लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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उड़ी में हुए आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब चाहे भारत सरकार न दे सकी हो, लेकिन कूटनीतिक दृष्टि से पाकिस्तान सारी दुनिया में बदनाम हो गया है। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस बार संयुक्त राष्ट्र यह सोचकर गए थे कि कश्मीर में चल रहे कोहराम को जमकर भुनाएंगे। भारत को बदनाम करेंगे और कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्‌दा बना देंगे, लेकिन लेने के देने पड़ गए। उड़ी ने पाकिस्तान की सारी चौपड़ को हवा में उड़ा दिया। मियां नवाज़ के हर तर्क का जवाब भारतीय प्रवक्ताओं ने जमकर तो दिया ही, सबसे मजेदार बात यह हुई कि जिस भी विदेशी नेता के सामने मियां साहब ने रोना-धोना किया, उन्होंने उन्हें उल्टी घुट्‌टी पिला दी। अमेरिका के विदेश मंत्री हों या ब्रिटेन की प्रधानमंत्री हों या संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हों, सबने नवाज शरीफ को एक ही बात कही कि अपने पड़ोसी देशों में आतंकी गतिविधियां चलाने से बाज़ आएं। कश्मीर के सवाल को आपसी बातचीत से हल करें।
पाकिस्तानी जनता के मन में अपनी फौज और सरकार की छवि कायम रखने के लिए पाक सरकार के प्रवक्ता नवाज़ की मुलाकातों का मनचाहा ब्यौरा पेश कर रहे हैं, लेकिन जिन विदेशी नेताओं से वे मिले हैं, उनके प्रवक्ताओं के बयान सारी पोल खोल रहे हैं। यहां तक कि चीनी प्रधानमंत्री ने भी कश्मीर के सवाल पर तटस्थ रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लगभग सभी स्थायी सदस्यों ने उड़ी हमले की कड़ी भर्त्सना की है। पाक के लिए इससे बढ़कर शर्म की बात क्या हो सकती है कि सऊदी अरब-जैसे उसके संरक्षक देश ने भी उड़ी हमले को कलंक बताया है। अंतरराष्ट्रीय इस्लामी संगठन के प्रमुख देशों- संयुक्त अरब अमिरात, बहरीन और कतर ने भी सऊदी अरब के स्वर में स्वर मिलाया है।

उड़ी ने पाकिस्तान की कितनी दुर्गति कर दी है, इसका अंदाज आप इसी से लगा सकते हैं कि दक्षिण एशिया (दक्षेस) के तीन मुस्लिम राष्ट्रों बांग्लादेश, अफगानिस्तान और मालदीव- ने पाकिस्तान की निंदा की है। उड़ी के पहले तक यह असमंजस बना हुआ था कि नवंबर में दक्षेस सम्मेलन होगा कि नहीं लेकिन, क्या अब साफ है कि इस्लामाबाद मंे होने वाला यह सम्मेलन स्थगित हुए बिना नहीं रहेगा। अफगानिस्तान के विदेशमंत्री सलाहुद्‌दीन रब्बानी ने पाक आतंकी कारस्तानियों का संयुक्त राष्ट्र में जमकर भांडाफोड़ किया है। श्रीलंका, भूटान और नेपाल भी आतंक के विरुद्ध खुलकर बोले। पाक फौज और सरकार के लिए यह छोटा-मोटा धक्का नहीं है कि अमेरिकी कांग्रेस में एक विधेयक लाया जा रहा है, जो यह घोषित करेगा कि पाकिस्तान आतंकवाद का जनक और पोषक है। जो अमेरिका अब तक पाकिस्तान को पालता-पोसता रहा और उसकी आतंकी गतिविधियों की अनदेखी करता रहा, उसके सांसद इस तरह का कानून बनवाने के लिए आखिर क्यों मजबूर हुए हैं? उड़ी की घटना ने पाकिस्तान की नई सीढ़ियां भी गिरा डालीं। एक बार तो रूस ने भी इशारा दिया कि वह पाकिस्तान के साथ होने वाला संयुक्त फौजी अभ्यास रद्द कर देगा। दुनिया के किसी भी देश ने पाक के साथ सहानुभूति नहीं दिखाई। पाक को ‘रोग स्टेट’ (गुंडा राज्य) घोषित करवाने में भारत सफल हो या न हो, उड़ी और पठानकोट में हुई गुंडई का काला टीका पाक के माथे पर खिंच गया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय तो जो कूटनीतिक सजा पाक को दे सकता था, दे रहा है, लेकिन भारत सरकार जबानी जमा-खर्च के अलावा क्या कर रही है? मोदी की सरकार और मनमोहन सिंह की सरकार में फर्क क्या है? उड़ी में जवानों को शहीद हुए हफ्ताभर हो गया, लेकिन हमारी सरकार ने अभी तक ठोस कदम क्या उठाया? उसे सभी सलाह दे रहे हैं कि वह आनन-फानन कोई सख्त कदम न उठा ले। युद्ध न छेड़ दे। यह सलाह तो ठीक है पर मैं पूछता हूं कि पिछले ढाई साल में इस सरकार ने क्या कभी यह नहीं सोचा कि उड़ी या पठानकोट-जैसी कोई वारदात हो जाए तो वह क्या करेगी? यदि सोचा होता तो ये छह-सात दिन क्या हमारे नेता सिर्फ बैठकों, यात्राओं, बयानों और भाषणों में गुजार देते? वे तुरंत कार्रवाई करते। उड़ी में चार आतंकी मारे जाते, उसके पहले ही सीमा-पार में खड़े उनके चार शिविर उड़ा दिए जाते। ईंट का जवाब पत्थर से जाता। सारे भारत का सीना गर्व से फूल जाता। दुश्मन को पता चलता कि भारत को यदि छेड़ा तो वह तुम्हें छोड़ेगा नहीं।

