लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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yamunaडा. राधेश्याम द्विवेदी
यमुना भारत की एक नदी है। यह गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो यह यमुनोत्री (उत्तरकाशी से 30 किमी उत्तर, गढ़वाल में) नामक जगह से निकलती है और प्रयाग (इलाहाबाद) में गंगा से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में चम्बल, सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में दिल्ली और आगरा के अतिरिक्त इटावा, काल्पी, हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रुप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है। ब्रज की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है।
आधुनिक प्रवाह :-वर्तमान समय में सहारनपुर जिले के फैजाबाद गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे ६५ मील तक बढ़ती हुई हरियाणा के अम्बाला और करनाल जिलों को उत्तर प्रदेशके सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, हिंडन और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं। इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की राजधानी है। दिल्ली के लाखों नर-नारियों की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
मथुरा के तटवर्ती स्थान:- ब्रज प्रदेश की सांस्कृतिक सीमा में यमुना नदी का प्रथम प्रवेश बुलंदशहर जिला की खुर्जा तहसील के ‘जेबर’ नामक कस्बा के निकट होता है। वहाँ से यह दक्षिण की ओर बहती हुई फरीदाबाद (हरियाणा) जिले की पलवल तहसील और अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की खैर तहसील की सीमा निर्मित करती है। इसके बाद यह छाता तहसील के शाहपुर ग्राम के निकट यह मथुरा जिले में प्रवेश करती है और मथुरा जिले की छाता और भाँट तहसीलों की सीमा निर्धारित करती है। जेबर से शेरगढ़ तक यह दक्षिणाभिमुख प्रवाहित होती है उसके बाद कुछ पूर्व की ओर मुड़ जाती है। ब्रज क्षेत्र में यमुना के तट पर बसा हुआ पहिला उल्लेखनीय स्थान शेरगढ़ है। शेरगढ़ से कुछ दूर तक पूर्व की दिशा में बह कर फिर यह मथुरा तक दक्षिण दिशा में ही बहती है। मार्ग में इसके दोनों ओर पुराण प्रसिद्ध वन और उपवन तथा कृष्ण लीला स्थान विधमान हैं। यहाँ पर यह भाँट से वृन्दावन तक बल खाती हुई बहती है और वृन्दावन को यह तीन ओर से घेर लेती है। पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन काल में वृन्दावन में यमुना की कई धाराएँ थीं, जिनके कारण वह लगभग प्रायद्वीप सा बन गया था। उसमें अनेक सुन्दर वनखंड और घास के मैदान थे, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने साथी गोप बालकों के साथ गायें चराया करते थे। वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर वृन्दावन बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्णोपासना और कृष्ण भक्ति का प्रचार किया था। वृन्दावन में यमुना के किनारों पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं और उन पर अनेक मंदिर-देवालय, छतरियां और धर्मशालाएँ है। इनसे यमुना के तट की शोभा अधिक बढ़ जाती है। वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है। मथुरा यमुना के तट पर बसा हुआ एक एसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालिन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। यहाँ भी यमुना के तट पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं। यमुना में नाव से अथवा पुल से देखने पर मथुरा नगर और उसके घाटों का मनोरम द्रष्य दिखाई देता है। मथुरा में यमुना पर दो पक्के पुल बने हैं जिनमें से एक पर रेलगाड़ी चलती है तथा दूसरे पर सड़क परिवहन चलते हैं। मथुरा नगर की दक्षिणी