लेखक परिचय

अनिल त्‍यागी

अनिल त्‍यागी

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

Posted On by &filed under प्रवक्ता न्यूज़, राजनीति.


अनिल त्यागी

अन्ना हजारे की हिसार हुंकार ने कांग्रेस की फिर ऐसी तैसी कर के रख दी. जानते हुए कि हिसार सीट आसान नहीं है कांग्रेस खाम्ख्वाह ही अन्ना और उसकी टीम की चमचागिरी करती नज़र आ रही है . कांग्रेस ही क्यों भा जा पा हो या कोई और सभी अन्ना कि टोपी मैं अपनी चाँद छिपाने को बेताब है. लेकिन कोई माई का लाल सच बोलने कि हिम्मत नहीं जुटा पा रहा कि अन्ना एक फर्जी संगठन की देन है इसीलिये इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम का संगठन जिसके नाम पर अन्ना ने भूख हड़ताल की थी खत्म हो गया है .दिग्विजय सिंह अन्ना से खत्तो किताबत मैं उलझे है. कोई भला आदमी यह तो बताए कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम का एन जी ओ जिसने रामलीला मैदान मैं लाखो करोडो जनता से लिए और खर्च किये कहाँ गया?.ऐसा संगठन जिसके संस्थापकों मैं से दो बड़े नामो स्वामी रामदेव और स्वामी अग्निवेश को अलग करदिया गया,क्या ऐसा इस संगठन के किसी प्रस्ताव से हुआ? या तुने कहा और मैंने सुना कि तर्ज़ पर दोने बड़े नाम बेगाने हो गए.

इस फर्जी संगठन कि कारगुजारियों को ढापने के लिए मीडिया महारथियों ने नाम निकला टीम अन्ना पर इसके फैसले लेने के लिए अधिकार दिया गया इंडिया अगेंस्ट करप्शन कि कोर कमेटी को, वही तय करती है कि अन्ना प्रधानमंत्री को खत लिखेगे या टीम अन्ना हिसार में कांग्रेस का विरोध करेगी , आज तक ये कही नहीं आया कि इस इण्डिया अगेंस्ट करप्शन नाम के एन जी ओ का कौन सदस्य है और कौन पदाधिकारी. इस संघठन ने पिछले दो सालो में कितने घपलेबाजो को बेनकाब किया या कोई और समाजसुधार का काम किया हो उत्तर शून्य ही आएगा .

अन्ना के नाम लोगो ने एक और तमगा जोड़ा है गांधीवादी होने का, मीडिया हो या जनता सब के सब ढोल पीट रहे है कि अन्ना ने गाँधी कि याद ताज़ा कर दी . पर मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अन्ना का गांधीवाद सिर्फ टोपी और धोती तक है .अन्ना के कर्म या विचारों का गांधीवाद से कोई लेना देना नहीं है .अन्ना का कर्म वहां से शुरू होता है जहाँ गांधीवाद का अंतिम चरण हुआ करता था गांधी ने जितनी बार भी आमरण अनशन किया अपने आन्दोलन के अंतिम चरण मैं किया पर अन्ना का कर्म का प्रथम चरण ही अनशन से शुरू होता है .जन जागरण ,जन चेतना , न तो उनके बसकी बात है न ही उनके अजेंडे मैं ऐसा कुछ है .गांधी जी गीता के कर्म योग के उपासक थे पर अन्ना तो हठयोगी जैसा व्यवहार करते है वो भी पूरे बंदोबस्त के साथ, गांधी ने सच्चे महात्मा कि तरह कभी भी जीवन और शरीर की कभी चिंता नहीं की जबकि अन्ना ने अनशन किया नामी गिरामी डाक्टर त्रेहन कि देखरेख में ,अब आप ही सोच ले कि अन्ना को अपने जीवन से कितना मोह है .शायद ये दुनिया मैं पहला अनशन होगा जहाँ अनशनकारी अपने निजी डाक्टर के साथ उतरा हो .अन्ना को भ्रष्टाचार विरोध का एसा भूत चढा है कि वे भ्रष्टाचारियों को फांसी पर लटकाने कि बात कर पता नहीं कौन से गांधीवाद कि बात करते हैं ? अन्ना बाबू सारे के सारे सांसदो को चोर मानकर उनके काम का लेखा जोखा तो मांगने कि बात करते है पर आज तक ये कहीं साफ़ नहीं है कि सांसदों का जॉब चार्ट क्या है क्या काम उन्हें करने है , टीम अन्ना को चाहिए की फील्ड में जाकर सांसदों को क्या काम अपने क्षेत्र में करना चाहिए इसकी जानकारी जनता को देनी चाहिए.

