लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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शादाब जफर शादाब

देश में हर तरफ न्यू ईयर कैसे सेलिब्रेट किया जाए इस सब की प्लानिंग की जा रही है। न्यू इयर में पैसे की बारिश हो जाये और आने वाले साल में पूरे साल पैसा बरसता रहे देश के कुछ तिकडमबाज आज इस गुणा भाग में लगे है। इस सब के लिये फिल्म स्टार और क्रिकेट स्टार बुक किये जा रहें है। न्यू इयर पार्टी में ठुमका लगाने के लिये जहा शाहरूख खान का रेट चार करोड़ निकला है और शाहरुख खान का खुद ये कहना है कि उन्हे अगर सही पैसा मिले तो वह प्राईवेट न्यू ईयर पार्टियों में लोगो को एंटरटेन करना पसंद करेगे। जब कि इसी मुद्दे पर कैटरीना कैफ ने साफ मना कर दिया, एक तिकड़म बाज ने जब इस न्यू इयर पार्टी के लिये कैटरीना को सिर्फ तीस मिनट के प्रोग्राम के दो करोड़ रूपये देने का आफर दिया तो कैट ने ये कहकर मना कर दिया की उन्हे चाहे दो करोड़ का आफर आये या चार करोड़ का वो किसी भी प्राईवेट पार्टी में ठुमका नही लगायेगी।

सब से पहले तो ये न्यू ईयर की प्रथा ही गलत है। क्यो कि हमारे देश और हमारे देश की संस्कृति से इस का दूर दूर का भी कोई मतलब वास्ता नही। दूसरा सवाल ये उठता है कि देश में आज भी करोडो परिवार ऐसे है जो रोज बीस रूपये कमाकर अपना और अपने परिवार का पेट भरते है। एक पतली चादर में सर्दी की ठंड़ी रात गुजारते है, हजारो लाखो परिवार ऐसे है जो एक लिहाफ में अपने तीन तीन चार चार बच्चो को सुलाने के बाद खुद टाट या बोरी का चीथड़ा ओढकर अपनी राते गुजारते है। खुद मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री के उन कलाकारो की आज हालत बद से बदतर है जो कल तक बालीवुड के चमकते सितारे थे। भूख, बुढापे, गरीबी के कारण आज इन लोगो को दो वक्त की रोटी के भी लाले पडे है। मीडिया के द्वारा पिछले दिनो एक खबर आई थी की मशहूर चरित्र अभिनेता के पास आज इलाज कराने तक के पैसे नही वही अभी हम इस बात को भी नही भूले कि अपने जमाने की मशहूर अदाकारा ललिता पवार का आखिरी वक्त किस तरह बीता रोटी की बात तो बहुत दूर की आखिरी समय में किसी ने उन के मुंह में पानी तक नही डाला। क्यो शाहरूख या अन्य फिल्मी कलाकार बूढे हो चुके अपने पुराने प्रेरणास्रोत कलाकारो के लिये स्टेज शो के द्वारा चैरिटी प्रोग्राम नही करते। दरअसल जब से शाहरुख खान, प्रिति जिंटा और शिल्पा शेठी जैसी फिल्मी हस्तियो ने सुनहरे पर्द से बेतहाशा पैसा बटोरने के बाद क्रिकेट की दुनिया को भी मुनाफा कमाने वाली दुनिया बनाया है। लोगो के पैसा कमाने के नजरिये ही बदल गये। पिछले दिनो देश में काम कर रही लाखो एनजीओ की चर्चा हुई, जिस के बाद कई चौकाने वाले तथ्य सामने आये थें। देश के फिल्म और क्रिकेट स्टारो पर हम लोग बेतहाशा पैसे खर्च करते है। सलमान, आमिर, शाहरुख, सचिन, युवराज, सहवाग, रित्रिक, अमिताब बच्चन, अभिषेक बच्चन ये सब के सब बस पैसा बटोरने में लगे है। विज्ञापन, स्टेज शो, टीवी शो, प्राईवेट पार्टिया फिल्मे सीरियलो से इन को करोडो रूपये मिल रहे है। लेकिन ये लोग कितना पैसा देश हित और देश की कल्याणकारी योजनाओ में खर्च करते है मुझे नही पता। वैसे कभी इन के द्वारा ऐसे किसी कल्याणकारी कार्यों की चर्चा भी सुनने को नही मिलती। हमारे इन फिल्मी सितारो को अमेरिका और ब्रिटेन की फिल्मी और क्रिकेट खिलाडियो से सबक लेना चाहिये जहां हर सेलिब्रिटी किसी न किसी दान संस्था से जुडा़ होता है, और अपनी फिल्मो, स्टेज शो, क्रिकेट मैचो से भारी धन दान संस्थाओ के लिये चैरिटी कर जुटा लेते है जो देश के गरीब दबे कुचले लोगो पर पूरी ईमानदरी से खर्च किया जाता है।

