लेखक परिचय

विजय कुमार

विजय कुमार

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

Posted On by &filed under कहानी, साहित्‍य.


 

घर में सब लोग साथ बैठकर खाना खा रहे थे। चार साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग सब वहां थे। मां सेब काट कर सबको दे रही थीं। जब उन्होंने चार साल के चुन्नू को भी एक फांक दी, तो वह मचलता हुआ बोला, ‘‘मैं दो सेब लूंगा।’’ मां ने चाकू से उसी एक फांक के दो टुकड़े किये और उसे देती हुई बोली, ‘‘लो बेटा, आप दो सेब लो।’’

चुन्नू खुश होकर नाचने लगा। सबको दिखा-दिखा कर बोला, ‘‘मां ने मुझे दो सेब दिये। मैं दो सेब खाऊंगा।’’

इस पर चुन्नू का दसवर्षीय बड़ा भाई बोला, ‘‘मां, चुन्नू बिल्कुल गधा है। आपने एक फांक के दो टुकड़े कर दिये। ये इसी को दो सेब मानकर खुश हो गया।’’

मां ने कहा, ‘‘नहीं बेटा, चुन्नू गधा नहीं भोला है। इस आयु में सब बच्चे ऐसे ही भोले होते हैं। फिर उसे अपनी मां पर विश्वास है कि यदि उसने कोई बात कही है, तो और कोई भले ही टाल दे, पर मां उसे हर हाल में पूरा करेगी। ये भोलापन और विश्वास ही ‘बचपन की पूंजी’ है।’’

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz