लेखक परिचय

अरविन्‍द विद्रोही

अरविन्‍द विद्रोही

एक सामाजिक कार्यकर्ता--अरविंद विद्रोही गोरखपुर में जन्म, वर्तमान में बाराबंकी, उत्तर प्रदेश में निवास है। छात्र जीवन में छात्र नेता रहे हैं। वर्तमान में सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक हैं। डेलीन्यूज एक्टिविस्ट समेत इंटरनेट पर लेखन कार्य किया है तथा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा लगाया है। अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 1, अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 2 तथा आह शहीदों के नाम से तीन पुस्तकें प्रकाशित। ये तीनों पुस्तकें बाराबंकी के सभी विद्यालयों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को मुफ्त वितरित की गई हैं।

Posted On by &filed under आलोचना.


अरविन्द विद्रोही

अरविन्द केजरीवाल जैसे लोग सिर्फ बातो के वीर है , धन लेकर ही कार्यक्रम करवाने वाले ये लोग सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओ के संघर्षमयी जीवन को क्या जाने ? अपराधियो को कोई अच्छा नहीं मानता लेकिन जन संघर्षो में दर्ज मुकदमो से कोई अपराधी नहीं होता ,वो तो जन नेता और जन प्रतिनिधि बन जाता है और जो अपराधी है उसको कोई बलिदानी नहीं मानता है | जनता जिसको ज्यादा पसंद करती है उसको अपना प्रतिनिधि चुनती है ,जनता के चयन के आधार क्या है यह सोचने की बात है |जनता अपने रोज मर्रा के सवालो को हाल करने वालो को , अपने लोगो को -भले ही उसका आधार जाति-धर्म हो मानती है | संसद पे,लोकतंत्र पे बार बार प्रहार व कुठाराघात करने से बेहतर है कि अपने को तीस मार खां समझने वाले ये विदेशी धन पे संस्था चलाने वाले लोग आम जनता के बीच ,किसानों-मजदूरों के बीच उनके जीवन से जुडी समस्याओ के लिए लड़े | डॉ लोहिया या और भी तमाम सामाजिक-राजनीतिक लोगो ने लोकतान्त्रिक व्यवस्था की खामिओ और भ्रष्ट व तानाशाह सरकारों के खिलाफ हल्ला बोला था ,जनता को जगाने के लिए अपने विचार दिये और राजनीतिक संगठन बना के लडाई लड़ी ना कि भारत के आम जन को भड़काने व बरगलाने कि कुचेष्ठ करी जैसा कि ये लोग कर रहे है | राजनीतिक चेतना के बिना क्या मनमानी और तानाशाही का राज्य स्थापित करना चाहते है ये अरविन्द केजरीवाल जैसे लोग |अभी चुनावो में भागीदारी करनी चाहिए थी या आगे एक राजनीतिक दल बनाके अपने मुद्दों के साथ निर्वाचन के मैदान में आये और व्यवस्था परिवर्तन की लडाई लड़े ,किसने रोका है ? जनता को जगा के जन प्रतिनिधि बनने में क्या दिक्कत है ? एक बात सत्य है कि भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना कभी भी जनता को बरगलाना नहीं कहा जा सकता है | आज भारत की आम जनता तक की रक्त में भ्रस्टाचार जाने अनजाने प्रवाहित हो रहा है ,जनता को सुधरने के लिए चरित्र वान नेतृत्वकी जरुरत है जो आम जनता के बीच से ही संघर्षो से निकलेगा | अरविन्द केजरीवाल ,किरण बेदी आदि कितने ईमानदार है ये सबके सामने आ चुका है | जो व्यक्ति अपने मताधिकार का प्रयोग ना कर सके ,ये ना सुनिश्चित कर सके की उसका नाम मतदाता सूची में है की नहीं ,उससे लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में कोई आशा रखना व्यर्थ है | भ्रष्ट गैर सरकारी संगठनो के लोगो,अपराधिक चरित्र के नेताओ के विषय में सिर्फ चर्चा की अपेक्षा राजनीतिक सुधार के लिए काम करना बेहतर है | ध्यान यह भी रखना है कि अन्याय-शोषण के खिलाफ लड़ना और अपने को बेहतर -बुद्धिमान साबित करने के लिए सिर्फ अपनी व अपने समूह की बात मनवाने के लिए काम करने में,दबाव डालने में अंतर होता है |अपने स्वार्थ सिद्धि के प्रयास में जुटे है ये गैर सरकारी संगठनो के कर्ता धर्ता | कितना हास्यास्पद है कि लोगो को जागरूक बनाने निकले अरविन्द केजरीवाल खुद कितना जागरूक है ये सभी ने देखा |अपना नाम है कि नहीं ये सुनिश्चित ना कर पाना गैर जिम्मेदारी है ,एक साधारण ग्रामीण तक अपना नाम बढवाने में कोई कसर नहीं रखते है,यह पता करते है कि नयी मतदाता सूची में नाम है कि नहीं ,किसी ने कटवा तो नहीं दिया ,इतना जागरूक है आम जन | अपने मत पर नज़र नहीं और दुसरो को प्रेरित करते घूम रहे है ,,अच्छा मजाक है ,, ये मिथ्या अहंकार में मदमस्त गैर जिम्मेदार ,लोकतंत्र विरोधी,सामाजिक न्याय के विरोधी चरित्र के है और सामंत वादी मानसिकता के पोषक है |इनका विरोध जारी रहेगा ,, ये कोई जनता की आशा के चिराग नहीं , पूंजीवादियो की लगायी आग है और ऐसी आग जिससे भारत भूमि के आमजन घर जले , तबाही आये और लोकतंत्र कमजोर हो |

