकबरा बनाने में उत्तर प्रदेश सरकार से वित्तीय मदद मिली है। उसने लोगो को कह रखा है की उनके मरने के बाद उन्हें भी अपनी बेगम के बगल में दफना दिया जाए। कादरी ने कहा कि धन की कमी की वजह से काम पिछले साल रुक गया। स्मारक को पूरा करने के आखिरी चरण में कादरी की सारी जमा पूंजी खत्म होने की हालिया खबरों के बाद राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया। जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने पुष्टि की है कि उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कहने पर उनकी परियोजना के बारे में जानने के लिए कादरी को बुलाया। किस्मत ने कादरी का साथ दिया जब मुख्यमंत्री को एक सोशल साइट पर ताजमहल की प्रतिकृति को देखने का हाल में मौका मिला था ।

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