सेवोन्मुख प्रगति पथ पर अग्रसर मध्यप्रदेश


भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी के विकास तक निरंतर संगठन की अपनी विशिष्टता के पीछे इसकी कार्यकर्ता आधारित प्रकृति रही है। इससे हमारी पहचान राजनीतिक दल से अधिक राष्ट्रवादी विचार, राष्ट्र समर्पित भावना के विस्तार के आंदोलन के रूप में बनी है। इसकी भूमिका राष्ट्रीय अभ्युदय अनुष्ठान के रूप में परिभाषित हुई है। प्रारंभिक रूप से ही सेवा के संस्कार को संगठन के शृंगार के रूप में आत्मसात किया है। मध्यप्रदेश में राष्ट्रवाद के प्रवर्तन में 1951 के दशक से ही जो बयार बही, उससे शहरी अंचल और ग्रामीण प्रांतर सुरभित हुए हैं और देश में मध्यप्रदेश को एक आदर्श (मॉडल) संगठन के रूप में लोकप्रियता हासिल हुई है। मध्यप्रदेश में संगठन को नेतृत्व प्रदान करने के लिए कार्यकर्ताओं में न तो स्पर्धा हुई और न अभाव दृष्टि गोचर हुआ। कांग्रेस तथा अन्य राजनीतिक दलों और संगठनों में जहां विचारधारा गौण बनी और अवसरवादिता और सत्ता लिप्सा का प्राघान्य हुआ, जनसंघ और भाजपा में परिवार भावना में लोकतंत्रीय भावना से संस्कार जनित उत्तराधिकार मिला। सामान्य कार्यकर्ता को संगठन के नेतृत्व और सत्ता के सूत्र संभालने का गौरव प्राप्त होना यहां आकस्मिकता नहीं सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है। नवम्बर 2006 में पार्टी का नेतृत्व जब नरेन्द्र सिंह को सौंपा गया सर्वसम्मति से हुए निर्णय को स्वीकार करते हुए नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेश के मंत्रिमंडल से तत्काल त्यागपत्र देकर प्रदेश के कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान किया। संगठन के श्रेष्ठि वर्ग के आदेश को शिराधार्य किया। सत्ता और संगठन में नरेन्द्र सिंह तोमर ने संगठन के संवर्धन, जनता की सेवा का पथ चुन कर ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जो आने वाले समय में पथ प्रदर्शन करेगा।

प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर का कार्यकाल वास्तव में अवसर और चुनौतियों, संघर्ष और सेवा का ऐसा संगम है, जिसे पार्टी के कार्यकर्ताओं के परिश्रम, संगठन और सत्ता के समन्वय ने स्मरणीय बना दिया। मुंह में शक्कर और पैरों में चक्कर की उक्ति को उन्होंने चरितार्थ कर दिखाया। विधानसभा के उपचुनाव, विधानसभा के चुनाव, लोकसभा के चुनाव, प्रदेश में नगरीय निकायों के चुनाव और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के बावजूद पार्टी संगठन ने रचनात्मक और संगठनात्मक गतिविधियों की अविरल धारा प्रवाहित की। कई मिथक तोड़े। नये-नये कीर्तिमान गढ़े और सेवा के नये नये अनुष्ठान लेकर सतत जनता से संवाद बनाए रखा। यही कारण था कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार का पांच वर्ष का कार्यकाल सफलता पूर्वक पूर्ण हुआ। पार्टी की पिछली तीन सरकारें अल्प जीवी रही। प्रदेश में दूसरी बार भाजपा शानदार विजय के साथ सत्ता में लौटी और लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया। चुनावी अश्वमेघ का घोड़ा कांग्रेस को नगरीय निकायों के चुनाव और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में भी रौंधता हुआ आगे बढ़ा। तथापि संगठन और कार्यकर्ता न तो आत्ममुग्ध हुए और न आत्मश्लाधा के वशीभूत हुए। पल-पल सेवा संस्कार की सतत यात्रा में संलग्न है। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अजेय और सेवान्मुख होने के साथ सबसे बड़े, व्यापक जनाधार वाली पार्टी बनी है।

