लेखक परिचय

कनिष्क कश्यप

कनिष्क कश्यप

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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गांधी जयंती पर ब्लागर को नया तोहफ़ा: ” ब्लागप्रहरी” : एक विशेष ब्लाग एग्रीगेटर
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ब्लाग जगत मे जब प्रहार ज्यादा होने लगे और सृजन की प्रक्रिया धीमी हो जाने लगे, तब यह भान हो जाना चाहीये कि वक्त एक बड़े बदलाव का है। वर्तमान समय में ब्लागींग का गीरता स्तर, इसके शुभागमन के समय अनुमानित लक्ष्यों से बहुत दूर धकेलने वाला है। इस दिशा में एक सार्थक पहल हुई है, और उस प्रयास को संज्ञा ” ब्लागप्रहरी” देना सर्वथा प्रेरणात्मक है।

ब्लागप्रहरी का उद्देश्य ब्लाग जगत के दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे विसंगतियों से अलग एक आदर्शस्वरूप ब्लाग मंच मुहैया कराना है।स्वरूप से एक एग्रीगेटर होने के बावज़ूद इसकी कार्य-प्रणाली विस्तृत और नियंत्रित होगी।
(हमे ब्लागप्रहरी को एक एग्रीगेटर के रूप में नहीं बल्की विचार-विमर्श और ब्लागींग के एक सार्थक प्लेटफार्म के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।आपसे निवेदन है कि आप इसका मुल्यांकन किसी एग्रिगेटर से तुलना कर के न करें!)
जैसा कि नाम मात्र से स्पष्ट है, इसका एकमात्र लक्ष्य ब्लाग जगत में एक आदर्श ब्लागींग के मापदंड की स्थापना करना और ब्लागींग जैसे सशक्त, अभिव्यक्ति के हथियार को धारदार बनाये रखना है।

क्या है योजना!

(1) ब्लागप्रहरी एक अत्यन्त आधुनिक और और नियंत्रित ब्लाग एग्रीगेटर होगा। याहां पर चुनिन्दा ब्लाग और लेखकों के लेख हीं प्रकाशित होंगे, जिसका निर्धारण 15 सदस्यीय ब्लागप्रहरी की टीम करेगी। वह टीम आप ब्लागर्स के सुझाव पर आधारित एक परिभाषित व्यवस्था होगी। सर्व-सामान्य के लिये यक केवल पठन और प्रतिक्रिया देने तक सीमित रहेगा। हां, हम लगातार नये ब्लाग शामिल करते रहेंगे और अनुचित सामग्री के प्रकाशन और अमर्यादित भाषा प्रयोग जैसे अन्य निर्धारकों के आधार पर सदस्यता समाप्त करना, अस्थायी प्रतिबंध जैसी तमाम हथियार मौजूद होंगें। यह एक नि:शुल्क जनहित योजना है, और इसका एकमात्र ध्येय
ब्लाग को वैकल्पिक मीडिया के स्वरूप में स्थापित करना है।
ऐसे मापदंड रखने के कारण क्या थे।?
हमारे पास मौजूद अन्य एग्रीगेटर सभी प्रविष्टियों को एक जगह दिखाते हैं। अब एक पाठक को यह चुनना मुश्किल होता है कि क्या पठनीय है और क्या नही। आजकल अनावश्यक विषयों पर मतांध लेख, व्यक्तिगत आक्षेप, आरोप-प्रत्यारोप, अमर्यादित भाषाशैली का प्रयोग कर अपने पोस्ट पर पाठक बुलाने की परंपरा विधमान है। इस बीच कई बार सुसंस्कृत लेख भी नही पढ़े जाते, और एग्रीगेटर के पहले पृष्ठ पर से उपस्थिति खत्म होते हीं उनका सार्वजनिक स्वरूप समाप्त हो जाता है।
क्यूं अलग है ब्लागप्रहरी: यहां प्रविष्टियों का संकलन और प्रकाशन वर्गीकृत होगा और एजेक्स पर आधारित व्यव्स्था उनको लम्बे समय तक दिखाने में सक्षम है। आपके सामने मुख्य पृष्ठ 400 से ज्यादा चिट्ठे दिखाए जा सकते है।

