लेखक परिचय

जावेद अनीस

जावेद अनीस

लेखक प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े पत्रकार है ।

नये मोड़ पर व्यापम घोटाला

Posted On & filed under राजनीति.

‘कैग’ की रिपोर्ट कांग्रेस को हमलावर होने का मौका दे दिया था विपक्ष के नेता अजय सिंह ने शिवराजसिंह का इस्तीफ़ा मांगते हुए कहा था कि “अब यह सवाल नहीं है कि मुख्यमंत्री व्यापमं घोटाले में दोषी हैं या नहीं लेकिन यह तो स्पष्ट हो चुका है कि यह घोटाला उनके 13 साल के मुख्यमंत्रित्व काल में हुआ है, उनके एक मंत्री सहित भाजपा के पदाधिकारी जेल जा चुके हैं और उनके बड़े नेताओं से लेकर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सब जाँच के घेरे में हैं इसलिए अब उन्हें मुख्यमंत्री चौहान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है.” दूसरी तरफ भाजपा ने उलटे “कैग” जैसी संवैधानिक संस्था पर निशाना साधा था और कैग’ द्वारा मीडिया को जानकारी दिए जाने को ‘सनसनी फैलाने वाला कदम बताते हुए उस पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का आरोप लगाया था

मजदूरों के लिए विपरीत समय

Posted On & filed under जन-जागरण, समाज.

पिछले साल अगस्त में लोकसभा में मोदी सरकार ने कारखाना (संशोधन) बिल 2016 पास करा लिया है. यह अधिनियम कारखानों को मज़दूरों से दुगना ओवरटाइम करवाने की छूट देता है. इस संशोधन के मुताबिक पहले के तीन महीने में 50 घंटे के ओवरटाइम के कानून के मुकाबले मज़दूरों से 100 घंटे ओवरटाइम करवाया जा सकेगा, इस तरह से साल भर में मज़दूरों से 400 घंटे का ओवरटाइम करवाया जा सकेगा. इस विधेयक को पेश करते हुए केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय कहा था कि ‘मोदी सरकार की ‘मेक इन इण्डिया’, ‘स्किल इन्डिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी कार्यकर्मों को देखते हुए यह संशोधन बेहद ज़रूरी बन गया है.’ उन्होंने दावा किया था कि ‘कारखाना अधिनियम में यह संशोधन मज़दूरों को अधिक काम करने और अधिक पैसा कमाने का अवसर देगा और इससे व्यापार करने की प्रक्रिया भी आसान बनेगी’. गौरतलब है कि 2014 में मोदी सरकार ने आने कुछ महीनों के अन्दर ही कारखाना (संशोधन) विधेयक लोक सभा में पेश किया था जिसके बाद उसे स्थायी समिति के पास भेजा दिया गया था.



वेल्थ के हवाले हेल्थ

Posted On & filed under समाज.

भारत के नीति निर्माताओं ने स्वास्थ्य सेवाओं को मुनाफा पसंदों के हवाले कर दिया है. आज भारत उन अग्रणी मुल्कों में शामिल है जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य का तेजी से निजीकरण हुआ है. आजादी के बाद के हमारे देश में निजी अस्पतालों की संख्या 8% से बढक़र 93 % हो हो गयी है. आज देश में स्वास्थ्य सेवाओं के कुल निवेश में निजी क्षेत्र का निवेश 75 प्रतिशत तक पहुँच गया है. निजी क्षेत्र का प्रमुख लक्ष्य मुनाफा बटोरना है जिसमें दावा कम्पनियां भी शामिल हैं, जिनके लालच और दबाव में डॉक्टरों द्वारा महंगी और गैरजरूरी दवाइयां और जांच लिखना बहुत आम हो गया है.

अनचाही बेटियाँ

Posted On & filed under महिला-जगत, समाज.

