लेखक परिचय

ब्रह्मानंद राजपूत

ब्रह्मानंद राजपूत

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jayalalitha

तीन दशकों तक तमिलनाडु की राजनीति पर राज करने वाली अम्मा के नाम से मशहूर, भारतीय राजनीति के इतिहास में अपनी अलग छवि रखने वाली अंतिम सांस तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता एक अत्यंत लोकप्रिय, साहसी, संघर्षशील एवं सशक्त नेता थी। जयललिता एक पक्के इरादों वाली करिश्माई नेता थी। वो जो ठान लेती थी उसे पूर्ण करके ही मानती थी। जयललिता ने 34 साल पहले 1982 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) से एम॰जी॰ रामचंद्रन के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। स्वर्गीय एम॰जी॰ रामचंद्रन को उनका राजनैतिक गुरु कहा जाता है। क्योंकि एम॰जी॰ रामचंद्रन ही अम्मा को राजनीति में लेकर आये थे। एम॰जी॰ रामचंद्रन ने 1983 में जयललिता अन्ना द्रमुक का प्रोपेगेंडा सचिव नियुक्त किया। इसके बाद जयललिता 1984-1989 तक राज्यसभा की सदस्य रहीं। जयललिता एक धैर्यवान राजनीतिज्ञ थी। जयललिता अपने आप को एम॰जी॰ रामचंद्रन का उत्तराधिकारी मानती थी। 1984 में जब एम॰जी॰ रामचंद्रन मस्तिष्क के स्ट्रोक के बाद अक्षम हो गए तब जया ने मुख्यमंत्री की गद्दी संभालनी चाही, लेकिन तब रामचंद्रन ने उन्हें पार्टी के प्रमुख पदों से भी हटा दिया। लेकिन जयललिता ने पूरे धैर्य से राजनीति की।

1987 में जब रामचंद्रन का निधन हुआ तब अन्ना द्रमुक दो धड़ों में बंट गई। एक धड़ा एम॰जी॰ रामचंद्रन की पत्नी जानकी रामचंद्रन का था। और दूसरा धड़े का नेतृत्व खुद जयललिता ने किया। यहीं से जयललिता के राजनीती में संघर्षों की शुरुआत हुई। 1989 में जयललिता की पार्टी ने राज्य विधानसभा में 27 सीटें जीतीं और जयललिता तामिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनीं। 25 मार्च 1989 को जैसे ही तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री करूणानिधि ने बजट भाषण पढ़ना शुरू किया कांग्रेस के सदस्य ने प्वाएंट ऑफ ऑर्डर उठाया कि पुलिस ने विपक्ष की नेता जयललिता के खिलाफ अप्रजातांत्रिक ढ़ंग से काम किया है। जयललिता ने भी उठ कर शिकायत की कि मुख्यमंत्री के उकसाने पर पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है और उनके फोन को टैप किया जा रहा है। स्पीकर ने कहा कि वो इस मुद्दे पर बहस की अनुमति नहीं दे सकते क्योंकि बजट पेश किया जा रहा है। इसी को लेकर द्रमुक और अन्ना द्रमुक के सदस्यों के बीच हाथापाई हुई। जब जयललिता विधानसभा स्थगित होने के बाद विधानसभा से निकल रहीं थी तब द्रमुक के सदस्यों ने उनके साथ बदसलूकी की और उनकी साड़ी को खींच दिया। इससे उनका पल्लू गिर गया और जयललिता खुद जमीन पर गिर गयीं। तभी जयललिता ने उसी हालात में द्रोपदी का रूप धारण कर मीडिया को संबोधित करते हुए प्रतिज्ञा ली की अब वो मुख्यमंत्री बनकर ही विधानसभा में कदम रखेंगी।

