लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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tajडा. राधेश्याम द्विवेदी
संगमरमरी ताजमहल पर प्रदूषण के दागों की जांच शुरू की गई है। कार्बन कणों की जांच रिपोर्ट के बाद एएसआई साइंस ब्रांच ने ताज के संगमरमर पर जमा गंदगी के सैंपल इकट्ठे किए हैं और प्रदूषण साथ लाने वाली हवाओं की दिशा का अध्ययन शुरू किया है। साइंस ब्रांच की एयर पॉल्यूशन विंग हवा की दिशा, खास समय पर प्रदूषण की तीव्रता और मौसम के मुताबिक प्रदूषण में बदलाव की स्टडी कर रही है। इससे ताज पर लग रहे दाग की मुख्य वजह सामने आ पाएगी। ताजमहल के पीले पड़ने के बाद मडपैक तो शुरू हो गया लेकिन ताज किन वजहों से पीला पड़ रहा है, एएसआई उन सभी वजहों की जांच में जुट गया है। एएसआई साइंस ब्रांच के अधीक्षण रसायनविद् डा. एमके भटनागर के नेतृत्व में ताजमहल के संगमरमर पर जमा गंदगी के सैंपल जुटाए गए हैं और उनमें मौजूद तत्वों की जांच की जा रही है। इसी के साथ ही ताज पर प्रदूषण लेकर आ रही हवा की दिशा तक का अध्ययन शुरू किया गया है। ताज की मीनारों के सबसे ऊपरी हिस्से के साथ बीच में और निचले हिस्से से सैंपल इकट्ठे किए गए हैं। ताजमहल पर मौजूद साइंस ब्रांच की एयर पाल्यूशन लैब में करीब एक साल तक हर मौसम की हवाओं का अध्ययन किया जाएगा।
इन सवालों का जवाब ढूंढा जा रहा:- – जांच अध्ययन शुरू की गई है. इन सवालों का जवाब ढूंढा जा रहा है: – ताज पर हवा की दिशाएं और चक्र किस तरह का है? ताज पर प्रदूषण की मार सबसे ज्यादा किस समय पर होता है? सर्दी, बारिश और गर्मी में प्रदूषण की तीव्रता का किस समय पर होता है ? हवा की दिशा के साथ उसमें मौजूद तत्वों की मात्रा कितना है ? यमुना नदी की ओर से कौन सी गैसों का हो रहा हमला होता है ?
मडपैक के फायदे या नुकसान की भी स्टडी किया जाएगा:- ताजमहल की चारों मीनारों और मुख्य गुंबद पर पहली बार किए जा रहे मडपैक से संगमरमर को कितना फायदा हुआ या नुकसान भी हो सकता है, इसकी स्टडी भी साइंस ब्रांच कर रही है। मडपैक से पहले और बाद के मार्बल की जांच शुरू हुई है। दरअसल, एएसआई के लिए यह स्टडी इसलिए भी जरूरी है ताकि ताज के प्रदूषण से पीले पड़ने पर कितने साल बाद मडपैक प्रयोग किया जाए, यह तय हो सके । डा. भुवन विक्रम अधीक्षण पुरातत्वविद के मुताबिक: ताजमहल के संगमरमर पर कार्बन के कण जांच में पाए गए। पीलेपन की शिकायतों के बाद संसदीय कमेटी ने जो सिफारिशें की, उसके मुताबिक मडपैक किया जा रहा है। प्रदूषण न रोका गया तो ताजमहल फिर पीला पड़ेगा और मडपैक का प्रयोग करना होगा। मडपैक से ज्यादा जरूरी है ताज के पास पर्यावरण में सुधार।
गुंबद के मडपैक की विदेशों से पूछताछ:-ताजमहल के मुख्य गुंबद के पहली बार होने जा रहे मडपैक पर अमर उजाला की खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को विदेशों से कई टूर एंड ट्रेवल आपरेटरों ने एएसआई से पूछताछ की। एएसआई अधिकारियों के मुताबिक, ताज की उत्तरी दीवार के बाद सभी दीवारों पर मडपैक लगेगा। उसके बाद ही मुख्य गुंबद पर काम होगा। कम से कम तीन महीने पाड़ बांधने में लगेंगे। ऐसे में नए साल में ही मुख्य गुंबद पर मडपैक शुरू हो सकेगा। तब तक लोड वियरिंग कैपेसिटी की जांच भी हो जाएगी।

