लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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डा. राधेश्याम द्विवेदी
1947 में विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह पहले स्वतंत्र रहना चाहते थे लेकिन उन्होंने बाद में भारत में विलय के लिए सहमति व्यक्त कर दी. जम्मू-कश्मीर में पहली अंतरिम सरकार बनाने वाले नेशनल कॉफ्रेंस के नेता शेख़ अब्दुल्ला ने भारतीय संविधान सभा से बाहर रहने की पेशकश की थी.इसके बाद भारतीय संविधान में धारा 370 का प्रावधान किया गया जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार प्राप्त हैं. 1951 में राज्य को संविधान सभा को अलग से बुलाने की अनुमति दी गई. नवंबर, 1956 में राज्य के संविधान का कार्य पूरा हुआ. 26 जनवरी, 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया.
विशेष अधिकार:- धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है. लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित क़ानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए. इसी विशेष दर्जें के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती. इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बरख़ास्त करने का अधिकार नहीं है.
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता. इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कही भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है. यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते हैं.भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती. जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे। ये विशेष अधिकार निचले अनुभाग में दिये जा रहे हैं। विशेष अधिकारों की सूची 1. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है। 2. जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है। 3. जम्मू – कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। 4. जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है। 5. भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं। 6. भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है। 7. जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी। इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी। 8. धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागू नहीं है, RTE लागू नहीं है, CAG लागू नहीं है। संक्षेप में कहें तो भारत का कोई भी कानून वहाँ लागू नहीं होता। 9. कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है। 10. कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं। 11. कश्मीर में चपरासी को 2500 रूपये ही मिलते है। 12. कश्मीर में अल्पसंख्यकों [हिन्दू-सिख] को 16% आरक्षण नहीं मिलता। 13. धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं। 14. धारा 370 की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है। इसके लिए पाकिस्तानियो को केवल किसी कश्मीरी लड़की से शादी करनी होती है।
राजनीतिक दलों का रवैया:-विभिन्न राजनीतिक दलों का इस मामले पर रवैया अलग-अलग है. भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी सहित पूरा संघ परिवार प्रारंभ से इस धारा के ख़िलाफ़ रहा है. इसे समाप्त करवाने के लिए उसने अभियान छेड़ा था. उनके नारे थे ‘ एक देश में दो विधान नहीं.370 धोखा है, देश बचा लो.भाजपा का मुख्य तर्क है कि धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार प्राप्त है. भाजपा मानना है कि इन प्रावधानों के कारण यह मुसलिम बहुल राज्य बना हुआ है और पूरे देश के साथ समरस नही हो पाया है.पार्टी के अनुसार इसी वजह से वहाँ अलगाववादी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला है. भाजपा धारा 370 को संविधान निर्माताओं की ग़लती मानती है.जम्मू-कश्मीर की प्रमुख पार्टी, नेशनल कॉन्फ़्रेंस का रवैया इसके विपरीत है. उसका कहना है कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ धारा 370 का वादा किया था और किसी भी दल की सरकार हो, उसे इसका आदर करना चाहिए. उसका कहना है कि यह धारा 370 ही है जो जम्मू-कश्मीर को भारत से जोड़े हुए है.
भारतीय संविधान में धारा 370 समय-समय पर लोगों की बहस और विरोध का कारण बन जाती है जिसके चलते धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को लेकर लोगों के बीच झगड़े होने लगते हैं। आईये आपको बताते हैं कि धारा 370 है क्या? जो देश के विशेष राज्य कश्मीर में लागू है। धारा 370भारतीय संविधान का राष्ट्रचिन्ह धारा 370भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसके द्वारा जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है।
नेहरू के हस्तक्षेप से धारा तैयार:-भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग २१ का अनुच्छेद 370 जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है। विशेष अधिकार धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू- कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये। इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती। इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है। 1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता। इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू- कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते। भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू- कश्मीर पर लागू नहीं होती।
अब हो सकता है धारा 370 का खात्मा:- जम्मू कश्मीर में धारा 370 पर अब मोदी सरकार काफी सक्रिय नजर आ रही है। वहीं मोदी सरकार को अब धारा 370 खत्म करने के लिए कश्मीर के लोगों का भी साथ मिलता नजर आ रहा है। बीते दिन बीजेपी की बैठक में भी इस पर हुई चर्चा ने अटकलों को और भी ज्यादा बढ़ा दिया। जानकारी के मुताबिक धारा 370 को खत्म करने को लेकर मोदी सरकार ने अपनी कमर कस ली है। सरकार इसको लेकर विपक्ष के साथ भी एक बैठक करने वाली है। बताया ये भी जा रहा है कि जम्मू कश्मीर में उठ रहे जनमत संग्रह की मांग को लेकर भी मोदी सरकार बड़ा फैसला कर सकती है। पीएम मोदी से जम्मू कश्मीर के लोगों ने अपील की है कि उन्हें घाटी में शांति का माहौल चाहिए। आए दिन हो रही घटनाओं से यहां के लोग सकते में हैं। आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद से ही जम्मू कश्मीर में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

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