उर्दू पत्रकारिता पर विमर्श के बहाने एक सही शुरूआत

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भारतीय भाषाओं को बचाने के लिए आगे आने की जरूरत – संजय द्विवेदी यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि उसकी राजधानी भोपाल से उर्दू पत्रकारिता के भविष्य पर सार्थक विमर्श की शुरूआत हुई है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल और इसके कुलपति प्रो.बृजकिशोर कुठियाला इसके लिए बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने हिंदी ही नहीं… Read more »

भारतीय भाषाओं में अंतरसंवाद

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अंग्रेजी के भाषाई साम्राज्यवाद के विरूद्ध संघर्ष की जरूरत भोपाल, 23 जनवरी, 2010। भोपाल के संभागायुक्त और चिंतक मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि मातृभाषाओं की कीमत पर कोई भी भाषा स्वीकारी नहीं जानी चाहिए। दुनिया के तमाम देश अपनी भाषाओं के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं और अंग्रेजी के भाषाई साम्राज्यवाद के… Read more »

वेब पत्रकारिता : चुनौतियाँ और संभावनाएँ- डॉ. सीमा अग्रवाल

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डॉ. सीमा अग्रवाल ”सूचना से अधिक महत्वपूर्ण सूचनातंत्र है।” ”माध्यम ही संदेश है” नामक पुस्तक में प्रसिद्ध मीडिया विशेषज्ञ मार्शल मैक्लूहन की लिखी उक्त उक्ति आज के दौर में नितान्त प्रासंगिक और समसामयिक है। यह सार्वकालिक सत्य है कि सूचना में शक्ति है। पत्रकारिता तो सूचनाओं का जाल है, जिसमें पत्रकार सूचनाएँ देने के साथ-साथ… Read more »

फासीवादी लेखक के आर-पार के उस पार

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-पंकज झा प्रवक्ता डॉट कॉम के इस बहस पर पहले तो अपना विचार यही था कि अब खुद से कुछ न लिखूं. इस साईट ने ऐसे ईमानदार एवं निष्ठित विद्वानों का लोक संग्रह किया है जो हर चुनौतियों का डट कर मुकाबला कर सकते हैं. अगर अनुचित लगे तो साईट के संपादक को भी खरी-खोटी… Read more »

जब-तक सूरज चाँद रहेगा, प्रभाष जोशी का नाम रहेगा – गिरीश पंकज

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प्रभाष जोशी का अचानक ऐसे चला जाना उन लोगों के लिए दुखद घटना है जो पत्रकारिता को मिशन की तरह लेते थे और वैसा व्यवहार भी करते थे। जोशी जी के जाने के वाद अब लम्बे समय तक दूसरा प्रभाष जोशी पैदा नहीं होगा। राजेंद्र माथुर जी के जाने के बाद प्रभाष जोशी ने उनके… Read more »