लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी

आनन्‍द ह्दय का विषय है, यह बात आज से वर्षों पूर्व हिन्‍दी साहित्‍य के प्रकाण्‍ड विद्वान आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल ने अपने निबंधों के माध्‍यम से सभी को समझाई थी। इससे ओर पहले जाएं तो हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने अनुभव से यह जानकर सभी को बताया था कि आवश्यकताएं तो हर एक की सीमित हैं, किंतु कामनाँ असीमित हैं। इसलिए उन्‍होंने उपनिषदों एवं पुराण कथाओं के माध्‍यम से लोगों को इससे बाहर निकलने का रास्‍ता सुझाया, जिसका कि ईशावास्‍य उपनिषद एक अनुपम उदाहरण है, लेकिन इसके बाद भी लोगों की कामनाएँ कम नहीं हो सकीं और जीवन की समस्‍याएँ यथावत रहीं । आगे इसलिए ही मनीषियों ने जीवन को आनंदमयी बनाए रखने के लिए उत्सवधर्मिता को हमारे रोजमर्रा के जीवन से जोड़ा । इसके बाद व्‍यक्‍ति का जन्‍म और मृत्‍यु दोनों ही उत्‍सव में बदल गए । हमारे पूर्वजों को लगता होगा कि शायद इस कदम से दुनिया में चहुंओर खुशी छा जाएगी, पर ऐसा नहीं हो सका । लोग हैं कि अब भी आनंद से अछुते हैं, ऐसे में देश के राज्‍य मध्‍यप्रदेश ने अपनी सरकार के माध्‍यम से आनन्‍द जो ह्दय एवं मन की उच्‍चावस्‍था है को देना आरंभ कर दिया है ।

देखा जाए तो देश का मध्यप्रदेश वह राज्य है, जहां औसतन हर रोज छह किसान आत्महत्या करते हैं। 60 युवतियां गायब हो जाती हैं। प्रतिदिन 13 महिलाएं दुष्कर्म की शिकार होती हैं। पांच वर्ष आयु तक के जीवित प्रति हजार में 379 बच्चे हर रोज काल के गाल में समा जाते हैं और 43 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं । इन हालातों के बीच राज्य सरकार का आनंद मंत्रालय आरंभ करना एवं उसकी वर्षभर की गतिविधियों से लोगों के रोजमर्रा के जीवन में सुख का समावेश कर देना किसी चुनौती से कम नहीं है। इस सब के बीच यह जरूर बड़ी बात है कि आज मध्यप्रदेश आनंद मंत्रालय खोलकर देश का पहला राज्य बन गया है, जहां नागरिकों की सुख-कामना के लिए यह अनोखा कोई प्रयास किया गया है ।

वस्‍तुत: इसे शुभारंभ करते हुए मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो कहा, वह उनका जनता के प्रति अपने समर्पण की उच्‍चावस्‍था को दर्शाता है। वे सही कहते हैं कि सच्चा आनंद दूसरों की मदद करने से मिलता है। प्रदेश की जनता के चेहरे मुस्कुराते रहें। जिन्दगी बोझ नहीं, वरदान लगे। इसके लिए प्रदेश में आनंद मंत्रालय का गठन किया गया है। इसमें रोटी, कपड़ा, मकान, आध्यात्म, योग और ध्यान के साथ ही कला, संस्कृति और गान भी केंद्र में रखे गए हैं । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह यह सत्‍य ही मान रहे हैं कि खुशी के लिए धन, संसाधन और पद-प्रतिष्ठा पर्याप्त नहीं है। शास्त्रों में कहा गया है कि दान के बिना अन्न जहर के समान होता है। आनन्‍द मंत्रालय जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोंण लाने के उद्देश्य से आनंद सभाओं का आयोजन कर रहा है । विद्यार्थियों को तनाव मुक्त रखते हुये उन्हें जीवन जीने की कला सिखाने के कार्य में जुट गया है । आगे मध्‍यप्रदेश जीवन को आनंदमय और अर्थपूर्ण बनाने से संबंधित पाठ को शालेय पाठ्यक्रमों में शामिल करने जा रहा है । इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण लाना है ताकि वे जरूरतमंदो की सेवा और सहायता के लिये वैचारिक रूप से तैयार रहें।

