लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

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भाजपा नेता अरूण जेटली का आज के अखबारों में एक बड़ा ही अच्छा बयान छपा है। यह बयान इस संदर्भ में अच्छा है कि इसमें उन्होंने ईमानदारी के साथ अपनी बात कही है। उन्होंने कहा है भाजपा कभी अमेरिका विरोधी मुहिम का हिस्सा नहीं रही है। हमें जेटली की इस साफ़गोई की प्रशंसा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने तो शीतयुद्ध के जमाने में भी अमेरिका का विरोध नहीं किया था।

हम कहना चाहते हैं अरूण जेटली साहब यह तो संभव ही नहीं था। शीतयुद्ध का बड़ा निशाना मुसलमान थे और अमेरिका ने मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और घृणा में शीतयुद्ध में द्वितीय विश्वयुद्ध के यहूदीविरोधी घृणा के मनदण्डों का भी अतिक्रमण कर दिया था। अमेरिका के मजबूत दबंग के नाते इस्राइल ने मध्यपूर्व में मुसलमानों पर जुल्म ढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और आपका दल भारत में उस दौर में मुस्लिम विरोधी भावनाएं राममंदिर के नाम पर भड़का रहा था। याद करें वैसी घृणा आजाद भारत में भारत विभाजन के बाद पहलीबार देखी गयी थी। इस अर्थ में आपका दल भी शीतयुद्ध की अमेरिका की विशाल मुस्लिम विरोधी रणनीति का हिस्सा बना हुआ था।संभवतः ओबामा इस बात को जानते हैं।

उल्लेखनीय है मुंबई में राष्ट्रपति ओबामा ने 6 नबम्बर 2010 को ताजहोटल में 26/11 की घटना की स्मृति में इस हमले के संदर्भ में अपने भाषण में पाक का जिक्र नहीं किया था। इस पर भाजपा के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूढ़ी ने ओबामा के बयान में पाक के जिक्र न होने पर तेज प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उसी संदर्भ में भाजपा के नीतिगत मत को स्पष्ट करते हुए जेटली ने कहा है कि हम कभी भी अमेरिका विरोधी नहीं रहे।

अरूण जेटली की यह ईमानदार अमेरिकाभक्ति है। उन्होंने अपनी अमेरिकाभक्ति के रूपों का बखान करते हुए यह भी कहा एनडीए सरकार के शासन के समय में कई महत्वपूर्ण अमेरिकापरस्त रणनीतिक फैसले भी लिए गए। बेहतर तो यही होता कि अरूण जेटली उन फैसलों के बारे में स्वयं बताते। फिर भी एक-दो बातें तो हम सब भी जानते हैं कि भारत के द्वारा इस्राइल से अस्त्र-शस्त्र खरीदने के सबसे बड़े सौदे उसी दौर में किए गए। फिलीस्तीनियों से दूरी और इस्राइल से मित्रता उसी दौर में आरंभ हुई। एनडीए के दौर में ही अमेरिका की विदेशनीति की सेवा में भारत की विदेश नीति को पूरी तरह लगा दिया गया था।

अफगानिस्तान से लेकर इराक तक अमेरिकी दादागिरी की भाजपा ने उस दौरान और बाद में भी कभी आलोचना नहीं की। हम समझते हैं कि राष्ट्रपति बराक ओबामा अरूण जेटली की भावनाओं को समझेंगे और राजीव प्रताप रूढ़ी की आलोचना को गंभीरता से नहीं लेंगे। भाजपा पहले से ही अमेरिकाभक्त पार्टी है और वह आगे भी अपनी अमेरिका भक्ति को बरकरार रखेंगे। ऐसा सभी भारतवासी उम्मीद करते हैं।

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7 Comments on "अरूण जेटली की अमेरिकाभक्ति"

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Himwant
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पिछले एक-डेढ दशक से अमेरिका के उपर भारत ने पुरा भरोसा किया है, एक अच्छे मित्र की तरह। अमेरिका का व्यवहार भी मित्रोचित रहा है, मोटे तौर पर। लेकिन कभी-कभी लगता है की अमेरिका हमारे से चालबाजी करता है। लेकिन ऐसा शंका करना उचित नही है। भारत को अपनी तरफ से सच्ची मित्रता निभानी चाहिए। यह दोस्ती दुर तक जानी चाहिए।

Ravindra Nath
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चतुर्वेदी यह बताने का कष्ट करोगे कि अरब देशों के पिछलग्गू बन कर क्या मिला? वो तो पाकिस्तान को भारत पर तर्जीह देते आए हैं, ऐसे मे इस्रायल से दोस्ती पर तुम्हारे पेट मे मरोड क्यों? हम नही करते इस्रायल से दोस्ती अपने मालिक चीन से बोल कर कश्मीर से चीनी कब्जा हटवा दो, वो हिस्सा भारत को दिला दो, नक्सलियों को चीन समर्थन बंद करा दो, पाकिस्तान को आणविक मदद बंद करा दो, हम चीन के गुण गा लेंगे, हमे तो देश हित से मतलब है।

shyam
Guest

और कोमुनिश्ठो की चीनीभक्ति

हरपाल सिंह
Guest

aap log parhe likhe hokar bhi sachae se muh chhurate hai achchha nahi lagata jetalee agar kisano ke saude ,parmanu karar par,medicine ugyog par dohari nitee apnate hai to log galt kahte hai to kya hai samay aa raha hai sab spasht ho jayega ye to krishi ka sauda bahut pahle hi ye sahab amerika se kar ke aa rahe the dantopantathegarhee jee ke virod aur bharat me na aane dhamki dene par sauda hote hote bacha svarth bas moh se bhahar nikaliye aap log

Praful
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जगदीश्‍वर जी,
उससे भी बार घृणा तो कांग्रेस ने इंदिरा गांधी के हत्या के बाद फैलाई थी!
इस्राइल ने तो केवल १०००० क़त्ल ही किये हैं पिछले ६० सालों मैं लेकिन कांग्रेस ने तो २,००,००० सिखों का क़त्ल केवल ३-४ दिनों मैं ही कर दिया २६,००० को भोपाल में मार डाला!
फिर कातिल कौन ? इस्राइल, अमेरिका या फिर कांग्रेस !

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