इस प्रकरण से जयललिता को तमिलनाडु के लोगों की सहानभूति प्राप्त हुई और जयललिता ने राजीव गाँधी की हत्या के बाद कांग्रेस के साथ 1991 का विधानसभा चुनाव लड़ा। और पूर्ण बहुमत की सरकार के साथ सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री बनीं। इस बीच उन्होंने महिलाओं के लिए अनेक काम किये उन्होंने अनाथ और बेसहारा बच्चियों के लिए  ‘क्रैडल बेबी स्कीम’ शुरू की ताकि उनको खुशहाल जीवन मिल सके। इस बीच जयललिता ने मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य में महिला थाने खुलवाए। 1996 के विधानसभा चुनावों में जयललिता को करारी हार मिली। और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा।  भ्रष्टाचार के मामलों और कोर्ट से सजा होने के बावजूद वे अपनी पार्टी अन्ना द्रमुक को विधानसभा चुनावों में विजय दिलाने में सफल रहीं। लेकिन इस दौरान उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण भारी कठिन दौर से गुजरना पड़ा। लेकिन धैर्यवान जयललिता 2001 में फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुईं। दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद जयललिता ने कई कठोर फैसले लिए। लेकिन 2004 के लोकसभा चुनावों में हार के कारण उन्हें ये फैसले वापस लेने पड़े। 2006 के विधानसभा चुनावों में जयललिता को फिर विधानसभा चुनावों में द्रमुक से करारी शिकस्त मिली। लेकिन इस बीच जयललिता ने तमिलनाडु में अपनी एक नयी पहचान बनाई।

2011 के विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत से विजय प्राप्त की। मुख्यमंत्री बनते ही जयललिता ने गरीबों के लिए कई योजनाएं चालू की। जिससे उन्हें गरीब और मजदूर वर्ग का भारी जनसमर्थन मिला। तमिलनाडु में सरकार द्वारा अम्मा ब्रांड से अनेक योजनाएं लागू की। लोगों को टेलीविजन, स्मार्टफोन, मिक्सर ग्राइ्र्रडर फ्री में दिये। गरीब महिलाओं के लिये अनेक योजनायें चालू कीं। 2014 के लोकसभा चुनावों में अम्मा ने मोदी लहर के वाबजूद 39 लोकसभा सीटों में से 37 लोकसभा सीटें जीतीं और अपनी विपक्षी पार्टी द्रमुक सहीं राष्ट्रीय दलों का सूफड़ा साफ कर दिया। इस बीच 2014 में जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में जेल भी जाना पड़ा। लेकिन जयललिता कर्नाटक हाईकोर्ट से आरोपमुक्त हुईं और दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुईं। 2015 के तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में उन्होंने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाकर अनेक मिथकों को तोडा। क्योंकि तमिलनाडु की जनता हर बार अदला-बदली से सरकारें चुनती थी। पिछले तीस सालों में तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण शख्शियत रहकर अपनी शर्तों पर राजनीति करने वाली अम्मा तमाम अड़चनों और भ्रष्टाचार के मामलों से झटके के बावजूद वापसी करने में सफल रहीं थीं। बेशक अम्मा के राजनैतिक जीवन में उन पर तमाम तरह के आरोप लगें हो लेकिन उन्होंने जनता के बीच अपनी लोकप्रियता हमेशा बरकरार रखी।

राजनीति में आने से पहले जयललिता एक प्रख्यात और सफल अभिनेत्री थीं और उन्होंने तमिल, तेलुगू, कन्नड और एक हिंदी तथा एक अँग्रेजी सहित 150 के आसपास फिल्मों में काम किया। उन्होंने अपना फिल्मी कैरियर 15 साल की उम्र में न चाहते हुए अपनी मां के कहने पर शुरू किया। जयललिता ने अधिकतर फिल्में एमजी रामचंद्रन और  शिवाजी गणेशन के साथ की। एकमात्र हिंदी फिल्म उन्होंने धर्मेंद्र के साथ की। उनके समर्थक उन्हें अम्मा (मां) और कभी कभी पुरातची तलाईवी (‘क्रांतिकारी नेता’) कहकर बुलाते हैं। जयललिता एक ऐसी नेता थीं उनके लिए हजारों समर्थक अपनी जान भी न्योछावर करने के लिए तैयार रहते थे। लेकिन आज अम्मा अपने समर्थकों को रोता छोड़ गयी। प्रसिद्ध राजनेता, संघर्षशील, धैर्यवान करिशमाई व्यक्तित्व की धनी जयललिता तमिलनाडु के साथ ही राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भी काफी प्रभावशाली थीं। तमिलनाडु की लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में राज्य के आर्थिक विकास और गरीब वर्ग के सामाजिक कल्याण के लिए उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनका निधन तमिलनाडु और देश के लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है। जिसकी पूर्ति करना असंभव है।

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