नरेन्द्र सिंह तोमर ने संगठन सूत्र संभालते ही हर कार्यकर्ता को काम और हर व्यक्ति को संस्कार देने की रचनात्मक पहल की जिससे प्रदेश स्तर से लेकर जमीनी स्तर तक संवाद और विश्वास का सेतु बना। कार्यकर्ता सत्ता के पूरक बने। सेवोन्मुख कार्यकर्ताओं ने हमेशा सरकार को जनता की नब्ज की जानकारी देकर शासन का अधिक संवेदनशील बनाया। नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रदेश संगठन महामंत्री माखन सिंह चौहान ने कार्यकर्ताओं की प्रतिभा को निखारा और उनकी रचनात्मक ऊर्जा को दिशा दी। लोकतंत्र की बहाली में जिन कार्यकर्ताओं ने मीसाबंदी बन कर अपना सर्वस्व न्यौछावर किया उनका अभिनंदन किया गया। उनके त्याग, तपस्या और पीड़ा का सम्मान कराया गया। लोकनायक जयप्रकाश सम्मान निधि से उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यकर्ताओं को संस्कारित करने के लिए जिलों में अभ्यास वर्ग, प्रशिक्षण शिविर कार्यकर्ता सम्मेलनों का सिलसिला अनवरत जारी रहा। विधानसभा चुनावों की दृष्टि से ये सम्मेलन विधानसभा क्षेत्र स्तर तक सफलतापूर्वक संपन्न हुए। प्रदेश में छब्बीस मोर्चा और प्रकोष्ठों के गठन के साथ समाज के हर वर्ग में पार्टी का विस्तार कर संगठन को सर्वस्पर्शी , सर्वव्यापी बनाया गया। मोर्चा और प्रकोष्ठ जनता के प्रति अपनी जवाबदेही के प्रति तत्पर रहे। केन्द्र सरकार की विफलता को सतत बेनकाब करने में इनकी असरदार भूमिका रही। महंगायी के विरोध में सड़क से संसद तक केन्द्र सरकार की अदूरदर्शी नीतियों का आंदोलनों के माध्यम से पर्दाफाश किया गया। आंदोलनों में जनभागीदारी सुनिश्चित की गयी। प्रदेश में सांसदों और विधायकों का इंदौर में आयोजित अभ्यास वर्ग अत्यंत सफल रहा। प्रदेश के युवकों की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने के लिए अलग अभ्यास वर्ग चित्रकूट के आध्यात्मिक और ग्रामीण परिवेश में संपन्न हुआ, वहीं युवा मोर्चा ने जिले जिले में युवा संसद के सत्र आयोजित कर दोहरा लक्ष्यपूर्ण किया। प्रदेश सरकार की उपलब्धियां जन-जन तक पहुंचायी। युवा नीति पर मंथन हुआ। युवा आंकाक्षा को अभिव्यक्ति मिली। यूपीए की विफलताओं की ओर जनता का ध्यान आकृष्ट किया। असंगठित कामगार प्रकोष्ठ ने प्रदेश के असंगठित मजदूरों को दिये गये राय सरकार के सुरक्षा कवच का लाभ पहुंचाया, वहीं उन्हें अपने अधिकारों से वाकिफ कराया। किसान मोर्चा ने मध्यप्रदेश में किसानी को लाभ का धंधा बनाने की राय सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान और मुख्यमंत्री के सात संकल्पों को क्रियान्वित करने का बीड़ा उठाया। ये सात संकल्प क्रमश: 1. प्रदेश अधोसंरचना विकास। 2. निवेश में वृद्धि से संतुलित विकास। 3. खेती को लाभ का धंधा बनाना। 4. शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं जन-जन तक पहुंचाना। 5. महिला सशक्तीकरण। 6. सुशासन और संसाधनों का विकास और 7. प्रदेश में कानून व्यवस्था को चौकस बनाकर आम आदमी में सुरक्षा का अहसास पैदा करना है। मध्यप्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प को हकीकत में बदलने के लिए कार्यकर्ता मुख्यमंत्री की मध्यप्रदेश बनाओ यात्रा केसाक्षी बन रहे हैं। गांव-गांव में कार्यकर्ता स्वर्णिम मध्यप्रदेश की कल्पना में यथार्थ का रंग भर रहे हैं। प्रदेश सरकार की जनोन्मुखी गतिविधियों की जानकारी आम आदमी तक पहुंचाने के लिए विकास शिविर लगाये गये। विकास यात्राएं निकायी गयी। साथ ही जन-जन तक पहुंचकर उनसे आशीर्वाद लेने और काम के आधार पर समर्थन देने का आह्वान करने के लिए आशीर्वाद रैलियों, यात्राओं का जनपदीय अंचलों तक आयोजन किया गया। इनमें मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर संगठन महामंत्री तक की भागीदारी हुई।