सीमा पर अब गोकुल बैराज भी निर्मित कराया गया है जिसका उद्देश्य ब्रज के भूमिगत जल के स्तर को पुनः वापिस लाना और ब्रज की उपजाऊ भूमि को अधिकाधिक सिंचित करना है। विगत काल में यमुना मथुरा-वृन्दावन में एक विशाल नदी के रुप में प्रवाहित होती थी, किन्तु जबसे इससे नहरें निकाली गयी हैं, तब से इसका जलीय आकार छोटा हो गया है। केवल वर्षा ॠतु मे यह अपना पूर्ववर्ती रुप धारण कर लेती है। उस समय मीलों तक इसका पानी फैल जाता है। मथुरा से आगे यमुना के तट पर बायीं ओर गोकुल और महावन जैसे धार्मिक स्थल हैं तथा दायें तट पर पहले औरंगाबाद और उसके बाद फरह जैसे ग्राम हैं। यहाँ तक यमुना के किनारे रेतीले हैं, किन्तु आगे पथरीले और चटटानी हो जाते हैं, जिससे जल धारा बल खाती हुई मनोरम रुप में प्रवाहित होती है।सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा निर्मित करती है। सादाबाद तहसील के मंदौर ग्राम के पास यह आगरा जिले में प्रवेश करती है। वहाँ इसमें करबन और गंभीर नामक नदियां आकर मिलती हैं।
आगरा के तटवर्ती स्थान:- आगरा जिले में प्रवेश करने पर नगला अकोस के पास इसके पानी से निर्मित कीठम झील है, जो सैलानियों के लिये बड़ी आकर्षक है। कीठम से रुनकता तक यमुना के किनारे एक संरक्षित वनखंड का निर्माण किया गया है, जो ‘सूरदास वन’ कहलाता है। रुनकता के समीप ही यमुना तट पर ‘गोघात’ का वह प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ महात्मा सूरदास ने १२ वर्षों तक निवास किया था और जहाँ उन्होंने महाप्रभु बल्लभाचार्य से दीक्षा ली थी। यमुना के तटवर्ती स्थानों में दिल्ली के बाद सर्वाधिक बड़ा नगर आगरा ही है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक, व्यापारिक एंव पर्यटन स्थल है, जो मुगल सम्राटों की राजधानी भी रह चुका है। यह यमुना तट से काफी ऊँचाई पर बसा हुआ है – यमुना दिल्ली के पूर्वी भाग में बहती है, उत्तर से दक्षिण की तरफ़। यहाँ पर भी यमुना पर दो पुल निर्मित हैं। आगरा में यमुना तट पर जो इमारतें है, मुगल बादशाहों द्वारा निर्मित किला और ताज महल पर्यटकों के निमित्त अत्याधिक प्रसिद्ध हैं।
आगरा से आगे प्रयाग संगम तक :-आगरा नगर से आगे यमुना के एक ओर फिरोजाबाद और दूसरी ओर फतेहबाद जिला और तहसील स्थित है। उनके बाद बटेश्वर का सुप्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल आता है, जहाँ ब्रज की सांस्कृतिक सीमा समाप्त होती है। बटेश्वर का प्राचीन नाम ‘सौरपुर’ है, जो भगवान श्री कृष्ण के पितामह शूर की राजधानी थी। यहाँ पर यमुना ने बल खाते हुए बड़ा मोड़ लिया है, जिससे बटेश्वर एक द्वीप के समान ज्ञात होता है। इस स्थान पर कार्तिक पूर्णमा को यमुना स्नान का एक बड़ा मेला लगता है।बटेश्वर से आगे इटावा एक नगर के रुप में यमुना तट पर बसा हुआ है। यह भी आगरा और बटेश्वर की भाँति ऊँचाई पर बसा हुआ है। यमुना के तट पर जितने ऊँचे कगार आगरा और इटावा जिलों में हैं, उतने मैदान में अन्यत्र नहीं हैं। इटावा से आगे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध नदी चम्बल यमुना में आकर मिलती है, जिससे इसका आकार विस्तीर्ण हो जाता है, अपने उद्गम से लेकर चम्बल के संगम तक यमुना नदी, गंगा नदी के समानान्तर बहती है। इसके आगे उन दोनों के बीच के अन्तर कम होता जाता है और अन्त में प्रयाग में जाकर वे दोनों संगम बनाकर मिश्रित हो जाती हैं।चम्बल के पश्चात यमुना नदी में मिलने वाली नदियों में सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। इटावा के पश्चात यमुना के तटवर्ती नगरों में काल्पी, हमीर पुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रुप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है। प्रयाग में यमुना पर एक विशाल पुल निर्मित किया गया है, जो दो मंजिला है। इसे उत्तर प्रदेश का विशालतम सेतु माना जाता है। यमुना और गंगा के संगम के कारण ही, प्रयाग को तीर्थराज का महत्व प्राप्त हुआ है। यमुना नदी की कुल लम्बाई उद्गम से लेकर प्रयाग संगम तक लगभग 860 मील है।
