लेखक परिचय

एल. आर गान्धी

एल. आर गान्धी

अर्से से पत्रकारिता से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जुड़ा रहा हूँ … हिंदी व् पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है । सरकारी सेवा से अवकाश के बाद अनेक वेबसाईट्स के लिए विभिन्न विषयों पर ब्लॉग लेखन … मुख्यत व्यंग ,राजनीतिक ,समाजिक , धार्मिक व् पौराणिक . बेबाक ! … जो है सो है … सत्य -तथ्य से इतर कुछ भी नहीं .... अंतर्मन की आवाज़ को निर्भीक अभिव्यक्ति सत्य पर निजी विचारों और पारम्परिक सामाजिक कुंठाओं के लिए कोई स्थान नहीं .... उस सुदूर आकाश में उड़ रहे … बाज़ … की मानिंद जो एक निश्चित ऊंचाई पर बिना पंख हिलाए … उस बुलंदी पर है …स्थितप्रज्ञ … उतिष्ठकौन्तेय

Posted On by &filed under विविधा.


क्या राष्ट्र भक्ति साम्प्रदायिकता है ?

एल. आर. गाँधी

अन्ना ने अपने आन्दोलन को सेकुलर शक्ल देने के चक्कर में मंच पटल से भारत माता और शहीदों के चित्र हटा कर मात्र महात्मा गाँधी के चित्र को स्थान दिया- यही सोच कर कि …

दामन पीवे शराब ते करे सज़दा

राज़ी रब्ब ते गुस्से शैतान वी नईं…

मगर अपने आका मोहन दास करमचंद गाँधी कि भांति अन्ना भी यहीं पर ‘मात’ खा गए. शैतान भी कभी खुश हुआ है भला.? गाँधी जी ने मुसलमानों के जिन्न जिन्नाह को खुश करने की जी तोड़ कोशिश की – उसे कायदे आज़म की उपाधि से नवाज़ा,बेवजह खिलाफत आन्दोलन को तूल दी ,जिन्नाह को सब कुछ सौंपने की वकालत भी कर डाली मगर शैतान खुश न हुआ और राष्ट्र को टुकड़ों में बाँट कर ही माना. कुछ कुछ यही अन्ना के साथ हो रहा है. सेकुलर सरकार तो अन्ना के खून की प्यासी है ही . लालू – अमर जैसे चोर उचक्‍कों का विरोध भी समझ में आता है. अरुणा राय का सरकारी एन.जी.ओ और सोनिया की ‘नाक ‘..! विरोध करना बनता है. मगर अरुंधती राय और दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सयद अहमद बुखारी भी आँखें तरेर रहे हैं ! यह तो मानसिक कुष्ठरोग के लक्षण जैसा लगता है. अधिकाँश मुस्लिम संगठनों ने अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का समर्थन किया है मगर बुखारी साहेब को राम लीला मैदान से भारत माता की जय और वन्दे मातरम के उद्दघोश से बुखार चढ़ गया और लगे गुर्राने … और किरण बेदी भी फटाफट पहुँच गई मानाने . बुखारी साहेब का मानना है कि भारत माता और वन्दे मातरम इस्लाम विरोधी है…इस्लाम में तो जन्म देने वाली माँ की पूजा में भी विश्वास नहीं किया जाता.