महत्वपूर्ण और विशेष चिट्ठों को फ़िचर पोस्ट कैटेगरी के अंतर्गत दिखाया जायेगा, जिसकी संख्या नियंत्रित है। यह आटोमेटेड स्लाइड इन चिट्ठों को विशेष समय तक चला कर उनकी पठनीयता और प्रासंगिकता बनाए रखेगा। ब्लागप्रहरी ने मुख्य पृष्ठ पर किसी भी चिट्ठों के पसंद-नापसंद जैसा विवरण देना उचित नही समझा
ताकि आप पुर्वाग्रह से ग्रसित हो उनकी ओर न चले जायें। और हालिया प्रकरण (ब्लागवाणी पर विवाद) इस पाठक-लेखक की इस मानसिकता को दर्शाता है) ब्लागवाणी की सेवा निश्चित तौर पर ब्लागजगत के लिए बड़ा ऋण है और अनैतिक तरीके अपनाकर कुछ लोग अपनी तुच्छता का उदाहरण छोड़ जाते हैं।

(2) ब्लागप्रहरी पर किसी भी प्रकाशित सामग्री को आप वहीं पढ़ सकते हैं ( या उस लेखक के निजि ब्लाग पर जा सकते हैं)। शीर्षक पर क्लिक करते हीं, वह पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए वहीं खुल जायेगी और आप अपनी प्रतिक्रिया भी वहीं दर्ज कर सकते हैं।आपको लिंक फालो कर उस व्यक्ति विशेष की साइट पर जाने की आवश्यकता नही है।

इसके पिछे कारण क्या थे?
लिंक फालो कर आप लगभग 2-3 मिनट में उस लेख तक पहूंचते हैं और आपका समय तब सार्थक होता है ,जब आपको कुछ अच्छा पढ़ने को मिले। पर बात जो ज्यादा घातक है कि जिस तरह टी0आर0पी ने मुख्यधारा की मीडिया का बेड़ागर्क कर रखा है, उसी तरह रैंकिग विजेट, ट्रैफिक स्टैट्स काउन्टरों ने ब्लागर्स की मानसिकता पर गहरा और पथभ्रमित करने का प्रभाव डाला है। सामान्यत: पाठक बुलाउ शिर्षक दें कर कुछ लोग अपना पिठ स्टेट्स काउन्टर से थपथपा रहें है। यह तो सर्व विदित है कि ऐसे चोंचले अपनाकर आप अस्थायी लोकप्रियता तो हाशिल कर सकते हैं, पर आपकी वास्त्विक पहचान आपकी कलम और निष्पक्षता है।
क्यू अलग है ब्लागप्रहरी?
ब्लागप्रहरी पर पोस्ट वहीं खुलने की सुविधा होने के कारण आप पोस्ट वहीं पढ़ पाएगें, और कोइ कलमतोड़ू
लेखक इस मंच का उपयोग पाठक बुलाउ निति के सहारे नही कर सकता।
(3) याहां पर छपने वाले पोस्ट पर पर 15 ब्लागप्रहरियों की नज़र होगी। आप अपने पोस्ट के प्रति उतरदायी होंगे और किसी भी तथ्य या प्रसंग का उल्लेख करने पर आपको उसकी मौलिकता और सच्चाई का पता होना
चाहिए। किसी प्रहरी द्वारा किसी पहलू पर संबधित तथ्य का स्त्रोत मांगे जाने पर आपको उसको सामने रखना होगा। अगर आप अपने तथ्य के प्रति इमानदार नही पाए गये तो आपको सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ेगी।
साफ शब्दों में कहे तो वह शेअर तो आपने सुना हीं होगा:
आपका मंच है आपको रोका किसने, अपने पोखर को समन्दर कहिए…वाला फंडे पर नकेल लगेगी।
इससे आपकी और पूरे ब्लाग जगत की विस्वसनीयता बढ़ेगी और आपकी लेखनी भी अब जवाबदेह होने के कारण ज्यादा पैनी होगी।

