लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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-मृत्युंजय दीक्षित-

yog
संयुक्तराष्ट्र महासभा द्वारा 21 जून को योग दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित होने के बाद जैसे- जैसे 21 जून की तारीख पास आती जा रही है योग के प्रति जनसमुदाय में उत्सुकता जाग्रत होती जारही है। आगामी 21 जून को पूरे विश्व में एक साथ लाखों- करोड़ों लोग योग करने की तैयारी में जुट गये हैं। योग का प्रचार और प्रसार पूरेे जोर -शोर से हो रहा है। भारत में भी कई धार्मिक , सामाजिक और राजनैतिक संगठन भी तैयारी में लग गये हैं। योग षरीर व मन को स्वस्थ रखने का एक अदभुत विज्ञान है। योग से षरीर फिट रहता है। योग की महिमा का वर्णन भारतीय ग्रंथों में विस्तार से मिलता है। महासभा द्वारा योग दिवस मनाने के निर्णय के पहले से ही विश्व के अधिकांश देशों में योग की लोकप्रियता चरमसीमा तक पहुंच रही थी। लेकिन वैष्विक मान्यता दिलवाने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका अग्रणी व सराहनीय रही है। भारत में पहली बार राजधानी दिल्ली के राजपथ में योग समारोह का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह का सभी टी. वी. चैनलों से उसी प्रकार से प्रसारण किया जायेगा जैसा कि गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस समारोहों का किया जाता है। केंद्र सरकार के कई मंत्री विदेशों में विशेष समारोहों में शामिल होंगे।

योग दिवस को संयुक्तराष्ट्र से मान्यता मिली है। विश्व के 177 देषों व 46 मुस्लिम राष्ट्रों ने योग दिवस मनाने का निर्णय लिया है। यूरोपियन देषों व अरब देषों में योग दिवस मनाने की जोरशोर से तैयारियां चल रही हैं। आज हालात यह हो गये हैं कि लगभग पूरे विश्व का मीडिया जगत व भारत के सभी समाचार पत्र व पत्रिकायें योग पर विशेष लेख प्रकाशित कर रहे हैं। प्रत्येक दिन पत्र- पत्रिकाओं में एक योग सिखाया जा रहा है। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी अपने एकांउट पर लोगों को एक योग की जानकारी रोज दे रहे हैं। योग एक ऐसी चीज है जो लोगों को आपस में जोड़ता है, तोड़ता नहीं है। योग मन की शांति का एक अनुपम साधन है। योग से एकांतवास की उबासी दूर हो जाती है। अकेलापन का तनाव मिटाता है। योग यदि बचपन से ही सिखाया जाये तो बालक व बालिकाओं का भविष्य शारीरिक रूप से बेहद उज्जवल हो जाता है।

लेकिन भारत के लिए यह एक बात बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व दुखद है कि कुछ लोग इसमें भी अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने से बाज नहीं आ रहे है। भारत के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने योग दिवस का विरोध करने का निर्णय लिया है। वह अपने आप को सुपर सेकुलर साबित करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस शासित राज्यों ने योग से दूरी बना ली है। वहीे योग को लेकर पूरे देशभर से तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता अपने बयानों के माध्यम से अपनी विद्वता का परिचय दे रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती का ताजा बयान आया है कि योग के बहाने भाजपा साम्प्रदायिकता फैलाने का प्रयास कर रही है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार व पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव सरीखे नेता योग पर अजग- गजब बयान दे रहे हैं।

विगत दिनों कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी ने कहाकि पीएम मोदी जनता का ध्यान भटकाने के लिए ही योग का सहारा ले रहे हैं। उप्र में सपा मुखिया के भरोसेमंद मंत्री आजम खान योग को लेकर रोज एक नयी बात कह रहे हैं। एक प्रकार से भारत के अंदर योग को लेकर वंषवादी व तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले लोग ही योग को भगवाकरण व साम्प्रदायिक करार दे रहे हैं। इन सभी दलों कीे जमीन अपने परम्परागत वोटबैंकों से खिसकती जा रही है। यह लोग येन- केन प्रकारेण अपने वोटबैंक को वापस लाने के लिए तड़प रहे हैं। इसीलिए यह लोग झूठ का सहारा लेकर योग के माध्यम से पीएम मोदी और भाजपा के प्रति देष के अल्पसंख्यक समाज और अन्य कमजोर वर्गो को भड़काने में लग गये हैं। महासभा के महासचिव बान की मून ने भी स्पष्ट किया है कि योग धार्मिक भेदभाव नहीं करता है। मुस्लिम समुदाय केे तथाकथित नेताओं ने सूर्यनमस्कार को लेकर भी अपनी गहरी आपत्ति प्रकट की है। कई संगठनों की ओर से यह प्रचार किया गया कि 21 जून को सभी सरकारी कर्मचारियों व स्कूलों में अवकाष रदद कर दिया गया है और सभी को यो के साथ ही सूर्यनमस्कार करना है । इस झूठ का मुस्लिम व चर्च प्रेरित संगठनों की ओर से खूब हल्ला मचाया गया। वहीं बाद मेें सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा कि योग का कार्यक्रम पूरी तरह से स्वैच्छिक है।

