लेखक परिचय

कुमार विमल

कुमार विमल

पीएचडी छात्र ( भारतीय प्रोद्योगकी संस्थान दिल्ली ) अनुसन्धान प्रशिक्षु ( रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन )

Posted On by &filed under कविता, साहित्‍य.


oldहाँ , एक पुत्र आज गावँ छोड़ रहा था,

भविष्य की तलाश में शहर की ओर दौड़ रहा था ,

और पिता पुत्र की आँखों में भाग्योदय देख रहा था ,

हाँ ! एक पुत्र आज गावँ छोड़ रहा था ।

माँ का आशीर्वाद, पिता का प्यार

अपनो का अरमान, छोटो का सम्मान

सब उसको प्राप्त हो रहा था,

हाँ एक पुत्र आज गाँव छोड़ रहा था ।

गाँव की पगडंडिया, वह आम का वृक्ष,

वह नदी, वह खेत -खलिहान,

सब उससे बोल रहे थे,

अपनी यादो की तस्वीरे उसके दिल में छोड़ रहे थे।

अपनो की अरमानो , आशीर्वादो को ले वह पुत्र चल रहा था,

वह चलता …..

स्वपनों की बराते चलती, दिल की जज्बाते चलती,

यादो की तलवारे चलती ,

गाँव की गालियाँ चलती,

फुलो की बगियाँ चलती ,

वह विक्षोभ वह व्याकुल मन,

सब कुछ संग चल रहा था भविष्य और वर्तमान में एक

अजीब दव्न्द चल रहा था,

हाँ एक पुत्र

आज गाँव छोड़ रहा था ……

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz