रवि  शंकर

Author:   रवि शंकर

रसायन शास्त्र से स्नातक। 1992 के राम मंदिर आंदोलन में सार्वजनिक जीवन से परिचय हुआ। 1994 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से परिचय हुआ और 1995 से 2002 तक संघ प्रचारक रहा। 2002 से पत्रकारिता शुरू की। पांचजन्य, हिन्दुस्तान समाचार, भारतीय पक्ष, एकता चक्र आदि में काम किया। संप्रति पंचवटी फाउंडेशन नामक स्वयंसेवी संस्था में शोधार्थी। “द कम्प्लीट विज़न” मासिक पत्रिका का संपादन। अध्ययन, भ्रमण और संगीत में रूचि है। इतिहास और दर्शन के अध्ययन में विशेष रूचि है।

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गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय उत्सव का मिथक

गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय उत्सव का मिथक

गणतंत्र दिवस आ रहा है। पूरे देश में इसे मनाने की कोशिश शुरू हो जाएगी। गणतंत्र दिवस को हमारी सरकार और उसके अनुयायी राष्ट्रीय उत्सव कहते हैं। देश के सारे विद्यालयों और सरकारी संस्थानों में इस राष्ट्रीय उत्सव को मनाने की बाध्यता है। सवाल यह है कि उत्सव क्या बाध्यता से मनाए जाते हैं? एक [...]

नववर्ष का सच

नववर्ष का सच

वर्ष 2009 समाप्त हो रहा है और वर्ष 2010 प्रारंभ होने वाला है। कहने के लिए नया वर्ष आने वाला है और देश का समृद्ध वर्ग विषेषकर मीडिया बीते वर्ष की समीक्षा व आने वाले वर्ष का स्वागत करने में जुट गए है। वर्ष में एक बार पूरे वर्ष की समीक्षा करनी ही चाहिए, यह [...]

पत्रकारिता के खोते मापदंड

पत्रकारिता के खोते मापदंड

बीसवीं सदी में सूचना क्रांति के विस्फोट के साथ-साथ पत्रकारिता का बहुविधा विकास हुआ है। लगभग 62483 पंजीकृत अखबारों और 600 से अधिक समाचार चैनलों के साथ देश के मीडिया ने पूरे विश्व में अपनी एक जगह बनाई है। आधुनिक जीवन की बढ़ती व्यस्तताओं और बदलती शैली के मद्देनजर पत्रकारिता ने अपना कलेवर भी बदला [...]

संघ और भाजपाः ये रिश्ता क्या कहलाता है?

संघ और भाजपाः ये रिश्ता क्या कहलाता है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी। एक परिवार के दो सदस्य। एक विचारधारा के दो पहलू। एक संगठन में व्यस्त है तो एक राजनीति में। इस नाते दोनों में एक गंभीर रिश्ता है। परंतु यह रिश्ता क्या है, इस पर काफी विवाद और संभ्रम है। मातृ संगठन संघ को कहें और भाजपा को उसकी [...]

हिन्द स्वराज और आज की चुनौतियां

हिन्द स्वराज और आज की चुनौतियां

वर्ष 2009 हिन्द स्वराज का शताब्दी वर्ष है। महात्मा गांधी की कृतियों में हिन्द स्वराज का महत्व सबसे अधिक माना जा सकता है। हिन्द स्वराज में गांधी जी ने एक प्रकार से अपने सपने के स्वाधीन भारत का चित्र खींचा था। हालांकि उन्होंने यह पुस्तिका 1909 में लिखी थी परंतु इसमें लिखी बातों पर वे [...]

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