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक 13-14 सितम्बर 2007 में भोपाल में संयोजित करने का गौरव प्राप्त हुआ जिसमें राष्ट्रीय पदाधिकारियों और रायों से आए अतिथि से प्रदेश के कार्यकर्ताओं का जीवंत संवाद हुआ। इसका समापन विशाल जनसभा के रूप में लाल परेड ग्राउंड भोपाल पर हुआ जिसे मानवीय आडवाणी जी, सुषमा स्वराज, डॉ.मुरली मनोहर जोशी, वैकेंया नायडू सहित शीर्ष नेताओं ने संबोधित कर प्रदेश की जनता के उत्साह की भूरि-भूरि सराहना की। सभा में उमड़े जन सैलाब को देखकर अतिथि प्रभावित हुए। प्रदेश में संगठन और सत्ता के समन्वय हेतु अनौपचारिक बैठकों के अलावा अन्य बैठकों के क्रम में विशेष बैठक 3 अक्टूबर 2007 को भोपाल में हुई जो विस्तार पूर्वक चर्चा के साथ संपन्न हुई। विजय संकल्प यात्रा को 6 जनवरी, 2008 में आडवाणीजी ने संबोधित किया। अमरनाथ यात्रा के लिए आवंटित जमीन पर जब रोक लगी और रामसेतु मुद्दा उठा, प्रदेश भर में आंदोलन हुए। इससे प्रदेश का कोना-कोना राष्ट्रवाद की भावना से आप्लावित हुआ। प्रदेश संगठन को अनेकोंवार विधानसभा चुनावों की चुनौती से रू-ब-रू होना पड़ा। पंधाना उप चुनाव में विजयी होने के बाद लॉजी उपचुनाव सहित अन्य उप चुनावों से निपटना पड़ा। सांवेर में पिछड़ गए तो इंदौर में जीत का सेहरा बंधा। तेंदूखेड़ा (नरसिंहपुर) उपचुनाव में पार्टी ने कांग्रेस के कब्जे से सीट छीन कर पार्टी के बढ़ते प्रभाव सरकार की नीतियों के सुफल का परिचय मिला। महिला मोर्चा ने महंगायी के विरोध में ऐतिहासिक मानव शृंखला बनायी, वहीं ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ ने अपना गांव कार्यक्रम हाथ में लेकर गांवों के विकास में नया पृष्ठ जोड़ा। अनुसूचित जाति मोर्चा ने केन्द्र सरकार की तुष्टीकरण की नीति के विरोध में जिले से लेकर दिल्ली तक विरोध का डंका बजाया और धर्मांतरित दलितों को अनुसूचित जाति कोटा में शामिल करने का विरोध किया। अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण के लिए अभियान जारी है। इसमें रंगनाथ मिश्र आयोग पर अंगुली उठायी गयी। अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने गांव-गांव में वन भूमि अधिकार पत्र वितरण में सक्रिय योगदान दिया। अल्पसंख्यक मोर्चा ने सच्चर कमेटी को तुष्टीकरण का भौड़ी मिसाल बताया और कहा कि यह मुसलमानों के स्वाभिमान पर प्रहार है। अल्पसंख्यक मोर्चा की पर्दानशीन महिलाएं भी सड़कों पर उतरी और सच्चर कमेटी का पुतला जलाया। केन्द्र सरकार की मध्यप्रदेश के साथ भेदभावपूर्ण नीतियों के विरोध में लगातार आवाज उठायी गयी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में जहां न्याय यात्रा निकाली, वहीं प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के नेतृत्व में सागर सहित अन्य स्थानों पर प्रभावी अनशन, आंदोलन हुए, जिनमें भारी संख्या में जनता जुटी। नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेश से लेकर दिल्ली तक में केन्द्र सरकार के सौतेले व्यवहार के विरोध में सांसदों, विधायकों के धरना, आंदोलन का नेतृत्व कर जन भावनाओं को प्रति बिंवित किया। बुंदेलखण्ड में पहला मेडीकल कालेज खोला गया। लेकिन मान्यता के लिए फिर नरेन्द्र सिंह तोमर को मेडीकल कौसिंल आफ इंडिया परिसर में धरना पर बैठना पड़ा। प्रदेश में संगठन के संयोजन में कुछ रचनात्मक ऐसे कार्य हुए जिनकी देश भर में चर्चा हुई। पितृ पुरुष कुशाभाऊ ठाकरे प्रशिक्षण संस्थान परिसर की आधारशिला रखी गयी। न्यास के गठन के साथ वरिष्ठ नेता कैलाश जोशी ने परिसर में भव्य भवन के निर्माण का रूपांकन तैयार कर निर्माण का श्रीगणेश कराया। वैकेया नायडू ने नींव रखी। कार्य प्रगति पर है। तीन वर्षों की कालावधि में लगातार प्रशिक्षण का क्रम इस तरह चला कि संगठन मंत्रियों से लेकर स्थानीय इकाई के कार्यकर्ता भी संस्कार संपन्न होने का गौरव प्राप्त कर सके। किसान मोर्चा ने केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों का प्रखर विरोध किया और प्रदेश व्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाया। विधि प्रकोष्ठ ने विधिक साक्षरता अभियान आयोजित करने में सफलता पायी वहीं, आईटी प्रकोष्ठ ने सूचना प्रौघोगिकी का ताना-बाना बुना। भारतीय जनता युवा मोर्चा ने युवा जोड़ो अभियान के साथ नव मतदाता सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित कर जनाधार में वृध्दि की। महिला मोर्चा ने कारवां कार्यक्रम से महिला बहनों को पार्टी के अंचल में लाने का विलक्षण अभियान चलाया जिसका लाभ हुआ। अध्यापक प्रकोष्ठ मंडल स्तर तक अपना संगठन खड़ा करने में सफल हुआ। संचार माध्यमों से बेहतर तालमेल बनाने के लिए प्रदेश के जिला, संभाग मीडिया प्रभारियों की कार्यशाला, प्रशिक्षण और अभ्यास वर्ग में कलमकारों को पार्टी की मूल्य आधारित नीतियों विचार दर्शन की जानकारी दी गयी। भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं का महाकुंभ 25 सितम्बर 2008 को जब जंबुरी मैदान भोपाल में आयोजित किया गया, उसमें उमड़े जनसैलाब ने ही विधानसभा चुनाव परिणाम की इबारत का अहसास करा दिया। मध्यप्रदेश में मतदान केन्द तक गठित समितियों के साथ पालक, संयोजकों के सम्मेलनों ने मतदाताओं से जोड़ा दिया और ऐसा नेटवर्क तैयार हुआ कि प्रदेश का प्रत्येक मतदान केन्द्र दिल्ली में बैठे जिज्ञासु की नजर में आ गया। स्विस बैंकों में जमा काला धन वापस लाने के लिए युवा मोर्चा ने जनमत संग्रह कराया। सहकारिता प्रकोष्ठ ने सहकारी क्षेत्र में साख को आसान बनाने 3 रु. प्रतिशत ब्याज पर किसानों को कर्ज दिलाने का पथ प्रशस्त किया जिससे मुख्यमंत्री के सात सूत्रीय संकल्प को बल मिला। सहकारिता आंदोलन में लोकतंत्र और शुचिता की वापसी की गयी।