 

एक साल तक नजर नहीं आएगा ताज का मुख्य गुंबद
डा. भुवन विक्रम , अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई के अनुसार मीनारों के बाद अब दीवारों पर मडपैक लगाया जा रहा है। इसके बाद मुख्य गुंबद पर मडपैक कराया जाएगा। मडपैक के दौरान ही गुंबद पर संरक्षण का काम किया जाएगा। टूटे पत्थरों को बदलने के साथ प्वाइंटिंग जैसे काम भी कराए जाएंगे।ताजमहल का पीला पड़ चुका गुंबद एक साल तक नजर नहीं आएगा। मुख्य गुंबद को चमकाने के लिए मडपैक थेरेपी के दौरान यह चारों ओर से स्केफोल्डिंग (पाड़) से ढक जाएगा। दुनिया के सातवें अजूबे को तामीर होने के बाद पहली बार मुख्य गुंबद पर मडपैक लगाया जाएगा। इस पर लगे ब्रास के 9.29 मीटर ऊंचे कलश की भी पहली बार एएसआई साइंस ब्रांच केमिकल क्लीनिंग करेगी। दीदार ए ताज के लिए आने वाले सैलानियों को एक साल तक सेल्फी लेने और फोटोग्राफी कराने में ताज का बैकग्राउंड खूबसूरत नजर नहीं आ पाएगा।
1874 में गुंबद के कलश पर चढ़ाया मुलम्मा:-ब्रिटिश काल में 1874 में तत्कालीन एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जेडब्ल्यू एलेंक्जेंडर ने ताजमहल में मुख्य गुंबद के संरक्षण पर 70,926 रुपये खर्च किए थे। तीन साल तक चले संरक्षण में गुंबद के टूटे पत्थरों को बदलने के साथ पच्चीकारी का काम कराया गया। गुंबद के ऊपर पिनेकल पर मुलम्मा चढ़ाया गया था। इसके बाद 1880 में तत्कालीन डीएम एफ बॉकर ने मेहमान खाने की ओर चमेली फर्श पर इसी कलश का काले ग्रेनाइट से छाया चित्र तैयार कराया।गुंबद पर इससे पहले 1940-41 में विश्व युद्ध के दौरान संरक्षण और सुरक्षा के लिए स्केफोल्डिंग लगाई गई थी, लेकिन मडपैक के लिए यह पहला मौका होगा। 75 साल बाद गुंबद वैसा ही नजर आएगा। गुंबद के साथ ही ब्रास के कलश को भी केमिकल ट्रीटमेंट कर साफ किया जाएगा। धूल, बारिश और रस्ट के कारण यह बदरंग हो चुका है। एएसआई ने स्पष्ट कर दिया है कि विश्व धरोहर ताज का रखरखाव पहली प्राथमिकता है, न कि पर्यटकों की सेल्फी। पीलेपन और ब्लैक कार्बन के दाग हटाने को मडपैक जरूरी है। ताजमहल की चारों मीनारों पर मडपैक के लिए लोहे की स्केफोल्डिंग लगाई गई, वही मुख्य गुंबद पर भी लगाई जाएगी। संगमरमरी स्मारक के मुख्य गुंबद पर स्केफोल्डिंग का लोड कहीं ज्यादा तो नहीं हो जाएगा, इसके लिए लोड वियरिंग कैपेसिटी की जांच की जाएगी। दरअसल, एक साल तक के लिए यह स्केफोल्डिंग लगी रहेगी। तीन से पांच महीनों का समय तो स्केफोल्डिंग बांधने में ही लग जाएगा। 250 फुट की ऊंचाई तक लोहे के पाइप पहुंचाना ही मुश्किल काम है।

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