Leave a Reply

8 Comments on "अरविन्द केजरीवाल जैसे तीस मार-खां लोग सिर्फ बातो के वीर है"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
navin kumar jain
Guest
मेरी अरविन्द केजरीवाल जी से बिनब्र् निवेदन है आम आदमी पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कि तरह से ना चलाईं,यह बेहद खेद जनक है प्रशांत भूसन जैसे योग्य बकील साहेब नय सरकार बनाने काय लिया जो अपनी राइ दी थी वोह देलही कि महँ जनता कि आबाज थी आपने तो अपने को ही पार्टी का मालिक बना रखा है न हम ईश बात को बिलकुल पसंद नहीं करते है मनीष सिसोदिआ बोलते है दोबारा चुनाब करो क्या सारा खर्च मनीष सिसोदिआ अपनी जेब से देंगे ? मेरा यह प्रस्न मनीष सिसोदिआ जी से है कहना आसान है निभाना मुस्किल है… Read more »
आर. सिंह
Guest

आपकी टिपण्णी मैंने पढ़ी. यह बहुत पुराना आलेख है और इस पर मेरी टिपण्णी पहले से मौजूद है.चूंकि आपने अपना फोन नंबर दिया है,अतः अपना विचार मैं सीधा आपको भेज रहा हूँ

dr dhanakar thakur
Guest
अरविन्द केजरीवाल के बारे में आपके कथन अशालीन हैं -(कुछ) सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओ के संघर्षमय जीवन को इससे क्या लेना देना है- जन संघर्षो में ही सभी मुकदमे दर्ज नहीं होते – अपराधी जन प्रतिनिधि बलिदानी नहीं है | जनता जिसको ज्यादा पसंद करती है उसको अपना प्रतिनिधि चुनती है पर इसका भी अर्थ नहीं की हर चुना हवा अपराधी नहीं है – कोड़ा जीते, कान्हा है> सुखराम, एन डी तिवारी ,- जब जननेता नहीं रहे तो ये अरविन्द केजरीवाल जैसे लोग |आएंगे और यह अच्छी बात है – एक बात सत्य है कि भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना… Read more »
rupendr
Guest

p

Sanjay
Guest

सेये बकवास लिखने के लिए कपिल सिब्बल से कितने पै लिए ? चोरों की वकालत में खूब नाम और रुपया मिलेगा .चमचागिरी जिंदाबाद .

आर. सिंह
Guest
अरविन्द जी ,आपके हम नाम वालें ने एक भूल क्या कर दी,आप जैसे लोगों को नेताओं की विरुदावली गाने का एक बहुत बड़ा अवसर प्रदान हो गया. यह नकारा नहीं जा सकता की अरविन्द केजरीवालके द्वारा की गयी यह भूल एक बड़ी भूल है और उन्हें इसके लिए राष्ट्र से क्षमा याचना करनी चाहिए,पर इस भूल से उनके कथन की प्रमाणिकता नहीं ख़त्म होती.यह एक कट्टू सत्य है की हमारा संसद अपराधियों से भरा हुआ है.विद्रोही जी ये अपराध राजनैतिक अपराध नहीं हैं.ये हत्या,लूट,अपहरण और बलात्कार जैसे मामले हैं.अगर हमारी न्याय पालिकाएं लेट लतीफ़ नहीं होती तो इनमे अधिकतर सलाखों… Read more »
wpDiscuz