समाज में लिंग अनुपात संतुलन लगातार बिगड़ रहा है. वर्ष 1961 से लेकर 2011 तक की जनगणना पर नजर डालें तो यह बात साफ तौर पर उभर कर सामने आती है कि 0-6 वर्ष आयु समूह के बाल लिंगानुपात में 1961 से लगातार गिरावट हुई है पिछले 50 सालों में बाल लिंगानुपात में 63 पाइन्ट की गिरावट दर्ज की गयी है. लेकिन पिछले दशक के दौरान इसमें सांसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गयी है

यह दक्षिण एशिया की सदियों पुराने सोच पर हमला है

Posted On & filed under विविधा.

जावेद अनीस सूफियों ने हमेशा से ही प्यार और अमन की तालीम दी है, सदियों से उनकी दरगाहें इंसानी मोहब्बत और आपसी भाईचारे का सन्देश देती आई हैं. दक्षिण एशिया के पूरे हिस्से की भी यही  पहचान रही है जहाँ विभिन्न मतों और संस्कृतियां एक साथ फले फूले हैं. आज भी उनके दर मिली जुली… Read more »

“अलिफ़” के अधूरे सबक

Posted On & filed under मनोरंजन, समाज, सिनेमा.

जावेद अनीस मुस्लिम समाज में शिक्षा की चुनौती जैसे भारी-भरकम विषय को पेश करने का दावा, “लड़ना नहीं, पढ़ना जरूरी है” का नारा और जर्नलिस्ट से फिल्ममेकर बना एक युवा फिल्मकार, यह सब मिल कर किसी भी फिल्म के लिए एक जागरूक दर्शक की उत्सुकता जगाने के लिए काफी हैं. निर्देशक ज़ैगम इमाम के दूसरी फिल्म ‘अलिफ’  के साथ ना… Read more »

भूटान: सादगी का वैभव  

Posted On & filed under विविधा.

जावेद अनीस प्रकृति की गोद में बसा भूटान एक ऐसा देश है जो खुशहाली पर जोर देता है. जहाँ पूरी दुनिया का जोर जीडीपी यानी “सकल घरेलू उत्पाद” पर होता है वहीँ भूटान अपने नागिरकों का जीवन स्तर जीएनएच यानी “सकल राष्ट्रीय ख़ुशी” से नापता है. यह एक बड़ा फर्क है जो भूटान को पूरी दुनिया… Read more »

पुरूषों को भी “स्त्री मुक्ति” का गीत गाना होगा

Posted On & filed under समाज.

जावेद अनीस तकनीकी रूप से बेंगलुरु को भारत सबसे आधुनिक शहर मना जाता है लेकिन बीते साल की आखिरी रात में भारत की “सिलिकॉन वैली” कहे जाने वाले इस शहर ने खुद को शर्मशार किया है. रोशनी से चमचमाते और नए साल के जश्न में डूबे इस शहर की गलियाँ उस रात लड़िकयों के लिए… Read more »

नोक पर नौकरशाही

Posted On & filed under प्रवक्ता न्यूज़.

जावेद अनीस भारत में पुलिस और प्रशासन के कामों में राजनेताओं उनसे जुड़े लोगों और संगठनों का दखल कोई नया चलन नहीं है. इसकी वजह से अफसर और नौकरशाह सियासी देवताओं के मोहरे बनने को मजबूर होते हैं ऐसा वे कभी लालच और कभी मजबूरियों की वजह से करते हैं. पुलिस और प्रशासनिक अधकारियों,अफसरों की… Read more »

शहरी कांक्रीट में भटकते जंगली जानवर

Posted On & filed under पर्यावरण, विविधा.

जावेद अनीस ऐसा लगता है कि अपनी रिहाईश को लेकर  इंसान और जंगली जानवरों के बीच जंग सी छिड़ी हुई है. जंगल नष्ट हो रहे हैं और वहां रहने वाले शेर चीते और तेंदुए जैसे शानदार जानवर कंक्रीट के आधुनिक जंगलों में बौखलाए हुए भटक रहे हैं. उनके लिए जंगल और शहर के बीच का… Read more »