सांस्कृतिक महत्व:- भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रुप बन सका था। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का संबध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुतः यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना की प्रमुख आधार रही है। पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार यह देम में यमुना जी के एक हजार नामों से उसकी पशस्ति का गायन किया गया है। ३ यमुना के परमभक्त इसका दैनिक रुप से प्रति दिन पाठ करते हैं। ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य – श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
गंगा से पहले यमुना की सफाई:- केंद्रीय जल संसाधन मंत्री एवं गंगा सफाई अभियान की मुखिया उमा भारती ने कहा कि गंगा से पहले यमुना की सफाई का कार्य किया जाएगा। उमा ने एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मोत्सव के अवसर पर दीनदयाल धाम में आयोजित समारोह में देश की सभी नदियों की सफाई के लिए ‘दीनदयाल सुजलाम योजना’ की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत ही यमुना की सफाई का कार्य गंगा से भी पहले प्रारंभ कर दिया जाएगा, जिसका ब्लू प्रिंट भी तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें एक दिन पूर्व राष्ट्रीय गंगा नदी खाड़ी प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का पदभार सौंपा है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में यमुना में इतना पानी छोड़े जाने का कार्य किया जाएगा, जिससे सामान्य गंदगी पानी के बहाव के साथ बह जाए और अविरल धारा बहती रहे। दूसरे, हर निकटवर्ती शहर से यमुना में गिरने वाले नालों एवं सीवर का बहाव नदी में जाने से रोका जाएगा। तीसरे स्तर पर नदी में डाली जाने वाली पूजा सामग्री पर भी पूरी तरह रोक लगाने का कार्य किया जाएगा। इस प्रकार जब यमुना साफ होगी तभी गंगा को भी साफ करना संभव हो जाएगा, क्योंकि आखिर में यमुना का इलाहाबाद में गंगा में संगम हो जाता है। उन्होंने कहा कि यमुना के किनारे-किनारे हरियाली भी विकसित की जाएगी। लेकिन जनता को भी जिम्मेदारी निभानी होगी कि कोई भी यमुना में गंदगी न डाले और अतिक्रमण न करे। उमा भारती ने केंद्रीय ग्रामीण विकास, सड़क एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी का संदेश देते हुए उनके विभाग की ओर से ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास योजना लागू किए जाने की भी जानकारी सभा में दी। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से शीघ्र ही दीनदयाल धाम को आदर्श गांव एवं फरह विकास खण्ड को आदर्श ब्लॉक बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
शुद्धिकरण के लिए हस्ताक्षर अभियान:- यमुना शुद्धिकरण और यमुना की निर्मलता, अविरलता के लिए आगरा में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। 2008-10 तक लगभग 35 हजार लोगों ने यमुना के शुद्धिकरण के लिए अपने हस्ताक्षर कर अपनी मंशा जाहिर की। आगरा में यमुना की दुर्दशा से आंदोलित यमुना निधी के संयोजक पंडित अश्विनी कुमार मिश्र ने इस हस्ताक्षर अभियान का संयोजन किया। यमुना में निश्चित मात्रा में प्रवाह बनाए रखने के संबंध में, साथ ही 1978 की बाढ़ के विस्तार क्षेत्र को यमुना का क्षेत्र माना जाय, यमुना के लिए एक सर्वाधिकार प्राप्त प्राधिकरण की स्थापना की जाए, यमुना के घाटों और इसके जंगलों की साफ-सफाई और हरियाली लाई जाए, रिवर सीवर का सम्बन्ध