प्रदेश में सदस्यता अभियान की सफलता ने अन्य प्रदेशों को चकित किया। आजीवन सहयोग निधि संग्रह में प्रदेश में नया कीर्तिमान बनाया गया। चिकित्सा प्रकोष्ठ ने प्रदेश में प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों के डाक्टरों का महाकुंभ आयोजित कर उन्हें पार्टी की विचारधारा से परिचित कराने में सफलता प्राप्त की। नगर निगम प्रकोष्ठ नगर पालिका प्रकोष्ठ भी पीछे नहीं रहे। प्रदेश में नगरीय निकायों के महापौर, अध्यक्ष, सभापति, उपाध्यक्षों और पार्षदों के महासम्मेलन में प्रदेश के नगरीय विकास का खाका तैयार किया गया। भाजपा संसदीय दल के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शुचिता लाकर नगरीय निकाय को नये क्षितिज पर पहुंचाने का आह्वान किया। नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश में पहली बार अल्पसंख्यक परिवारों में से 82 प्रत्याशी जीत कर पार्षद बने। इनमें अधिकांश पर्दानशीन महिलाएं हैं। नरेन्द्र सिंह तोमर ने उन्हें बधायी देते हुए आशा व्यक्त की कि यही रफ्तार जारी रखी जावेगी और आने वाले दिनों में जारी रही तो विधानसभा परिसर में भी प्रदेश में अच्छी संख्या में अल्पसंख्यक भाई और बहनें दस्तक देंगी और विधायिका में अपना योगदान दर्ज करेगी।

- भरत चंद्र नायक

February 9th, 2010 | Tags: , | Category: राजनीति | Print This Post Print This Post | Email This Post Email This Post | 129 views

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