लेखक परिचय

अशोक बजाज

अशोक बजाज

श्री अशोक बजाज उम्र 54 वर्ष , रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से एम.ए. (अर्थशास्त्र) की डिग्री। 1 अप्रेल 2005 से मार्च 2010 तक जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष पद का निर्वहन। सहकारी संस्थाओं एंव संगठनात्मक कार्यो का लम्बा अनुभव। फोटोग्राफी, पत्रकारिता एंव लेखन के कार्यो में रूचि। पहला लेख सन् 1981 में “धान का समर्थन मूल्य और उत्पादन लागत” शीर्षक से दैनिक युगधर्म रायपुर से प्रकाशित । वर्तमान पता-सिविल लाईन रायपुर ( छ. ग.)। ई-मेल - ashokbajaj5969@yahoo.com, ashokbajaj99.blogspot.com

Posted On by &filed under विविधा.


अशोक बजाज

एक तीर से कई निशान.

अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग क्या छेड़ा पूरा भारत उनके पीछे खड़ा हो गया . देश में भ्रष्टाचार के अलावा और कई ज्वलंत मुद्दे है जिससे देश की आत्मा बेचैन है जैसे आतंकवाद , नक्सलवाद , महंगाई , सूखा , बाढ़ इत्यादि . इसके अलावा अनेक भावनात्मक मुद्दे भी है जैसे संप्रदायवाद ,जातिवाद ,अलगाववाद , भाषावाद एवं क्षेत्रवाद जिससे पूरा देश बंटा हुआ प्रतीत होता है . छद्म राजनीति के कारण दिनोंदिन ये समस्या और गहरी होती जा रही है . अनेक राजनीतिज्ञों एवं राजनीतिक दलों ने अपने फायदे के लिए समय-समय पर इन मुद्दों को उभार कर देश की समस्या बढाई ही है . पहले यह माना जाता था कि अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण ये समस्या उत्पन्न होती है लेकिन अब तो औसत आदमी शिक्षित हो गया है , शिक्षा की लौ लगभग हर घर के आँगन तक पहुँच चुकी है . लोग साक्षर ना भी हो लेकिन रेडियो , टी.व्ही. और अन्य संचार माध्यमों से तो ज्ञान प्राप्त कर ही रहें है फिर भी देश में संप्रदायवाद ,जातिवाद ,अलगाववाद , भाषावाद , एवं क्षेत्रवाद की समस्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है .

अन्ना हजारे के आन्दोलन ने एक तीर से कई निशान मारे है ; यह आन्दोलन जन लोकपाल बिल संसद में पास कराने व भ्रष्टाचार समाप्त करने में सफल हो या ना हो लेकिन देश की जनता को एक सूत्र में बांधने में जरुर सफल हुआ है . कश्मीर से कन्याकुमारी तक तथा असम से गोहाटी तक आज जन ज्वार उबल रहा है . बच्चे , बूढ़े ,जवान यहाँ तक कि महिलाएं भी स्व-स्फूर्त इस आन्दोलन का हिस्सा बन चुकीं है . धर्म-संप्रदाय , जात-पात , वर्ग भेद को भुला कर समूचा देश इस आन्दोलन में जुड़ गया है . इस आन्दोलन ने देश में भावनात्मक एकता कायम करने का मिशाल कायम किया है . यह भावनात्मक एकता देश की मूल संस्कृति है तथा देश की अमूल्य निधि भी . इसे केवल एक समस्या विशेष के निदान तक सीमित रखने के बजाय इसे स्थाईत्व प्रदान करने की जरुरत है . यदि हम इसे स्थिर रखने में सफल हो गए तो देश की अनेक समस्याओं से हमें स्वतः निज़ात मिल जायेगी .

Leave a Reply

2 Comments on "एक आन्दोलन जिसने देश में भावनात्मक एकता कायम की"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
sunil patel
Guest

वाकई यह एक पूर्ण आन्दोलन है जिसने पुरे हिंदुस्तान को भावनात्मक रूप से एक कर दिया. अनेकता में एकता.

Anil Gupta,Meerut,India
Guest
Anil Gupta,Meerut,India
निसंदेह अन्नाजी के इस आन्दोलन ने पुरे देश को नींद से जगा दिया है. जो युवा पीढ़ी हर समस्या को हवा में उड़ा देती रही आज अन्ना के आन्दोलन में न केवल पूरे जोश से लगी है बल्कि उनके जोश से प्रेरणा लेकर किशोर और बालक भी मोहल्लो में “भारत माता की जय” और “वन्दे मातरम” के नारे लगाकर देश के वातावरण को उसी प्रकार का बना रहे हैं जैसा केवल पंद्रह अगस्त और छबीस जनवरी को कहीं कहीं देखने में आता था. लोगों का उत्साह एक नया इतिहास रच रहा है. लेकिन कुछ तबके है “शर्म जिनको मगर नहीं… Read more »
wpDiscuz