अब तो देष के कई मुस्लिम संगठन योेग का समर्थन कर रहे है। विगत दिनों नई दिल्ली में आयोजित बाबा रामदेव के षिविर मेें एक मुस्लिम धर्मगुरू को भी मंच साझा करते देखा गया। योग दिवस को लेकर मचे हंगामे के बीच मुस्लिमों की बड़ी संस्था दारूल उलूम भी उक्त दिवस के समर्थन में आ गयी है । यूपी के सहारनपुर जिले के देवबंद में संस्था के धर्मगुरूओं ने कहाकि योग व्यायाम का एक हिस्सा है। इसे किसी धर्म के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिये। उसकी ओर से ऐसा कोई फतवा नहीं जारी किया गया है जो मुस्लिमों को योग करने से रोकता हो।मुस्लिमों के एक दल ने केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीपद नाईक से मुलाकात की और योग दिवस को पूरा समर्थन देने का ऐलान भी कर दिया। इस मुलाकात के दौरान नाई्रक ने कहाकि योग का किसी एकधर्म से कोई सम्बंध नहीे है। नमाज मेेें भी योग के विभिन्न आसन का उपयोग होता है। मुसलमान अल्लाह का भी नाम ले सकते हैं। देवबंद स्थित दारून उलूम ने भी साफ कर दिया था कि इसे हिंदुत्व के साथ जोड़कर इसका विरोध करना उचित नहीं है। देश के तथाकथित मूुस्लिम वोटबैंक के प्रेमी दल आज इस बात को लेकर बेहद आष्चर्यचकित हो रहे हैं कि योग के बहाने मुस्लिम भाजपा व मोदी के कहीं और अधिक करीब तो नहीं आते जा रहे है। इसीलिये राहुल गांधी व मायावती सरीखे नेताओं के पेट में दर्द होने लग गया है।

योग भारतीय संस्कृति व सभ्यता का एक प्रमुख आधार बिंदु व जीवनषैली है। योग को सही तरीक से अपनाकर आज के प्रदूषणयुक्त वातावरण में स्वस्थ रहा जा सकता है। योग तन और मन को स्फूर्ति प्रदान करता है। योग करने से दिमाग की गंदगी साफ हो जाती है। जिन दलों व नेताओं के तन और मन में जहरीली गंदगी भरी है वही लोग योग को साम्प्रदायिक करार दे रहे हैं व भगवाकरण करके एक बार फिर हिंदू जनमानस व भारतीय संस्कृति का अपमान कर रहे हैं। जो दल बार- बार संस्कृत,गाय,गीता व योग तथा गंगा की सफाई का अपमान करेंगे वे लोग स्वतः ही भारतीय राजनीति के भविष्य के परिदृष्य से पूरी तरह से साफ हो जायेंगे।
विगत दिनों केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हिंदू षिक्षा बोर्ड के एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए योग के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहाकि अगर यह भगवाकरण है तो तो फिर इसे अपनाने वाले सभी देश भगवा हो गये। ईरानी ने जोर देकर कहाकि, ”यह भारत में ही संभव है कि हम अपनी परम्पराओं ,उपलब्धियों और विरासत को ऐसी घृणा से देखें।“
आज भारत में योग का सेकुलर दलों द्वारा किया जा रहा विरोध केवल ओर केवल अपनी खोती जा रही जमीन को पाने का एक असफल प्रयास है। आज हालात यह हैं कि हर घर में, पार्क में, आफिस में, ड्राइंगरूम खाली समय मं योग पर ही चर्चा हो रही है। लोग योग के विषय मेे जानकारी प्राप्त कर रहे हैं व सीख रहें हैं। लेकिन कांग्रेस व धर्मनिरपेक्ष दलोंको यह रास नहीं आ रहा है उन्हें लग रहा है कि हर घर योग के माध्यम से हर घर मोदी का नारा फिर बुलंद हो रहा है। यही कारण है कि इन दलों की नीेद पूरी तरह से गायब हो चुकी है।

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