हमारे देश में करोडो अरबो रूपया हर साल न्यू ईयर पार्टियो के नाम पर खर्च कर दिया जाता है। शराब, डॉस, मौज मस्ती, क्रिकेट और टीवी व फिल्मी हस्तियो पर खर्च कर दिया जाता है। जाने क्यो मुझे ये बात हर साल कचोटती है कि क्या हम और आप जैसे आम लोगो को कभी ये सुध आयेगी कि ये फिल्मी सितारे हमारी जेबे तरह तरह के वाहीयात रस्मो त्यौहारो के नाम पर खाली करवाते है, बाजारी और पश्चिमी संस्कृति इस में इन की मदद करती है और फिर उसी पैसे के बल पर और ज्यादा बाजारी चींजे और विदेशी संस्कृति हम पर थेप दी जाती है। आधुनिकता और फैशन के नाम पर हमारे देश के नौजवान लड़के और लडकिया उन के पीछे पीछे भागते चले जाते है। सारी सारी रात ऊॅचे संगीत पर होटलो, रेस्तरा, और आलीशान पाश इलाको में बाकायदा कोठिया बुक की जाती है, जहॉ शराब, शबाब का नंगा नाच होता है भारतीय संस्कृति, भारतीय सभ्यता, भारतीय नारी की मर्यादा का विदेशी संस्कृति, विदेशी सभ्यता के हाथो चीर हरण होता है पर हम सब खमोशी के साथ आंखो पर नये समाज, नई सभ्यता, नई संस्कृति का चश्मा लगाकर देखते है और खुश होते है क्यो?। शाहरुख खान को पाकिस्तानी खिलाडियो की चिंता है मगर उन करोड़ो गरीब लोगो की चिता नही जो मुम्बई मै हर रोज़ रोटी के एक निवाले को तरसते है। न जाने कितने ऐसे लोग है जो बिना दवा बिना इलाज के रोज मुम्बई सहित देश के तमाम फुटपाथो पर दम तोड़ देते है ऐसे न जाने कितने परिवार है जिन के जवान बेटे देश की सरहद पर देश की रक्षा करते हुए शहीद हो जाते है इन लोगो का कोई आसरा कोई सहारा नही होता, ऐसे लाखो करोडो बच्चे है जो पढना चाहते है पर उन के पास स्कूल फीस नही क्या हमारे देश के सेलिबिटी ऐसे दस दस परिवारो को गोद नही ले सकते। वास्तब में बहुत दुख होता है आज हम पैसा कमाने के चक्कर में अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता भूल चुके है, वो संस्कृति की मूल को और मिटाने पर तूले है जो विश्व में सर्वश्रेष्ट है। आखिर इस में इन लागो का भी कोई दोष नही दरअसल आज देश में चारो ओर महगाई के कारण बवाल मचा है हमारे बच्चे आधा पेट खाकर गुजर बसर कर रहे है पर देश के जिम्मेदार लोग हमारे संसद मै भेजे हमारे जनप्रतिनिधि संसद भवन में आराम से बारह रूपये पचास पैसे में शाकाहारी और बाईस रूपये में मांसाहारी भरपेट खाकर अपनी मोटी मोटी तांदो पर हाथ फेर रहे है गरीब की थाली में चाहे दाल अस्सी रूपये किलो की हो या सिर्फ एक मिर्च और प्याज हो इस बात से इन्हे कोई मतलब नही इन की थाली तो दही, चावल, वेज पुलाव, चिकन बिरयानी, फिश करी, चिकन करी, चिकन मसाला, बटर चिकन, खीर, फ्रूट केक और फ्रूट सलाद से भरी है। सरकार को पॉच साल में पेट्रोल, एलपीजी और करोसिन पर बार बार सबसिडी का ध्यान आता है पर संसद में पिकनिक मनाते इन सांसदो की इस थाली पर कभी ध्यान नही जाता कि जनता के टैक्स से जमा किया कितना पैसा इन सांसदो की थाली पर सरकार को देना पडता है।

