लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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poetry

रोगियों का मन है क्लांत,

अस्पताल का वातावरण,

श्वेत, शुद्ध, धवल,शान्त।

श्वेत  चादर श्वेत वस्त्र,

डॉक्टर और नर्स सभी,

विश्वास  के हैं दीप्तमान!

स्वास्थ लाभ होने का,

दे रहे हैं वरदान!

कभी कराह चीख़ पुकार.

ओ.पी.डी. में भीड़- भाड़,

रोगियों के परिवारों पर,

दुख और चिन्ता का प्रहार।

एक दुर्घटना हुई कल,

स्कूल बस ट्रक से टकराई,

सात बच्चे हुए घायल,

इस अस्पताल में दाख़िल हुए,

पांच ठीक होकर गये घर,

एक घायल पड़ा है यहीं अभी,

और एक की ना बची टांग।

क्या लिखूं मैं …

शब्द नहीं दर्द है..

बस, मौन…है..बस मौन!

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2 Comments on "अस्पताल के कमरे से…"

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PRAN SHARMA
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मर्मस्पर्शी कविता के लिए बीनू जी को बधाई .

विजय निकोर
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विजय निकोर

आज बहुत समय के बाद यहाँ आया हूँ, और आपकी रचना पढ़ी। अस्पताल का इतना अच्छा
दृश्य देने के लिए बधाई।

विजय निकोर

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