स्वतंत्र उड़ने की चाह, परिवर्तन जीवन का सार, आत्मविश्वास से जीत.... पत्रकारिता पेशा नहीं धर्म है जिनका. यहाँ आने का मकसद केवल सच को कहना, सच चाहे कितना कड़वा क्यूँ न हो ? फिलवक्त, अध्ययन, लेखन और आन्दोलन का कार्य कर रहे हैं ......... http://www.janokti.com/
१० अक्तूबर को भारत नीति संस्थान के द्वारा दीनदयाल शोध संस्थान, नई दिल्ली में ” वर्तमान सन्दर्भ में हिंद स्वराज की प्रासंगिकता ” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया . इस संगोष्ठी में वरिष्ठ गांधीवादी चिन्तक और पूर्व सांसद राम जी सिंह , जेएनयु के प्राध्यापक अमित शर्मा , पांचजन्य के सम्पादक बलदेव [...]
हम महात्मा गांधी को राष्ट्र पिता कहते हैं, किंतु उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर भाषणबाजी और कुछ समारोहों के आयोजन के अलावा इस बात की जरा भी परवाह नहीं करते कि उन्होंने अपने अद्भुत नेतृत्व के दौरान क्या किया और क्या संदेश दिया? हिंदुत्व पर उनके गहन विचारों के बारे में तो हमारा बिल्कुल ही [...]
गाँधी का जन्म हिंदू धर्म में हुआ, उनके पुरे जीवन में अधिकतर सिधान्तों की उत्पति हिंदुत्व से हुआ. साधारण हिंदू कि तरह वे सारे धर्मों को समान रूप से मानते थे, और सारे प्रयासों जो उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कोशिश किए जा रहे थे उसे अस्वीकार किया.
अगर एक व्यक्ति समाज सेवा में कार्यरत है तो उसे साधारण जीवन की ओर बढ़ना चाहिए ,ऐसा बापू का कहना था जिसे वे ब्रह्मचर्य के लिए आवश्यक मानते थे. उनकी सादगी ने पाश्चात्य जीवन शैली को त्यागने पर मजबूर किया
बाल्यकाल में गांधी को मांस खाने का अनुभव भी मिला। उनकी जिज्ञासा के उत्साहवर्धक में उनके मित्र शेख मेहताब का सहयोग मिला । शाकाहार का विचार भारत की हिंदु और जैन परम्पराओं में कूट-कूट कर भरा हुआ था .उनकी मातृभूमि गुजरात में ज्यादातर हिंदु शाकाहारी ही थे।
प्रवक्ता पर एक पखवाड़े से गाँधी के सिद्धांतों और हिंद स्वराज को लेकर विमर्श चल रहा है . आज भारत हीं नहीं संसार के अनेक देशों के विद्वान गाँधी दर्शन में वैश्विक स्तर पर संघर्षों से उत्पन्न कुव्यवस्था का समाधान बता रहे हैं .बीते दिनों गाँधी जयंती के दौरान काहिरा में आयोजित एक संगोष्ठी में अरब के गणमान्य नेताओं ने गाँधी के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की
नेता जी ने अपनी गांधी-टोपी सीधी की।रह रह कर टेढी़ हो जाया करती है। विशेषत: जब वह सत्ता सुख से वंचित रहते हैं।धकियाये जाने के बाद टेढी़ ,मैली-कुचैली हो जाती है।समय-समय पर सीधी रखना एक बाध्यता हो जाती है,अन्यथा विरोधी दल ’टोपी-कोण” पर ही हंगामा शुरू कर सकते हैं
दैनिक हिन्दुस्तान के सप्लीमेंट ‘रिमिक्स’ के अंदर छपे एक लेख ने मेरे मस्तिष्क को अच्छा खासा घुमाया। अब आप यह सोच रहे होंगे की ऐसा लेख क्या था? वह लेख था ‘अनुराग कैसे पहुंचे वेनिस’’ ।
अरे , भाई यह क्या गजब हो गया .मैंने तो सेक्स / काम – चर्चा की कड़ियाँ लिखनी शुरू कर दी .अब लोगों को कैसे साबित करूँगा कि मैं ब्लॉग हित ,देश हित ,जन हित …. में लिखता हूँ ! . सेक्स /काम का जन से क्या सरोकार ! कुछ अन्य ब्लॉगर को देखो धर्म -चर्चा में विलीन हैं, अपने -अपने ब्लॉग पर अवतारों की चर्चा करते हैं , और मैं मूढ़ सेक्स की बात करता हूँ ! छि छि छि …..
