लेखक परिचय

अनिल गुप्ता

अनिल गुप्ता

मैं मूल रूप से देहरादून का रहने वाला हूँ! और पिछले सैंतीस वर्षों से मेरठ मै रहता हूँ! उत्तर प्रदेश मै बिक्री कर अधिकारी के रूप मै १९७४ मै सेवा प्रारम्भ की थी और २०११ मै उत्तराखंड से अपर आयुक्त के पड से सेवा मुक्त हुआ हूँ! वर्तमान मे मेरठ मे रा.स्व.सं. के संपर्क विभाग का दायित्व हैऔर संघ की ही एक वेबसाइट www.samvaadbhartipost.com का सञ्चालन कर रहा हूँ!

आरक्षण का प्रश्न

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 रा.स्व.सं. के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन वैद्य जी द्वारा जयपुर लिटरेरी फेस्टिवल में मुस्लिमों को आरक्षण पर एक सवाल के जवाब में देश में आरक्षण के बारे में कुछ बोला और मीडिया तथा भाजपा विरोधी दलों के बयानों की बाढ़ आ गयी! और दोबारा से बिहार चुनावों के दौरान संघ के सरसंघचालक जी… Read more »

न्यायपालिका और बढती पेंडेंसी

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 एक समाचार के अनुसार कल सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर के विदाई समारोह में भारी भीड़ को देख कर जस्टिस ठाकुर ने कहा कि सात साल के सर्वोच्च न्यायालय के कार्यकाल में अट्ठाईस विदाई समारोह देखे हैं लेकिन इतनी भीड़ पहले कभी नहीं देखी!उन्होंने मनोनीत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर से कहा कि… Read more »



महात्मा गाँधी की हत्या की पुन: जांच आवश्यक

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देश के वरिष्ठ नेताओं में से गिने जाने वाले और अक्सर आये दिन नये नये खुलासे करने वाले भाजपा के सीनियर नेता सुब्रमनियम स्वामी ने खुलासा महात्मा गांधी की हत्या को लेकर किया है, सन 1948 में हुयी महात्मा गांधी की हत्या पर सुब्रमनियम स्वामी का कहना है कि महात्मा गांधी की हत्या एक गहरी… Read more »

कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत

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भारत के लोग नयी चीजों को देर से अपनाते हैं लेकिन जब अपनाते हैं तो फिर पीछे नहीं देखते! आज देश में लगभग १०५ करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन हैं! और हर व्यक्ति धड़ल्ले से उसका प्रयोग कर रहा है! अगर पूरे जोरशोर से प्रयास किया जाये तो निश्चय ही लोग कॅश के स्थान पर कार्ड व्यवस्था को रोजमर्रा की जिंदगी का भाग बना लेंगे और एक बार जब उन्हें इसकी सुविधा की आदत पड जाएगी तो फिर देखते ही देखते भारत भी इस क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में दिखाई देगा!

गौरक्षकों को प्रधान मंत्री जी की नसीहत के मायने

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कल के कुछ समाचार पत्रों में विश्व हिन्दू परिषद् के प्रमुख डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया जी की प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा छद्म ‘गौरक्षकों’ के सम्बन्ध में दिए वक्तव्य पर तीखी प्रतिक्रिया प्रकाशित की है! एक समाचार पत्र ने तो यहाँ तक लिख दिया है कि श्री तोगड़िया जी ने कहा है कि “मन… Read more »

आधुनिक सोच वाले मुस्लिम नेतृत्व की आवश्यकता

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१८५७ में प्रथम स्वातंत्र्य समर में दश के हिन्दू और मुसलमान एक साथ मिलकर अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़े थे! उनकी इस एकता को तोड़ने के लिए अंग्रेज़ों ने षड्यंत्र करने शुरू किये! सबसे पहले उनके जाल में आये सय्यद अहमद खान जिन्हे बाद में अंग्रेज़ों ने सर की उपाधि देकर यह साबित कर दिया कि… Read more »

अफ्रीका के साथ कृषि उत्पादन मे सहयोग

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देश में इस समय दालों की कीमतों में तेजी को लेकर सरकार पर मंहगाई रोकने में ‘असफल’ रहने के आक्षेप लगते हुए सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है! कुछ टीवी चैनलों पर टमाटर सौ रुपये प्रति किलो हो जाने के ‘समाचार’ दिखाए गए! मैं स्वयं बाजार में सब्ज़ी खरीदने गया तो मैंने पाया कि… Read more »

देशी गाय बनाम विदेशी गाय

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देशी गाय

न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने १९९३ ई. में डायबिटीज (टाइप-१), ऑटो इम्यून रोग, कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी कई बीमारियों की जड़ यूरोपियन गायों का दूध होने का दावा (हाइपोथिसिस)पेश किया है!इस दूध को वे A1 दूध कहते हैं!यूरोपियन गोवंशमें से होल्सटीन, फ्रिजियन, जर्सी, स्विसब्राउन के दूध में BCM 7 जहर होने का मुद्दा उठने के बाद… Read more »

हमारा लक्ष्य: परम वैभव; लेकिन कैसे?

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भारत की आर्थिक प्रगति को सबसे बड़ी चुनौती यहाँ की तेजी से बढ़ रही जनसँख्या है!२०११ की जनसँख्या के आंकड़ों के अनुसार पिछले दशक में जनसँख्या वृद्धि की औसत दर लगभग १.७% प्रतिवर्ष रही है! पिछले पांच वर्षों में इसमें ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ लगता! फिर भी यदि पिछले पांच वर्षों की अथवा यों कहें… Read more »

काला धन, कर कानून और तेज़ आर्थिक विकास

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इनफ़ोसिस के पूर्व निदेशक और प्रत्यक्ष कर सुधार पर बनी केलकर समिति के सदस्य रहे मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेज के चेयरमैन श्री मोहनदास पई ने काले धन का पता लगाने की रणनीति को मजाक बताया है! उनका कहना है की सरकार के पास अपराधियों कोतुरन्त पकड़ने, जेल भेजने की कोई नीति या ख़ुफ़िया तंत्र नहीं… Read more »