नक्सलवाद की त्रिमूर्ती चारु मजूमदार, जंगल संथाल और कानू सान्याल में से केवल सान्याल ही जिंदा बचे थे। यह आंदोलन उन्होंने पिछली शताब्दी के मध्य में शुरु किया था और 21 वी शताब्दी के पहले दशक के बीतत-बीतते कानू सान्याल ने नक्सलवाद की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आत्महत्या करना ही श्रेयस्कर समझा। कहा जाता [...]