पिछले दिनों कई पोस्ट में मैंने सेक्स और समाज को मुद्दा बना लिखा .आम तौर पर लोगों ने मज़े लेने के लिए पढ़े और वाहवाही कर चलते बने . हाँ कुछेक साथियों ने बहस में भाग लेने की कोशिश जरुर की जो कामयाब न हो पाई . सेक्स की बात सुन कर हम मन ही मन रोमांचित होते हैं .जब भी मौका हो सेक्स की चर्चा में शामिल होने से नहीं चूकते .इंटरनेट पर सबसे अधिक सेक्स को हीं सर्च करते हैं .
जामिया में छात्र की मौत से भड़के छात्रों के हंगामे और वास्तविक घटनाक्रम का जायजा ले रहे पत्रकार अभिषेक सिंह की एक रपट : ब्ल्यू लाइन बसों के क़हर से पूरी दिल्ली सहम चुकी है। वहीं ब्लू लाइन के खूनी इतिहास में एक ऐसा अध्याय और जुड़ गया है जिसने जामिया विश्वविद्यालय में भी अपनी [...]
अमेरिका में होने वाले आगामी जी-20 देशों की शिखर बैठक के दौरान भारतीय और चीनी प्रधानमंत्री के बीच औपचारिक भेंट की संभावना ख़त्म हो गयी है .भारत की तरफ से यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत सरकार चीनी सेना द्वारा सीमा के अतिक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर भारत में कमोबेश तनाव का माहौल बनता दिख रहा है
मणिपुर में लंबे समय से सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून का विरोध होता आ रहा है . राज्य में एकबार फिर से कई संगठन इसके विरोध के लिए एकजुट होकर सडकों पर उतरे हैं. मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस विशेषाधिकार क़ानून के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए इन संगठनों ने राज्य में 60 घंटे का बंद बुलाया जिसमें जनजीवन पर मिलाजुला असर दिखाई पड़ा . मामले के अभी गरम होने की वजह पहले चरमपंथी रहे और अब सामान्य जीवन में वापसी कर चुके संजीत की कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हत्या को समझा जा रहा है .
अनिल अंबानी की कंपनी, आरएनआरएल ने शुक्रवार को मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ अपने गैस विवाद पर सरकार की याचिका को खारिज करने की मांग की है।और कहा है , सरकार इस मुद्दे पर किसी फैसले की मांग नहीं कर सकती है।हाँ, सरकार इस मुद्दे पर अपनी राय दे सकती है।
लोकतंत्र के चाहने वालों के लिए एक और खुशखबरी है .आगामी महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में कलावती चुनाव लड़ रही है .पिछले साल सुर्खियों में रहने वाली विदर्भ के किसान की विधवा और ७ बच्चों की माँ कलावती यवतमाल के वणी विधानसभा सीट से चुनावी समर में कूद पड़ी हैं . कलावती ने तमाम राजनितिक दलों के टिकट को ठुकराकर विदर्भ जनांदोलन समिति और शेतकरी संघर्ष समिति के बैनर तले चुनाव लड़ना स्वीकार किया है .
हम जीवन के मूल तत्व ‘ काम ‘ अर्थात ‘सेक्स’ के ऊपर विभिन्न विचारकों और अपने विचार को आपके समक्ष रखेंगे . काम का जीवन में क्या उपयोगिता है ? सेक्स जिसे हमने बेहद जटिल ,रहस्यमयी ,घृणात्मक बना रखा है उसकी बात करने से हमें घबराहट क्यों होती है ? क्यों हमारा मन सेक्स में चौबीस घंटे लिप्त रहने के बाद भी उससे बचने का दिखावा करता है
वन्यजीव कार्यकर्ता और भाजपा की सांसद मेनका गांधी और उनके एनजीओ के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक मामला दर्ज किया गया है। मेनका पर आरोप लगाया है कि वह एक पालतू पशु की दुकान चलाने वाले व्यक्ति को अपना कार्य करने से रोक रही थीं।
केंद्र की संप्रग सरकार ने खाद्य पदार्थों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने हेतु उनके भंडारण पर सीमा और कारोबार पर लाइसेंस आदि की शर्तो की मियाद एक साल के लिए बढा दिया है .सरकार ने इसके लिए आवश्यक वस्तु कानून के तहत दालों, चीनी, धान, खाद्य तेल, तिलहन और चावल के संबंध में केंद्रीय अधिसूचनाओं की अवधि अगले वर्ष सितंबर तक बढ़ा दी है।