आनन्‍द मंत्रालय प्रदेशवासियों से यह अपेक्षा करता है कि वह ऐसी उपयोगी वस्तुओं को जरूरतमंदो को दें जोकि उनके पास आवश्यकता से ज्यादा हैं, जैसे कपड़े, कंबल, किताबें, बर्तन, फर्नीचर या अन्य सामग्री। पूर्ण रूप से इस स्वैच्छिक कार्यक्रम में समाज के सभी सक्षम वर्गों से अपील की जा रही है कि वे इसमें आगे आकर भाग लें। वास्‍तव में मध्‍यप्रेदश में हुई आनन्‍द मंत्रालय की इस पहल के साथ वह देश का पहला राज्य बन गया है जहाँ आर्थिक रूप से सम्पन्न नागरिकों द्वारा अपनी जरूरत से ज्यादा सामग्री जरूरतमंदो को देने के लिए “आनंदम” कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। प्रत्येक जिले में ऐसे स्थान तय किए गए हैं जहाँ नागरिक जरूरतमंदों के लिए सामग्री दान दे रहे हैं और जरूरतमंद अपनी आवश्‍यकता के अनुरूप उन्हें ले रहे हैं।

आज आनंद मंत्रालय प्रदेश में लगभग 10 हजार स्थानों पर सभी आयु वर्ग के नागरिकों के लिए पारंपरिक खेलों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। बिना किसी प्रतियोगिता के केवल आनंद के लिए ये उत्सव स्वंसेवकों के सहयोग से आयोजित किये जा रहा हैं। आनंद सभा के माध्‍यम से माध्यमिक, उच्चतर मध्यमिक स्कूलों तथा कॉलेज के छात्र-छात्राओं को जीवन कौशल सिखाने एवं जीवन को प्रसन्नता के साथ जीने के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें आनंदम वह कार्य है जिसमें शासकीय, अर्धशासकीय तथा स्थानीय निकायों के कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों अधिकारियों में प्रसन्नता पूर्वक सकारात्मक रहकर कार्य करने के लिए विशेष गतिविधियो का आयोजन हो रहा है।

यहां आनंद शोध पीठ – Indian Institute of Science Education & Research (IISER) Bhopal के साथ “आनंद का विज्ञान” पर एक शोध पीठ की स्थापना की जा रही है जो आगे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आनंद के संबंध में की जा रही वैज्ञानिक रिसर्च पर कार्य करेगी। आनंद दल के माध्‍यम से नागरिको की आनंद विभाग की गतिविधियों में सक्रीय भागीदारी की जा रही है । इसके अलावा आनन्‍द मंत्रालय ने अपने नागरिकों के जीवन में आनंद के स्तर को मापने के लिए मार्च 2017 तक राज्य के हैप्पीनेस इंडेक्स का निर्धारण किये जाने पर कार्य आरंभ कर दिया है ।

वस्‍तुत: आज दुनिया में कुछ ही देश हैं जिनमें धन भले ही कम हो सकता है, किंतु प्रसन्‍नता का स्‍तर या कहें आनन्‍द प्राप्‍ती का स्‍तर सबसे अधिक पाया गया है । अमेरिका जैसा विकसित, चीन जैसा औद्योगिक और भारत जैसा कर्मशील देश भी इस आनंद की सहज प्राप्‍ती के लिए विश्‍व के इन कुछ देशों की तरह प्रयासरत हैं । पिछले वर्ष की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट यह बताती है कि डेनमार्क विश्‍व का सबसे खुश और आनंद की अनुभूति रखने वाला देश है, उसके बाद नंबर भूटान का आता है । निश्‍चित ही इस सब के बीच भारत में मध्‍यप्रदेश में जो यह आनन्‍द मंत्रालय और उसके माध्‍यम से दैनन्‍दिन जीवन में उत्‍सवधर्मी कार्यों की पहल हुई है, अब उससे आगे सभी को यही उम्‍मीद है कि रोजमर्रा के जीवन में आम जनता के बढ़ते नकारात्‍मक प्रभाव एवं चिंतन की दिशा को सकारात्‍मकता की दिशा में मोड़ने की दृष्‍ट‍ि से यह मील का पत्‍थर साबित होगा।

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