लेखक परिचय

आशीष कुमार ‘अंशु’

आशीष कुमार ‘अंशु’

हमने तमाम उम्र अकेले सफ़र किया हमपर किसी खुदा की इनायत नहीं रही, हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग रो-रो के बात कहने कि आदत नहीं रही।

भाषा के नाम पर संघर्ष खत्म होना चाहिएः अतुल कोठारी

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नयी दिल्ली – माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल एवं भारतीय भाषा मंच, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘ भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता: चुनौतियां एवं समाधान‘‘ विषय पर काॅन्स्ट्रीटयूशन क्लब मे। एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

अगर अल्लाह पैदा करना चाहेगा…..

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आशीष कुमार ‘अंशु’ वर्ष 2005 में 21 देशों से इस्लामिक विषयों के 40 विद्वान इस्लामाबाद में इकट्ठे हुए. वहां बात होनी थी, मुसलमानों के बीच गर्भ निरोध के सवाल को लेकर. विद्वानों के बीच लंबी चर्चा चलती रही और तीन दिनों के बाद भी सभी 40 विद्वान जनसंख्या नियंत्रण को लेकर एक राय बनाने के… Read more »



पांच साल का प्रवक्ता / आशीष कुमार ‘अंशु’

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अधिक दिन नहीं बीते ब्लॉग युग को खत्म हुए। उन दिनों ब्लॉगर्स मीट शब्द चल पड़ा था। हर दूसरे सप्ताह एक नया ब्लॉगर मीट हो आता था। शर्त यही थी कि जो लोग उस मुलाकात में शामिल होंगे, वे अपने-अपने ब्लॉग पर इस मुलाकात से जुड़ी हुई एक पोस्ट जरूर लिखेंगे। यदि एक ब्लॉगर मीट… Read more »

भोपाल मीडिया चौपाल : एक सार्थक पहल

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मीडिया चौपाल से लौटकर आशीष कुमार ‘अंशु’  जब भोपाल से मीडिया चौपाल का ई-मेल मिला था तो आम तौर पर किसी नए आयोजन को लेकर जैसे होता है, इस आयोजन को लेकर भी मन में कुछ सवाल थे और एक रूपरेखा थी। वैसे अनिल सौमित्रजी कार्यक्रम में शामिल होने वाले वर्चुअल मीडिया के नए रंगरूटों और… Read more »

जनता के ज्‍यादा निकट होती है मंचीय कविता

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आशीष कुमार ‘अंशु’ बात अधिक पुरानी नहीं है, मंचीय कवि अशोक चक्रधर जब हिन्दी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष तय हुए, उस वक्त हिन्दी साहित्य समाज इसलिए उन्हें गंभीरता से लेने को तैयार नहीं हुआ क्योंकि वे एक मंचीय कवि थे। उस वक्त की मंचीय कवियों की एकता उल्लेखनीय है। कवि जो मंच के गणित में… Read more »

अनूठे गौ सेवक भाईजी

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आशीष कुमार ‘अंशु’ ‘कुल्लू के अंदर दूध ना देने वाली गाएं किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रहीं हैं, इसी प्रकार बिलासपुर, मंडी में बंदरों का आतंक हैं। हिन्दू समाज के लोग अपनी धार्मिक आस्था की वजह से इन्हें मारते नहीं हैं। जिसकी वजह से उन्हें नुक्सान भी उठाना पड़ता है।’ बागवानी अनुसंधान केन्द्र… Read more »

ढहता आंदोलन, बदलते चरित्र

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-आशीष कुमार ‘अंशु’ कल्पना कीजिए आप एक खास वैचारिक आंदोलन से प्रेरित संगोष्ठी में हिस्सा लेने जाते हैं। जहां यह गोष्ठी तय है, वह मई की चिलचिलाती गर्मी में दिसम्बर बना हुआ है। बाहर और अंदर के तापमान में जमीन आसमान का अंतर है। इसी कार्यक्रम में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रतिनिधि भी अपनी बात… Read more »

‘लोकतंत्र’ की तलाश में ‘आम आदमी’

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-आशीष कुमार ‘अंशु’ बात थोड़ी पुरानी है भाई जान। एक बार आम आदमी भारत में लोकतंत्र को तलाशता हुआ आया। आम आदमी का नाम सुनकर आप भ्रमवश इसे प्रेमचंद का आम आदमी ना समझ लीजिएगा। चूंकि वह आम आदमी आज के दौर में सिर्फ प्रेमचंद सरीखे साहित्यकारों की चिन्ता में ही शामिल है। ना यह… Read more »

साढ़े तीन साल में डॉक्टर बनाने की कैसी तरकीब

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डीडीएस कम्यूनिटी सेन्टर के लिए काम करने वाली पूण्यम्मा जो किसानों की समस्या पर डाक्यूमेन्ट्री फिल्म बनाती हैं, आन्ध्र प्रदेश में बीटी कॉटन पर फिल्म बनाने के दौरान अपनी खुली जीप से नीचे गिर पड़ी। उन्हें चोट आई, जिससे उनकी कलाई की हड्डी टूट गई। उसके बाद वह अपनी टूटी हुई हड्डी को जुड़वाने के… Read more »

राष्ट्रीय समृद्धि के लिए कृषि प्रौद्योगिकी

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने देश को खाद्यान्न-संकट से उबार कर आत्मनिर्भर बनाने में उल्लेखनीय योगदान सन् 1905 में स्थापित होने से लेकर अब तक दिया है। संस्थान के क्रिया-कलापों को किसानों और जन-सामान्य तक पहुंचाने तथा यहां विकसित नवीनतम प्रौद्योगिकियों से उन्हें अवगत कराने हेतु इसी माह संस्थान में ‘कृषि विज्ञान मेला’… Read more »