पता नहीं
कब और कैसे
धूल और धुएं
से ढक गया आसमान
सागर में मिलने से पहले ही
एक बेनाम नदी सूख़ गई
एक मासूम बच्चे पर
छोटी बच्ची के साथ
बलात्कार करने का
आरोप है
स्तब्ध
हूँ
खून के इल्ज़ाम में
गिरफ्तार
बच्चे की ख़बर सुनकर
इस धुंधली सी फ़िज़ा में
सितारों से आगे की
सोच रखनेवाला
एक होनहार छात्र
बम विस्फ़ोट में
मारा गया
घर के सामने वाला
अंतिम ज़मीन का टुकड़ा भी
तब्दील हो गया है
कंक्र्रीट में
डायनामाईट
से उड़ा दिया गया
हरे-भरे से
पहाड़ को
सहमे हुए हैं
जीव-जन्तु
अचानक!
एक मासूम बच्चा
चौंककर
बाहर निकल आता है
ख्वाबों की दुनिया से।
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November 11th, 2009 at 8:18 pm
Bahut hi prasangki kavita hai wartman sandarbh me.
November 10th, 2009 at 11:22 pm
You have shown mirror to society. Nice & Excellent Poem. Keep it up.