वास्तव मैं अन्ना नकारात्मक विचारधारा कि उपज है उनके आसपास किसी निर्माण या जनकल्याण कि न तो कोई सोच है और न ही कोई योजना. जहाँ तक अन्ना कि उपलब्धियों कि बात है वे हमेशा महाराष्ट्र मैं अपने अनशनो कि बात बताते है जिसमे कई मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा था और अनेको अफ्सरों के खिलाफ कार्यवाही हुई थी, पर उसके बाद कि बाते कोई नहीं करता कि उन हटाये गए मंत्रियों मैं से कितने दुबारा मंत्री बने, केंद्रीय मंत्री बने या उन मंत्रियों के भ्रष्टाचार का आगे क्या हुआ ? मेरी जानकारी के मुताबिक़ तो सारे के सारे आज भी राजनीति मैं सक्रिय है .

अन्ना अपने जनालोकपाल बिल को आज़ादी कि दूसरी लड़ाई बताकर मुग्ध है .पता नहीं क्यों ? राजनीती के लोग, अखबारों के आंकडेबाज , टी वी चेनलो के मज्मेबाज़, एमर्जेंसी जैसी घटनाओं को इतिहास से मिटाने पर आमादा है ,पता नहीं जन लोकपाल बिल बनते ही कौन सा अलादीन का जिन्न भ्रष्टाचार को खतम कर देगा शिकायत फिर भी जनता को ही दर्ज करानी पड़ेगी और आम जन को ताकतवर लोगों से उसी तरह जूझना होगा जैसा आज है, वैसे ही सबूत, गवाह ,और अदालतो के चक्कर लगने होंगे जैसा कि आज बस फर्क इतना होगा कि जो काम पहले कई साल मैं होता था वो टाइम बाउंड एक साल में हो जाएगा यानी सबूतो के अभाव मैं दोषी जल्द छूट जायेंगे और अगर लोकपाल ने कोई दंड दिया भी तो उच्च नयायालय मैं वकील अपने पैंतरे दिखा कर लाभ पा लेंगे. और यदि घपलेबाज़ जेलो मैं पहुँच भी गए तो क्या इससे भूखो को रोटी, बेघरो को घर और बेरोजगारों को रोजगार मिल सकेगा, मेरे समाज कि अंतिम पायदान पर पड़े दरिद्रनारायण को इससे क्या मिलेगा ? हो सकता है इससे किरण बेदी जैसे अफसरों को समय पर प्रमोशन मिल जाए या केजरीवाल जैसो को नौकरी न छोडनी पड़े, पर क्या इससे सारे झूठ फरेब और धोखे बंद हो जायेंगे, खेतों मैं पैदावार बढ़ जायेगी, बिजली, सड़क पानी की समस्या दूर हो जायेगी, जूआ , शराबखोरी, दहेजप्रथा जैसी बुराइयां खतम हो जायेगी, मेरे भाई इससे ऐसा कुछ नहीं होने वाला.

ऐसे में मुझे तो आशंका है कि भीडतंत्र के सामने मजबूर लोकतंत्र और उसकी प्रक्रियाये कमजोर होकर एक ऐसे तंत्र को जन्म देंगी जिसमे स्वयं सेवी संगठनों के नाम पर नई हुक्म्शाही का राज होगा.इसे साफ़ शब्दों में कहे तो एन .जी ओ का आतंकवाद पनपेगा.

Leave a Reply

1 Comment on "अन्ना हजारे एक नेगेटिव एप्रोच"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
आर. सिंह
Guest
अनिल त्यागी जी आप तो बहुत बड़े जादूगर लग रहे हैं.ऐसा लग रहा है कि या तो भ्रष्टाचार और वर्तमान व्यवस्था से आप पूरी तरह संतुष्ट हैं,अतः इसके विरोध में कोई भी बात आपको भली नहीं लगती या आपके पास ऐसी कोई जादूई प्रक्रिया है जिससे आप आनन् फानन में इसको बदल सकते हैं.अगर पहली बात सही है तो आगे कुछ कहने की आवश्यकता हीं नहीं है,पर अगर दूसरी बात सही है तो जल्दी से उस जादूई प्रक्रिया से लोगों को अवगत कराइए जिससे इस भ्रष्ट व्यवस्था से लोग निजात पायें. ऐसे एक बात और कहूं.आपने गांधी के साथ अन्ना… Read more »
wpDiscuz