(4)विशेष प्रहरी के तौर पर कई गणमान्य और वरिष्ठतम साहित्यिक, पत्रकार और बुद्धिजीवी शामिल होंगे जो यदा-कदा अपने शामिल होने का अहसास आपको कराते रहेंगे और आपको अहसास नही होने देंगे की आपने उनकी प्रोफाइल लगा कर कोई अहसान किया है। ऐसे कई लोगों ने अभी तक अहसान कर दिया है, और कई का अहसान लेना बचा है। 🙂
इसके फायदे:—-इससे ब्लागजगत को हम वैकल्पिक मीडिया के रूप में स्थापित कर पाएंगे। यह स्पष्ट है कि
अगर कोई विशेष व्यक्तित्व शायद हीं हम ब्लागर्स को पढ़ने की हिम्मत जुटा पाता है, और अगर ब्लागर भी सामान्य कद का हो, तो उसके पास जाने का कोई विकल्प नहीं। अगर वह किसी एग्रिगेटर पर जाता है, तो जीवन में ब्लाग पढ़ने की ग़लती वह दोबारा नही करेगा, क्योंकि शायद एक सौ पोस्ट के बाद एक पोस्ट पठनीय होती है। पर ब्लागप्रहरी विशिष्ट एग्रीगेटर है जो एक लेखक को पाठक के तौर पर Filtered posts,
monitered exposure and guaranteed readership देता है।
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हम खुद को ऐसे किसी भी तरह की परिभाषा स्थापित करने में खुद को नहीं उलझाना चाहेंगें, कि अच्छा या बुरा ब्लागर कौन है या उसके क्या परिमाण हैं। पर यह तो तय है कि कुछ अच्छे ब्लागर्स हैं जो सर्वमान्य हैं। ऐसे हीं ब्लागर्स को साथ लेकर यह प्रयास चल पड़ा है एक सुनहला सपना को पूरा करने।
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और क्या विशेष है? ब्लागप्रहरी में—–
(1) प्रतिदिन एक प्रविष्टि या चर्चाघर का निष्कर्ष सभी राष्टीय समाचार पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादकों के पास स-नाम भेज दी जायेगी। और उनसे यह अपेक्षा होगी कि वह इनको विशेष स्थान दे कर प्रकाशित करें। इस सम्बन्ध में बड़ी सफलता मिली है और भविष्य में और पत्र- पत्रिकाएं हमसे जुड़ जाएगें।

(2) आनलाइन रेडियो परिचर्चा का आयोजन पाक्षिक अन्तराल पर किया जायेगा। जिसके लिये स्टूडियो
का निर्माण हो गया है। भविष्य मे ब्लागप्रहरी हर रोज ब्लागसमाचार वाचन की भी योजना पर अमल करेगा।
(3)एक परिवार की तरह ब्लागप्रहरी की टीम ब्लागजगत को वैकल्पिक मीडिया के रूप मे स्थापित कर
अंधे और डूबाऊ मुख्यधारा के सामने एक आदर्श के रूप मे स्थापित करने के लिए वचनबद्ध है।

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कृपया इस पोस्ट को अपने ब्लाग पर लगाएं ।
अपने फ़ालोवर और लेखकों (अगर आपका ब्लाग सामुदायिक है) तथा अन्य ब्लाग मित्रों के मध्य इसी रूप में
भेज दें। उनसे यह आग्रह करें कि वह स्वयं के ब्लाग पर यह पोस्ट लगाने के साथ इसे आगे भेज दें। यह क्रम बना रहे ताकि सब आगाह हो जाएं…”अब आ गया है…ब्लागप्रहरी’!!!!

कनिष्क कश्यप
सम्पर्क +91-9313294888
ईमेल- greatkanishka@gmail.com
आपके मध्य रहा ” कबीरा खड़ा बाज़ार में” के साथ। पर कबीरा के पांव खड़े-खड़े दु:ख गये तो वह अब बोला है।
कबीर अब चुप नही बैठेगा वह बोलेगा, अपनी आवाज और गूंज जाएगी मुख्यधारा तक ” जागते रहो”
http://www.blogprahari.com

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