विच्छेद होना चाहिए, यमुना की सहायक नदियों को उचित योजनाओं से पुनर्जीवित किया जाए आदि मांगों को लेकर यह हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। लोगों में जनचेतना पैदा करने के लिए और यमुना की समस्याओं को लोगों को बताने के लिए इसके साथ ही लोगों का यमुना के प्रति संकल्प पैदा हो इस हस्ताक्षर अभियान की मूल मंशा थी। आगरा में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। इसीलिए हस्ताक्षर अभियान के लिए ऐसे स्थानों पर स्टॉल लगाकर हस्ताक्षर कराए गए। ताज महोत्सव में भी हस्ताक्षर कराये गए। स्कूलों, कॉलेजों में छात्रों के बीच भी हस्ताक्षर कराए गए। विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में स्टॉल लगाकर श्रद्धालुओं के हस्ताक्षर कराए गए। यह हस्ताक्षर अभियान आगरा के अलावा मथुरा, गोकुल और उसके आस-पास के क्षेत्रों में चलाया गया। गोकुल के कार्ष्णि श्रीगुरू शरणानंदा जी के आश्रम में भी हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। 2008-10 तक चले इस अभियान में लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की और इस अभियान से प्राप्त लोगों के मंशापत्र को कई संगठनों ने अपने न्यायालयीय मुकदमों में भी कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया है।
नीदरलैंड के सहयोग से यमुना की सफाई:- उ. प्र. सरकार यमुना नदी की बदहाली को रोकने के लिये गंगा एक्शकन प्लान के तहत जापान से भरपूर किंतु उधार में मिले अरबों रूपया खर्च करने के बाद अब नीदरलैंड से तकनीकि और कर्ज लेने की प्रक्रिया को प्रवृत्त हो चुकी है । उत्तर प्रदेश सरकार ने डचों से कर्जे के लिये बीते जुलाई महीने में जो आपसी समझ और सहयोग समझौता (मेमोरेंडम आफ अंडर स्टैंरडिंग -एम ओ यू ) हस्ताक्षरित किया गया था उसके तहत नीदरलैंड के सहयोग से यमुना नदी सहित प्रदेश की कई अन्य नदियों की स्थिति में सुधार किया जाना है। ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन, शहरी विकास, जल प्रबंधन आदि कार्य भी इसमें शामिल हैं।राज्य् सरकार के साथ हस्ताक्षरित एम ओ यू में आगरा में यमुना नदी की सफाई और सीवर प्रबंधन में सुधार का खास तौर से उल्लेख है.तीन साल तक के लिये प्रभावी इस एम ओ यू के तहत साइकिल ट्रैक के बनाये जाने तथा छोटे शहरों के विकास में सहयोग आदि का खास तौर से उल्लेख है। नीदरलैंड के एम ओ यू में आगरा को स्मार्ट सिटी बनाये जाने के लिये जरूरी काम भी शामिल है किन्तुं आगरा फिलहाल तो स्मार्ट सिटी की दौड में पिछड़ ही चुका है और 2017 मे होने वाले विधान सभा चुनाव होने तक उसकी स्मार्ट सिटी को लेकर बनी स्थिति में कोई बदलाव आना मुश्किल है.मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में उनके आवास पर ही लखनऊ में यह एम ओ यू साइन हुआ था। मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने उ प्र सरकार की ओर से तथा नीदरलैंड सरकार की ओर से वहां के दिल्ली स्थित राजदूत एल फान्सिस स्टोपलिंग ने हस्ताक्षर किये थे। वैसे नीदर लैंड से यमुना नदी की स्थिति में सुधार के लिये कर्ज व सहयोग लेने के मामले ब्यूहरोक्रेटिक और टेक्नोलॉजिस्ट की असरदार लाबी सक्रिय है। इस असदार लाबी ने राजनेताओं को जो सपने दिखाये हुए हैं उनमें दिल्ली से आगरा के बीच नौवाहन संभव किया जाना, रबड डैमों की श्रंखला खडी करना तथा नदी तटीय स्थितिमें सुधार होना जैसे दिलचस्प लक्ष्य शामिल हैं। मथुरा में यमुना संबधी कायों के लिये सौ करोड रुपये हाल में ही अवमुक्त हुए हैं, जबकि दिल्ली में यमुना नदी मे गिरने वाले वाले कुछ नालों के डिस्चा्र्ज की प्रदूषण संबधी गुणवत्ताक सुधारने के काम को 21 करोड का डच कर्ज पहले से ही मिल चुका है।

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