यह अंधविश्वास नहीं तो और क्या है कि छठी शताब्दी की इस्लामिक मान्यताओं को २१वी सदी में भी ढ़ोया जा रहा है…..महात्मा गाँधी ने अलामा इक़बाल के ‘सारे जहाँ से अच्छा गीत को इतनी बार गुनगुनाया कि उसे आज़ादी का तराना बना डाला. मगर इक़बाल को जब पाकिस्तान के कीड़े ने काटा तो उसने अपने इस गीत को ही बदल डाला . हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा को बदल कर ‘ मुस्लिम हैं हम वतन है सारा जहाँ हमारा. बना दिया. मगर गाँधी को फिर भी होश नहीं आया और लगे रहे इन शैतानों को खुश करने में. वही काम आज अन्ना के सिपहसलार कर रहे हैं. अरे जो राष्ट्र को नहीं मानता उसे राष्ट्र की समस्याओं से क्या लेना देना.ऐसे मानसिक कुष्ठ साम्प्रदायिक लोगों को साथ लगाने से तो राष्ट्र को प्यार करने वाले भारत माँ के रणबांकुरों को साथ लेकर चलना बेहतर है. जागरूक मुसलमान भ्रष्टाचार की पीड़ा को समझता है और वह अन्ना के साथ है. किरण जी यदि बुखारी साहेब को किसी प्रकार अन्ना के मंच पर ले भी आई तो अन्ना के उस अहद का क्या होगा जिसमे किसी राजनेता को मंच से दूर रखने का…… बुखारी साहेब तो खुद को मुसलमानों के राजनेता कहते हैं. ऐसे शख्‍स को मंच पर लाना तो राष्ट्रवादी मुसलमानों का अपमान है. क्या बुखारी को मंच पर देख कर भारत माता की जयजयकार या वन्देमातरम का राष्ट्र गीत नहीं गाएगी जनता.? क्या राष्ट्रभक्ति साम्प्रदायिकता है ?

Leave a Reply

6 Comments on "अन्ना और सेकुलर शैतान…"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
YUNUS KHAN (BABUBHAI)
Guest

Dosto ek Imambukhari ke kahne par aur kisi bhi Dharm ke Thekedaro ke uksane par hamari Ekta par Fark nahi padta, ye kuch hamare Desh me ginti ke Pakhandi log hai jo har dharm me milenge wah dharm ke nampar apas me nafrat failate hai, aur dusre dharm ka apman karte hai, aur kisi bhi dharm me nafrat failana pap hai, isliye hame in pakhandiyo ko najar-andaj karke, purane Matbhed bhulkar, Hamare Hindustan me Ekta ki Misal banana hai, hamare Desh ko bhrastachar se mukt karna hai.VANDE MA TARAM, INKALAB JINDABAD.

varun devbarman
Guest

भाइयों थकेला की बात का बुरा मत मानो, जैसा की उसके नाम से द्रष्टिगोचर हो रहा है, वह तन मन दोनों से थकेला है, इमाम के पजामे धो धोकर इसका दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा है,

एल. आर गान्धी
Guest

जैन साहेब व् गुप्ता जी सटीक व् सार्थक विचारों के लिए साधुवाद… उतिष्ठ कौन्तेय

एल. आर गान्धी
Guest

जो शैतान अपनी माँ को भी नहीं मानते – पाक ले कर भी नापाक कत्लोगारत में लगे हैं .. बुखारी जैसे कठमुल्ला की वकालत कर रहे हैं… अल्लाह उन्हें सन्मति दे. .. उतिष्ठकौन्तेय.

Anil Gupta,Meerut,India
Guest
Anil Gupta,Meerut,India
मौलाना मोहम्मद अली ने एक बार गांधीजी के बारे में कहा था की भले ही मि. गाँधी में लाख खूबियाँ हों लेकिन मजहबी नजरिये से बुरे से बुरा मुस्लमान भी मि.गाँधी से अच्छा है. लेकिन अफ़सोस हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए पूरी जिंदगी समझौते करने वाले और पाकिस्तान बन्ने के बाद ओसे ५५ करोड़ रुपये देने के मसले पर सर्कार पर दवाब डालकर पाकिस्तान को दिलवाने वाले गांधीजी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के प्रतिशोध की आग में धधक रहे गोडसे की गोली खाकर अपनी जान देदी लेकिन हिन्दू मुस्लिम एकता आज भी एक मृग मरीचिका ही बनी है. इसके लिए जैसा… Read more »
wpDiscuz