किंतु आतंकियों और उनके संरक्षकों को पता है कि भारत की सरकारें दब्बू हैं। वे डरी रहती हैं कि युद्ध छिड़ जाएगा। यह डर पाकिस्तान को क्यों नहीं है? उसके मुकाबले हमारी फौजी ताकत, हमारी जनसंख्या, हमारा क्षेत्रफल और हमारी एकता कई गुना ज्यादा है। यदि आपको डर है कि पाक के पास परमाणु बम है तो क्या पाक को पता नहीं है कि भारत के पास उससे कहीं ज्यादा परमाणु बम हैं? क्या पाक को यह डर नहीं होगा कि परमाणु युद्ध हो गया तो पाक का नामो-निशान भी नहीं बचेगा? यदि आप डरते रहे तो भारत की संसद, मुंबई की ताज होटल, पठानकोट और उड़ी के फौजी अड्‌डे उड़ाए जाते रहेंगे और आप बगलें झांकते रह जाएंगे।

पाकिस्तान तो खुद बेहद डरा हुआ राष्ट्र है, वरना वह कश्मीर में चोर दरवाजे से युद्ध क्यों चलाता रहता? सीना तानकर सामने आता। मान लें कि आप में खतरा मोल लेने की हिम्मत नहीं है, लेकिन आप में इतनी कूवत तो होनी चाहिए कि आप अपनी रक्षा कर सकें। आपके फौजी अड्‌़डों में विदेशी आतंकी घुस जाते हैं और आपको उसका सुराग तक नहीं लगता। हम अपने गुप्तचर विभाग और फौज पर करोड़ों रुपया रोज क्या इसीलिए खर्च कर रहे हैं? पाक को तो आप कोई ठोस जवाब नहीं दे सकते, लेकिन आपको भारत की जनता को तो जवाब देना पड़ेगा। वह पूछेगी कि वह 56 इंच का सीना कहां गया? आप क्या जवाब देंगे? यदि आपको पूरा विश्वास है कि इन आतंकियों को पाक फौज भेज रही है तो आपको किसने रोका है? आज पाक की हालत यह है कि आप वहां दस कश्मीर खड़े कर सकते हैं। आप कांटे से कांटा निकालिए। ईरान और अफगानिस्तान आपका साथ देंगे। सभी मित्र-देशों से आग्रह कीजिए कि वे पाक का हुक्का-पानी तब तक बंद रखें, जब तक वह आतंकियों को खत्म नहीं करता। यदि चीन उसकी मदद पर दौड़ता है तो चीन के सिंक्यांग प्रात के बागी उइगर मुसलमानों को इतनी शह दी जा सकती है कि बीजिंग और शंघाई के पसीने छूटने लगें। यदि आपकी कूटनीति में दम हो तो पाकिस्तान को ‘अंतरराष्ट्रीय अछूत’ घोषित करवाइए।

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1 Comment on "भारत ईंट का जवाब पत्थर से क्यों न दे?"

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Himwant
Guest

भारत कोई पाकिस्तान की तरह गैर जिम्मेवार, असभ्य एवं कमजोर देश तो है नही. तुरन्त जवाब देना आवश्यक नही है. जल्दबाजी में चूक की संभावना होती है. जरूरत है कि इस घटना को कभी न भूलना.

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