शाहरूख खान सहित देश के तमाम लोगो को इस बात का ध्यान रखना चाहिये की वो भी इसी भारत, इसी देश की संस्कृति और सभयता का एक हिस्सा है। अमिताब बच्चन जी ने बेधडक एक मैगजीन के करोडो रूपये के आफर को ये कह कर ठुकरा दिया की वो अपनी पोती की तस्वीर नही बेचेगे। कैटरीना ने साफ मना कर दिया कि उन्हे चाहे दो करोड मिले या चार करोड वो किसी भी प्राईवेट न्यू इयर पार्टी में ठुमका नही लगायेगी। पर आप चार करोड की चमक के आगे अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति क्यो भूल गये। धन्य है देश के वो लोग भी जो एक कलाकार को एक ठुमके के चार करोड़ तो दे सकते है पर एक गरीब को चार घंटे तक गिडगिडाने के बाद भी चार पैसे नही दे पाते।

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4 Comments on "एक ठुमके के चार करोड़, गरीब को चार पैसे नही"

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SALMAN SHOKAT
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शादाब जी दुनिया पैसे की तरफ भाग रही है पैसा ही आज के नये जमाने का भगवान है पर आप का कहना भी सही है हमे गरीबो का ध्यान रख्ना चाहिये। वरना फिर हम मैं और जानवरो मै क्या फर्क रह जायेगा जो कूडी पर पडे खाने के लिये एक दूसरे से लडते है एक दूसरे को मारते है। हमे अल्लाह ने इन्सान बनाया इस नाते हमे अपने से नीचे वालो का ध्यान रखना होगा तभी हम इंसान कहलाने के लायक बनते है। आशा करता हॅू शाहरूख जी अगर आप के इस लेख को पढेगे तो जरूर सबक लेगे।

DANISH ANSARI
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शादाब भाई आप का कहना एकदम सही है आज हमारे सलिब्रिटीज पैसे की तरफ जिस तरह से भाग रहे है वो सही नही है। शाहरूख हो या सलमान इन लोगो को समाज सेवा भी करनी चाहिये। पर अफसोस ये लोग सरकार का टैक्स के रूप मैं इतना इतना रूपया दबाए रहते है कि अगर ये टैक्स का पैसा ये लोग सही सही समय पर जमा करे तो देश और गरीबो के काम आये पर अफसोस ऐसा नही होता।

ABHIVIYAKTI
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शादाब जफर जी वास्तव मैं आप के द्वारा लिखा गया लेख एक ‘ठुमके के चार करोड, और गरीब को चार पैसे नही’ आज के हालात और हमारे आज के समाज पर बढिया तंज है। हम आज जिस समाज मैं जी रहे है उस मैं गरीब पता नही कहा गया हमारी संवेदनाए क्यो मरती जा रही है पता नही चल पा रहा है। पुराने जमाने मैं सेठ साहूकार, गरीबो के लिये प्याऊ लगवाते थे जाडो के दिनो मैं चौराहो पर लकडी के अलाव जलवाये जाते थे। मुसाफिरो के लिये धर्मशालाओ का निर्माण किया जाता था। पर आज का इंसान सिर्फ और… Read more »
ram naresh gupta
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aaj के समय में गरीब का मरना हे ,सब पैसे वाले के खेल हे आमिर को सब पसंद करते हे ,आम आदमी तो ………,….

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