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क्या आपने सैयद अली शाह गिलानी का नाम सुना है ?
हाँ ! वो ही कश्मीर अवाम के महान नेता ….
गत माह केन्द्रीय प्रतिनिधिमंडल ने जिनके घर जाकर कश्मीर के साथ हो रहे अन्याय के लिये अफ़सोस जाहिर किया था…

कृपया  ३ मिनट निकालकर इनका यह एक विडियो देखिये,



और आप स्वयं बताइए कि ये जनाब बात करने लायक है  ?

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11 Comments on "एक विडियो : क्‍या ये जनाब बात करने लायक है ?"

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sunil patel
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एक व्यक्ति का नाम किसी की डायरी में मिलता है और दूसरी पार्टी के लोगो को वोह आतंकवादी लगने लगता है, और एक तरफ एक व्यक्ति खुले आम पाकिस्तान का नाम ले रहा है वोह भी भारत में बठकर. अभी तक तिहाड़ जेल में बिना मुकदमा नहीं भेजा गया है वाकई शर्म, बेहद अफ़सोस जनक है.

श्रीराम तिवारी
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श्री राजेश कपूर जी सहमत हूँ ,घुमा फिराकर अनर्गल टिप्पणी करने के बजाय ठोस बात करो .सत्य को स्वीकार करो ,सत्य ये है की जो शख्स भारत के संविधान में विश्वास नहीं करता -जिस पत्तल में खाता उसी में छेद करे वह देशद्रोही है .किसी का नाम लेना जरुरी नहीं जो इन्टरनेट का user है और इतनी समझ नहीं की कोंन देशभक्त और कौन देशद्रोही है तो फिर =इस विमर्श का फलितार्थ क्या ?

आर. सिंह
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सम्पादकजी, पता नहीं हमलोगों तक यह आवाज पंहुचा कर आपने अच्छा किया या बुरा,पर मुझे तो यह आवाज सुनकर बुरा ही लगा.मैं तो गिलानी को देशद्रोही भी नहीं समझता. मैं तो उसे पाकिस्तान का एक कठपुतली मात्र मानता हूँ.ऐसे वह भारत का अन्न खाता है और पाकिस्तानी आकाओं के धागे में बंधा हुआ है अतः कमसे कम नमकहराम तो वह है ही.ऐसे भारत अनेक प्रत्यक्ष या परोक्ष देश द्रोहियों को आश्रय दिए हुए है.गिलानी भी उन्ही में से एक कहा जा सकता है.हम इन देशद्रोहियों से बात करने के लिए वाध्य है यह हमारी कमजोरी है.मैं सरकार को दोष नहीं… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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विद्वान तीप्पनिकार -लेखक मित्रों से आग्रह है की देशद्रोही को सीधे- सीधे देशद्रोही कहने में कजूसी क्यों ? उनके सहायक, समर्थक भी तो देश के स्पष्ट दुश्मन हैं न ? पंकज जी ने ठीक ही तो कहा है की इन जैसों के विरुद्ध कैसी भी असंसदीय भाषा उचित है. अरे जो हमारे अस्तित्व को समाप्त करने में पूरी ढिठाई के साथ लगे हैं, उनके प्रति लिहाज कैसी !

डॉ. राजेश कपूर
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आँखें खोलादेने वाले इस क्लिप के लिए सम्पादक महोदय का शतशः अभिनन्दन. आप सचमुच देश के नव जागरण के महान कार्य में अविस्मरनीय योगदान करने वाले व्यक्ती की रूप में उसी प्रकार याद किये जायेंगे. आपके लेखकों की टीम भी प्रशंसनीय बनाती जा रही है. एक बात अनेकों बार कह चुका हूँ जो दोहराना प्रासंगिक होगा——– ” अमानवीय साम्राज्यवादी ताकतों का सबसे बड़ा हथियार है की सच को जानने न दो.इस रावन को मारने का राम बाण है – सच को जानो और सब को बतलादो” बस इतने मात्र से ये रावन मर जाएगा. – – –आजतक (पिछले २०० साल… Read more »
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