लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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बाबा जयगुरुदेव नाम एक अलग तुलसीदास महाराज के लिए प्रयोग किया गया, ये उत्तर भारत के एक धर्मिक गुरु व आध्यात्मिक संत थे । दुनिया भर में शाकाहार और शराबबंदी का प्रचार करने वाले बाबा जयगुरुदेव थे। बाबा ने दिल्ली से 150 किलोमीटर दूर आगरा-मथुरा हाईवे पर अपना आश्रम बनाया। इसमें संगमरमर का ऐसा मंदिर बनवाया जो ताजमहल की खूबसूरती को भी टक्कर देता है । ये 1975 के आपातकाल के दौरन 20 महीने जेल में रहें और दूरदर्शी पार्टी का गठन किया जो 1980 और 1990 के आम चुनाव में असफल रही। इन सब के अलावा बाबा जय गुरुदेव राजनीति से भी दूर नहीं रहे हैं। खुद को सुभाष चंद्र बोस का अनुनायी बताने वाले जय गुरुदेव आपातकाल में जेल भी जा चुके हैं और राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में कूद चुके हैं। बाबा जय गुरुदेव का 2012 में 116 वर्ष की उम्र में देहांत हुआ। चार साल पहले 2012 में जब बाबा जय गुरुदेव का निधन हुआ तो उनके पास 100 करोड़ रुपए नगद और 250 लग्जरी गाड़ियों का पता चला ।
इटावा में जन्मे बाबा:- बाबा की सही जन्मतिथि किसी को मालूम नहीं है। लेकिन कहा जाता है कि 100 साल पहले उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में इनका जन्म हुआ। जब वे बच्चे थें तब उनके माता-पिता का देहांत हो गया. उनके पिता जमींदार थें। उनकी माँ मरते समय उनसे कहा कि वे इश्वर को खोज लें और शादी न करे। बचपन में लोग उन्हें तुलसीदास के नाम से बुलाते थे। गुरु के महत्व को सर्वोपरि रखने वाले और जय गुरुदेव का उद्घोष करने वाले बाबा जय गुरुदेव इसी नाम से प्रसिद्ध हो गए।
आध्यात्मिक शिक्षा :- उन्होंने सात वर्ष की उम्र में अपना घर छोड़ दिया। वे इश्वर की खोज में मंदिर, मस्जिद और गिरिजाघर गए। आजादी के बाद से ही जय गुरुदेव अध्यात्म के प्रचार-प्रसार में जुट गए। उनके गुरु श्री घूरेलाल जी थे जो अलीगढ़ के चिरौली ग्राम (इगलास तहसील) के निवासी थे। उन्हीं के पास बाबा वर्षों रहे। उनके गुरु जी ने उनसे मथुरा में किसी एकांत स्थान पर अपना आश्रम बनाकर ग़रीबों की सेवा करने के लिए कहा था। गुरु जी की मृत्यु (1948) के बाद उन्होंने अपने गुरु स्थान चिरौली के नाम पर सन् 1953 में मथुरा के कृष्णा नगर में चिरौली संत आश्रम की स्थापना करके अपने मिशन की शुरुआत की। एक अनुमान के मुताबिक जय गुरुदेव के दुनिया भर में 2 करोड़ से ज्यादा अनुनायी है। ये लोग जय गुरुदेव पंथ को मानने वाले हैं। इनका नारा है, “जयगुरुदेव, सतयुग आएगा’’। आपको बता दें कि जून 2016 के महीने में हुई मथुरा हिंसा का आरोपी रामवृक्ष यादव भी जय गुरुदेव का ही अनुनायी था । बाबा की मृत्यु को चार बरस बीत चुके हैं लेकिन आज भी उनकी याद में जगह-जगह हजारों लोग जमा होते हैं।
150 एकड़ में फैला हुआ जयगुरुदेव आश्रम:-बाबा जय गुरुदेव ने सन् 1962 में मथुरा में ही आगरा-दिल्ली राजमार्ग पर स्थित मधुवन क्षेत्र में डेढ़ सौ एकड़ भूमि ख़रीदकर अपने मिशन को और अधिक विस्तार दिया। जय गुरुदेव आश्रम की लगभग डेढ़ सौ एकड़ भूमि पर संत बाबा जय गुरुदेव की एक अलग ही दुनिया बसी है। उनके अनुनानियों में हर वर्ग के लोग शामिल हैं। उनके अनुनायी जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था एवं जय गुरुदेव धर्म प्रचारक ट्रस्ट चला रहे हैं, जिनके तहत तमाम लोक कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं।
4000 करोड़ रुपये की संपत्ति:- बाबा जय गुरुदेव का 18 मई 2012 की रात मथुरा में निधन हुआ। एक अनुमान के मुताबिक उनके पास करीब 4000 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। उनके पास 100 करोड़ रुपए नगद और 150 करोड़ की 250 लग्जरी गाड़िया थीं। हालांकि बाबा जय गुरुदेव आध्यात्मिक साधना, शराब निषेध, शाकाहार, दहेज रहित सामूहिक विवाह, वृक्षारोपण, नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क चिकित्सा आदि पर विशेष बल देते थे।
29 साल में बनाया अपने गुरु का अनोखा मंदिर:- जयगुरुदेव ने अपने आश्रम में अपने गुरु श्री घूरेलाल जी याद में 160 फुट ऊंचे नाम योग साधना मंदिर का निर्माण कराया हुआ है। सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर ताजमहल जैसा प्रतीत होता है। इस मंदिर की डिजाइन में मंदिर-मस्जिद का मिला-जुला रूप है। इस मंदिर का निर्माण 1973 में शुरू हुआ और यह 2002 में बनकर तैयार हुआ। अब जय गुरुदेव के अनुनायी भी इसी जगह उनकी याद में अनूठा मंदिर बना रहे हैं।

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