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	<title>Comments on: &#8216;हिन्दस्वराज&#8217; में गांधी जी की शिक्षा नीति</title>
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		<title>By: sunil patel</title>
		<link>http://www.pravakta.com/?p=5404&#038;cpage=1#comment-1895</link>
		<dc:creator>sunil patel</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Dec 2009 07:02:02 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत ही अच्छा लेख. दो दिन में २० से २5 बार पढ़ा गया. श्री दीक्षित जी ने मीडिया या अन्य पर लिखा होता तो सेकड़ा पर कर जाता. यही हमारी वर्तमान सिक्षा निति है. भारत से कई गुना छोटे बहुत से देश है जो आपनी मात्र राष्ट्र भाषा में अपना सारा कम काज करते हैं. इंग्लिश वहां सिर्फ अन्य देशो से संपर्क करने के लिया उपयोग के जाती है. हम तो अंग्रेजी के गुलाम है. हिंदी भाषा यहाँ दाई के तरह है. बहुत शर्म की बात है. 

इन विषय पर सरकार कोई बात करना भी नहीं चाहती है. जनता को इससे  कोई मतलब ही नहीं है. हर कोई गाँधी जी के सिर्फ आहिन्षा के पहलू को ही याद करंता है. उनके अन्य पाठ सिद्धान्त को लोग जानना ही नहीं चाहते हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत ही अच्छा लेख. दो दिन में २० से २5 बार पढ़ा गया. श्री दीक्षित जी ने मीडिया या अन्य पर लिखा होता तो सेकड़ा पर कर जाता. यही हमारी वर्तमान सिक्षा निति है. भारत से कई गुना छोटे बहुत से देश है जो आपनी मात्र राष्ट्र भाषा में अपना सारा कम काज करते हैं. इंग्लिश वहां सिर्फ अन्य देशो से संपर्क करने के लिया उपयोग के जाती है. हम तो अंग्रेजी के गुलाम है. हिंदी भाषा यहाँ दाई के तरह है. बहुत शर्म की बात है. </p>
<p>इन विषय पर सरकार कोई बात करना भी नहीं चाहती है. जनता को इससे  कोई मतलब ही नहीं है. हर कोई गाँधी जी के सिर्फ आहिन्षा के पहलू को ही याद करंता है. उनके अन्य पाठ सिद्धान्त को लोग जानना ही नहीं चाहते हैं.</p>
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		<title>By: RAJ SINH</title>
		<link>http://www.pravakta.com/?p=5404&#038;cpage=1#comment-1888</link>
		<dc:creator>RAJ SINH</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Dec 2009 10:30:20 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत ही सार्थक आलेख .लेकिन साथ ही सत्य यह है की गांधीजी ने कांग्रेस को जन आन्दोलन बनाया और जन से जुड़े थे.वे सिर्फ अंग्रेजों की गुलामी से ही भारत को स्वतंत्र नहीं करना चाहते थे बल्कि &#039; जन &#039; को सही आजादी दिलाना चाहते थे .लेकिन कांग्रेस से जुड़े अधिकांस नेता ,जो की जन की आजादी नहीं बल्कि अंग्रेजों को हटा खुद ही उनकी जगह लेना चाहते थे . वे वही लोग थे जो मैकाले की सिक्छा की उपज थे और मार्क्स की परिभाषा में पेटी बुर्जुआ .उन्हें &#039; जन &#039; से सरोकार  नहीं सत्ता से सरोकार था. और नेहरू के नेत्रित्व में ब्राउन साहबों ने बस गोरों की जगह ले ली और देश पहले से ज्यादा गुलाम भी हुआ और उनके नेत्रित्व में सत्ता और भी भ्रष्टाचारी और निरंकुश ही नहीं जनद्रोही भी हुयी .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत ही सार्थक आलेख .लेकिन साथ ही सत्य यह है की गांधीजी ने कांग्रेस को जन आन्दोलन बनाया और जन से जुड़े थे.वे सिर्फ अंग्रेजों की गुलामी से ही भारत को स्वतंत्र नहीं करना चाहते थे बल्कि &#8216; जन &#8216; को सही आजादी दिलाना चाहते थे .लेकिन कांग्रेस से जुड़े अधिकांस नेता ,जो की जन की आजादी नहीं बल्कि अंग्रेजों को हटा खुद ही उनकी जगह लेना चाहते थे . वे वही लोग थे जो मैकाले की सिक्छा की उपज थे और मार्क्स की परिभाषा में पेटी बुर्जुआ .उन्हें &#8216; जन &#8216; से सरोकार  नहीं सत्ता से सरोकार था. और नेहरू के नेत्रित्व में ब्राउन साहबों ने बस गोरों की जगह ले ली और देश पहले से ज्यादा गुलाम भी हुआ और उनके नेत्रित्व में सत्ता और भी भ्रष्टाचारी और निरंकुश ही नहीं जनद्रोही भी हुयी .</p>
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